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भाजपा बसपा बिना जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में लड़ रही चुनाव
Updated Fri, 17 Nov 2017 11:30 PM IST
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चित्रकूट। नगर निकाय चुनाव में पहली बार भाजपा व बसपा के जिलाध्यक्ष भी मैदान में हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष ने नगर पंचायत राजापुर से तो बसपा जिलाध्यक्ष ने सदर से अध्यक्ष पद के लिए नामांकन किया है। दोनों जिलाध्यक्षों के मैदान में होने की वजह से पूरी जिला कमेटी जोरशोर से प्रचार में लगी हुई है। खास बात यह है कि दोनों के मैदान में उतरने के बाद पार्टी का कार्यवाहक जिलाध्यक्ष भी नहीं बनाया गया है।
नगर निकाय चुनाव में इस बार भारतीय जनता पार्टी ने जिलाध्यक्ष अशोक जाटव को राजापुर नगर पंचायत से अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी बनाया गया है। जिलाध्यक्ष के मैदान में उतरने की वजह से जिला कार्यसमिति के ज्यादातर पदाधिकारी राजापुर में ही नजर आ रहे हैं। इसी तरह बसपा जिलाध्यक्ष रामलखन निषाद सदर नगर पालिका के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे हैं। दोनाें जिला अध्यक्षों के मैदान में उतरने की वजह से दूसरे इलाके में पार्टी कार्यकर्ताओं को नेतृत्व नहीं मिल पा रहा है। कुछ पदाधिकारियों ने तो यहां तक कहा कि बिना जिलाध्यक्ष के दूसरी सीटों पर असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि जिलाध्यक्ष के नामांकन करते ही कार्यवाहक जिलाध्यक्ष बनाया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस संबंध में दोनों जिलाध्यक्षों से बात की गई तो उनका कहना है था कि वे पार्टी की नीतियों के अनुसार ही संगठन का भी काम कर रहें हैं और चुनाव भी लड़ रहे हैं। जहां जरूरत पड़ती है तो जिला उपाध्यक्ष व महामंत्री काम देख लेेते हैं।
भाजपा व बसपा के जिलाध्यक्षों भी मैदान में
पहली बार निकाय चुनाव में दो जिलाध्यक्ष उतरे
भाजपा जिलाध्यक्ष राजापुर से बसपा जिलाध्यक्ष सदर से प्रत्याशी
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नगर निकाय चुनाव में इस बार भारतीय जनता पार्टी ने जिलाध्यक्ष अशोक जाटव को राजापुर नगर पंचायत से अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशी बनाया गया है। जिलाध्यक्ष के मैदान में उतरने की वजह से जिला कार्यसमिति के ज्यादातर पदाधिकारी राजापुर में ही नजर आ रहे हैं। इसी तरह बसपा जिलाध्यक्ष रामलखन निषाद सदर नगर पालिका के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे हैं। दोनाें जिला अध्यक्षों के मैदान में उतरने की वजह से दूसरे इलाके में पार्टी कार्यकर्ताओं को नेतृत्व नहीं मिल पा रहा है। कुछ पदाधिकारियों ने तो यहां तक कहा कि बिना जिलाध्यक्ष के दूसरी सीटों पर असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि जिलाध्यक्ष के नामांकन करते ही कार्यवाहक जिलाध्यक्ष बनाया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस संबंध में दोनों जिलाध्यक्षों से बात की गई तो उनका कहना है था कि वे पार्टी की नीतियों के अनुसार ही संगठन का भी काम कर रहें हैं और चुनाव भी लड़ रहे हैं। जहां जरूरत पड़ती है तो जिला उपाध्यक्ष व महामंत्री काम देख लेेते हैं।
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भाजपा व बसपा के जिलाध्यक्षों भी मैदान में
पहली बार निकाय चुनाव में दो जिलाध्यक्ष उतरे
भाजपा जिलाध्यक्ष राजापुर से बसपा जिलाध्यक्ष सदर से प्रत्याशी