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जानकारी के अभाव और लापरवाही में सिलिंडर से होते हैं हादसे
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पीडीडीयू नगर। एलपीजी सिलिंडर के इस्तेमाल को लेकर हुई असावधानी, जानकारी का अभाव और लापरवाही बड़े हादसे का सबब बन जाती है। सिलिंडर ब्लास्ट से नुकसान इतना बड़ा हो जाता है कि उसकी भरपाई हो पाना मुश्किल होता है। इस लापरवाही के लिए कभी एजेंसी संचालक जिम्मेेदार होते हैं तो कई बार उपभोक्ताओं की नासमझी भी हादसों का कारण बनती है। उपभोक्ताओं की ओर से चंद रुपये बचाने के चक्कर में खराब गुणवत्ता वाले पाईप का गैस चूल्हे में इस्तेमाल करना, साथ ही सिलिंडर में लीकेज को नजरअंदाज करना घटना का कारण बन जाता है। वहीं समय-समय पर एजेंसी संचालकों की ओर से उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम न कराने के चलते उन्हें इस्तेमाल करने या फिर शिकायत करने की जानकारी नहीं होने के कारण भी घटना का कारण होता है। वहीं एजेंसी संचालक सिलिंडर आने के बाद बिना जांच पड़ताल के ही ट्रक से सीधे उपभोक्ताओं को देकर पल्ला झाड़ लेते हैँ जबकि बिना जांच पड़ताल के नहीं दिया जाना चाहिए। घटना के चलते कई बार लोगों की मौत भी हो चुकी है या फिर लोग गंभीर रूपय से झुलस चुके है। यह भी देखने मे आया है कि कई बार व्यवसायिक स्थलों पर लोग घरेलू सिलिंडर का इस्तेमाल करते है।
गैस लीकेज पर टोल फ्री नंबर पर करें शिकायत
घर में एलपीजी सिलिंडर लगाने के बाद यदि ऐसा आभास हो कि आपका सिलिंडर लीक कर रहा है तो फौरन सिलिंडर पर प्लास्टिक का कैप लगाकर उसे खाली स्थान पर रख दें। तुरंत इसकी सूचना टोल फ्री नंबर 1906 पर दें। जिसके बाद संबंधित एजेंसी का मैकेनिक आपके घर पहुंचकर गड़बड़ी को दूर करेंगे।
प्रत्येक एलपीजी सिलिंडर पर उसकी एक्सपाईरी डेट दर्ज होती है। इसलिए सिलिंडर लेने के पहले इसकी जांच कर लें कि कहीं आपका सिलिंडर एक्सपाईरी डेट का तो नहीं है। इस पर महीने के सापेक्ष एक कोड और वर्ष अंकित होता है।
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अवैध रीफिलिंग बनती है हादसे का सबब
मुनाफा कमाने के चक्कर में बाजार में बड़े सिलिंडर से छोटे सिलिंडर के रिफिलिंग का कार्य बड़ी ही तेजी से होता है । अवैध तरीके से होने वाली यह रीफिलिंग कई बार सिलिंडर में ब्लास्ट जैसी घटनाओं को सबब बन जाता है। वहीं उपभोक्ता भी सही गैस एजेंसी से छोटे सिलिंडर लेने के बजाय इन अवैध रीफिलिंग करने वालों के यहां पहुंच जाते है। लेकिन संबंधित विभाग इस पर कार्रवाई ही नहीं करता है।
एजेंसी संचालकों के अनुसार सिलिंडर में सबसे अधिक लीकेज दो स्थानों से होता है। सिलिंडर और चूल्हे को जोड़ने वाले पाइप का खराब हो जाना या फिर घटिया क्वालिटी पाइप का इस्तेमाल करना लीकेज का कारण बनता है। वहीं दूसरा लीकेज सिलिंडर में ओ रिंग के कारण होता है। इसलिए आवश्यक है कि ट्रालीमैन से सिलिंडर लेने के दौरान उपभोक्ता इस बात से संतुष्ट हो लें कि सिलिंडर में कहीं लीकेज तो नहीं हो रहा है। जांच के दौरान लीकेज पाये जाने पर ट्रालीमैन की जिम्मेदारी होगी की वह इसकी सूचना एजेंसी में मैकेनिक को देगा।
