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अब बाहरियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ाई खतरे की आशंका
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पीडीडीयू नगर। वैश्विक महामारी कोविड 19 की जिले में दस्तक के बाद संक्रमितों की संख्या बढ़ने का खतरा लगातार बना हुआ है। अब तक ज्यादातर शहरों में कोरोना के खतरे से लोग भयभीत थे लेकिन अब ग्रामीण इलाकों में भी कोरोना संक्रमितों का खतरा बढ़ने लगा है। इसका कारण औद्योगिक शहरों से बड़े पैमाने पर आ रहे प्रवासी श्रमिक हैं। प्रवासी श्रमिकों की उचित जांच नहीं हो रही है। बबुरी थाना क्षेत्र के सुरौजी ग्राम सभा के मैनुद्दीनपुर गांव में बुधवार को मिला कोरोना पॉजिटिव इसका उदाहरण है।
देश में लॉकडाउन लागू होने के बाद उद्योग धंधे बंद हो गए और श्रमिक बेरोजगार हो गए। उचित साधन न मिलने पर बेरोजगार श्रमिक पैदल, निजी साधन से गृह जनपद पहुंच रहे हैं। ट्रेनों से जिले में आए श्रमिकों की तो जांच हो रही है लेकिन निजी साधन से चोरी छिपे आए श्रमिक घरों में पहुंच रहे हैं और गांव में इधर-उधर भ्रमण कर रहे हैं। इससे खतरा बढ़ने के साथ ही ग्रामीण डरने भी लगे है। इसका उदाहरण मैनुद्दीनपुर गांव में मुंबई से आये एक व्यक्ति के संक्रमित पाए जाने का है। इसी तरह 14 मई को दिल्ली से निजी साधन से जिले के 17 लोग आए। नगर स्थित राजकीय महिला अस्पताल में इलाज के लिए कुछ देर तक इंतजार किए। जांच नही होने पर इसमे से 12 लोग किसी तरह बिना जांच कराए घर भाग गए। सिर्फ 5 लोगो ने जांच कराई। बाद में पुलिस उनकी तलाश में जुट गई। वहीं चहनियां ब्लॉक में भी ग्रामीणों ने बाहरियों के घूमने पर चिंता जताई है और प्रशासन से उनकी जांच कर क्वारंटीन करने की मांग की है। कई गांवों में तो क्वारन्टीन करने की सुविधा भी नही है। गांव स्तर पर बनी निगरानी समिति भी बाहर से आने वालों पर नजर तो रख रही है लेकिन इसकी सही जानकारी प्रशासनिक मशीनरी तक नही पहुंचा रहे हैं। इससे न तो उनकी जांच हो रही है और न ही होम क्वारंटीन या जिला अस्पताल में क्वारंटीन किया जा रहा है। इससे गांवो में खतरे का संकट बढ़ने लगा है।
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देश में लॉकडाउन लागू होने के बाद उद्योग धंधे बंद हो गए और श्रमिक बेरोजगार हो गए। उचित साधन न मिलने पर बेरोजगार श्रमिक पैदल, निजी साधन से गृह जनपद पहुंच रहे हैं। ट्रेनों से जिले में आए श्रमिकों की तो जांच हो रही है लेकिन निजी साधन से चोरी छिपे आए श्रमिक घरों में पहुंच रहे हैं और गांव में इधर-उधर भ्रमण कर रहे हैं। इससे खतरा बढ़ने के साथ ही ग्रामीण डरने भी लगे है। इसका उदाहरण मैनुद्दीनपुर गांव में मुंबई से आये एक व्यक्ति के संक्रमित पाए जाने का है। इसी तरह 14 मई को दिल्ली से निजी साधन से जिले के 17 लोग आए। नगर स्थित राजकीय महिला अस्पताल में इलाज के लिए कुछ देर तक इंतजार किए। जांच नही होने पर इसमे से 12 लोग किसी तरह बिना जांच कराए घर भाग गए। सिर्फ 5 लोगो ने जांच कराई। बाद में पुलिस उनकी तलाश में जुट गई। वहीं चहनियां ब्लॉक में भी ग्रामीणों ने बाहरियों के घूमने पर चिंता जताई है और प्रशासन से उनकी जांच कर क्वारंटीन करने की मांग की है। कई गांवों में तो क्वारन्टीन करने की सुविधा भी नही है। गांव स्तर पर बनी निगरानी समिति भी बाहर से आने वालों पर नजर तो रख रही है लेकिन इसकी सही जानकारी प्रशासनिक मशीनरी तक नही पहुंचा रहे हैं। इससे न तो उनकी जांच हो रही है और न ही होम क्वारंटीन या जिला अस्पताल में क्वारंटीन किया जा रहा है। इससे गांवो में खतरे का संकट बढ़ने लगा है।
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