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‘भइया! सही बतावा, अशोक मारा गा है ना’
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा
Updated Thu, 20 Aug 2015 11:48 PM IST
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ब्लॉक मुख्यालय से लगभग बीस किमी दूर ऊंचाडीह के मजरे पयासीपुरवा में गुरुवार को सन्नाटा पसरा रहा। लगभग दो सौ घरों के गांव में ब्राह्मण और कोल बिरादरी के लोग रहते हैं। जब संवाददाता यहां पहुंचा तो लोगों के चेहरों पर सवाल झलक रहे थे। ज्यादातर ने पूछा- ‘भइया! सही बतावा, अशोक मारा गा है ना’।
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अशोक कोल की मां कल्लीदेवी ऊंचाडीह की प्रधान रह चुकी हैं। पति का नाम छोटा कोल हैं। लगभग अस्सी साल के छोटा को अब सुनाई नहीं देता। दंपति के दो पुत्र और चार पुत्रियां हैं। गांव वाले इस संबंध में ज्यादा कुछ नहीं बोलते। ज्यादातर लोगों ने इस बात को नहीं माना कि अशोक कोल मार दिया गया।
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कुछ ने कहा, ‘भइया फोटो होए त दिखा द्या’। यानि वे अशोक की मौत पर तभी विश्वास करेंगे जब उसकी मौत की पुष्टि करती फोटो दिखाई जाएगी। हालांकि बाद में जब पुलिस की जीप इसके परिजनों को लेने पहुंची तो गांववालों को विश्वास हो गया कि अशोक कोल मारा गया।
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बताया गया कि अशोक डाकू बनने के बाद दो साल से गांव नहीं आया, वहीं कुछ लोग इसे गलत बता रहे थे। गांव के मुकेश उर्फ राजा नाती ने बताया कि उसे कुछ दिन पहले अशोक कोल ने पुरानी रंजिश में पीटा था।
पुलिस के उत्पीड़न से बना डाकू : कल्ली देवी
ऊंचाडीह की पूर्व प्रधान और डकैत अशोक की मां कल्ली देवी ने पोस्टमार्टम हाउस में अशोक के डाकू बनने के पीछे पुलिसिया उत्पीड़न की बात कही। बताया कि 2006 के आसपास अशोक के चचेरे भाई चेलवा जो ददुआ गिरोह में रहा करता था, उसका मर्डर हो गया।
इसमें गांव के ही एक व्यक्ति जिसे लोग अन्ना डीएम पुकारते थे, का नाम सामने आया। बाद में अन्ना का भी कत्ल हो गया। अशोक तब चमरौंहा से मानिकपुर तक डग्गामार जीप चलाता था। बताया जाता है कि तीन साल तक पुलिस अन्ना की हत्या में अशोक को तंग करती रही।
आजिज आकर अशोक ने बीहड़ का रास्ता पकड़ लिया। मां कल्ली ने बताया कि अशोक की पत्नी कुसुम आंगनबाड़ी कार्यकत्री थी। अशोक के बीहड़ की राह पकड़ने के बाद वह अपने दो बच्चों को लेकर कहीं चली गई। मायके लोधौंआ पत्रकारपुरम् मानिकपुर में भी उसका अता पता नहीं है।
अशोक कोल के खात्मे पर खुश हैं परिषदीय शिक्षक
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने दस्यु अशोक कोल के खात्मे पर संतोष जताया। साथ ही एसपी पवन कुमार को बधाई दी। शिक्षकों का कहना था कि दस्यु के खात्मे से शिक्षक निर्भीक होकर शिक्षण कार्य कर सकेंगे।
जिलाध्यक्ष उदयभान सिंह ने कहा कि पाठा में दस्यु अशोक कोल ने अपहरण की वारदातों से शिक्षकों के मन में दहशत फैला रखी थी। इससे बीहड़ इलाकों में स्कूलों के संचालन में दिक्कत आ रही थी। अशोक के खात्मे से यह दिक्कत दूर होगी।
अवध बिहारी सिंह, शिवगोपाल यादव, लवलेश कुशवाहा, आनंद यादव, दिलीप सिंह, बृजेश कुशवाहा, त्रिभुवन सिंह, कमलेश सिंह, रोशन सिंह, जितेंद्र सिंह, संजय अवस्थी, प्रदीप मिश्रा, शिवगोपाल आदि शिक्षकों ने कहा कि इसके लिए एसपी भी बधाई के पात्र हैं, जिनकी टीम का लगातार दस्युओं पर दबाव रहा है।
इसके अलावा बैठक में उच्च न्यायालय के उस आदेश का भी स्वागत किया गया, जिसमें सरकारी खजाने से धन लेने वाले सभी कर्मचारियों अधिकारियों को परिषदीय स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने की बात अनिवार्य करने को कहा गया है।