कंपनी के गोदाम से गैस सिलिंडर आने के बाद ग्राहकों को डिलेवरी से पूर्व सिलिंडर की जांच की जाती है। वहीं कंपनी की ओर से भी प्रत्येक दो वर्ष पर सिलिंडरों, पाइप और चूल्हे की जांच कर उसकी क्षमता परखी जाती है। इसके लिए शुल्क भी लिया जाता है। उपभोक्ता को चाहिए कि हमेशा एजेंसी से ही सिलिंडर बुक कराकर लें। साथ ही ट्रालीमैन से सिलिंडर की डिलेवरी लेते समय उसके लीकेज की जांच अवश्य करा लें।
अमित सिंह, अध्यक्ष, एलपीजी डीलर एसोसिएशन, चंदौली
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गैस लीकेज पर टोल फ्री नंबर पर करें शिकायत
घर में एलपीजी सिलिंडर लगाने के बाद यदि ऐसा आभास हो कि आपका सिलिंडर लीक कर रहा है तो फौरन सिलिंडर पर प्लास्टिक का कैप लगाकर उसे खाली स्थान पर रख दें। तुरंत इसकी सूचना टोल फ्री नंबर 1906 पर दें। जिसके बाद संबंधित एजेंसी का मैकेनिक आपके घर पहुंचकर गड़बड़ी को दूर करेंगे।
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प्रत्येक एलपीजी सिलिंडर पर उसकी एक्सपाईरी डेट दर्ज होती है। इसलिए सिलिंडर लेने के पहले इसकी जांच कर लें कि कहीं आपका सिलिंडर एक्सपाईरी डेट का तो नहीं है। इस पर महीने के सापेक्ष एक कोड और वर्ष अंकित होता है।
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अवैध रीफिलिंग बनती है हादसे का सबब
मुनाफा कमाने के चक्कर में बाजार में बड़े सिलिंडर से छोटे सिलिंडर के रिफिलिंग का कार्य बड़ी ही तेजी से होता है । अवैध तरीके से होने वाली यह रीफिलिंग कई बार सिलिंडर में ब्लास्ट जैसी घटनाओं को सबब बन जाता है। वहीं उपभोक्ता भी सही गैस एजेंसी से छोटे सिलिंडर लेने के बजाय इन अवैध रीफिलिंग करने वालों के यहां पहुंच जाते है। लेकिन संबंधित विभाग इस पर कार्रवाई ही नहीं करता है।
एजेंसी संचालकों के अनुसार सिलिंडर में सबसे अधिक लीकेज दो स्थानों से होता है। सिलिंडर और चूल्हे को जोड़ने वाले पाइप का खराब हो जाना या फिर घटिया क्वालिटी पाइप का इस्तेमाल करना लीकेज का कारण बनता है। वहीं दूसरा लीकेज सिलिंडर में ओ रिंग के कारण होता है। इसलिए आवश्यक है कि ट्रालीमैन से सिलिंडर लेने के दौरान उपभोक्ता इस बात से संतुष्ट हो लें कि सिलिंडर में कहीं लीकेज तो नहीं हो रहा है। जांच के दौरान लीकेज पाये जाने पर ट्रालीमैन की जिम्मेदारी होगी की वह इसकी सूचना एजेंसी में मैकेनिक को देगा।
कंपनी के गोदाम से गैस सिलिंडर आने के बाद ग्राहकों को डिलेवरी से पूर्व सिलिंडर की जांच की जाती है। वहीं कंपनी की ओर से भी प्रत्येक दो वर्ष पर सिलिंडरों, पाइप और चूल्हे की जांच कर उसकी क्षमता परखी जाती है। इसके लिए शुल्क भी लिया जाता है। उपभोक्ता को चाहिए कि हमेशा एजेंसी से ही सिलिंडर बुक कराकर लें। साथ ही ट्रालीमैन से सिलिंडर की डिलेवरी लेते समय उसके लीकेज की जांच अवश्य करा लें।
अमित सिंह, अध्यक्ष, एलपीजी डीलर एसोसिएशन, चंदौली