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Chandauli News: मित्रता में धन-दौलत और वैभव की कोई जगह नहीं
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बबुरी में कथा सुनातीं शालिनी। स्रोत- जागरूक पाठक
बबुरी। राधा-कृष्ण मंदिर भौंरही नरहन मैढ़ी के तीन दिवसीय संगीतमय भक्ति कथा एवं कृष्ण जन्माष्टमी समारोह का शुक्रवार को समापन हुआ। इसमें मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा और सुदामा चरित्र का वर्णन किया। श्रद्धालु कजरी और भजनों के साथ देर तक झूमते रहे।
गांव के बचाऊ तिवारी ने मानस पूजन किया। इसके बाद व्यासपीठ से मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का मोहक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में सत्कर्म, सेवा, परोपकार और भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। अच्छे कर्मों से पुण्य की वृद्धि होती है और मनुष्य को सद्मार्ग की प्राप्ति होती है।
उन्होंने सुदामा चरित्र के माध्यम से मित्रता का महत्व समझाया। कहा कि सच्ची मित्रता में धन-दौलत और वैभव का कोई महत्व नहीं होता। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल सखा सुदामा को जिस प्रेम और सम्मान के साथ अपनाया, वह मित्रता की अनुपम मिसाल है।
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इस दौरान गोवर्धन लीला के साथ भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कछु माखन का बल भयो, कछु ग्वालन भयो सहाय... और ब्रज में रटन राधिका गोरी... भजन प्रस्तुत किए गए। ब्रह्मा के भगवान श्रीकृष्ण की लीला की परीक्षा लेने के प्रसंग का भी वर्णन किया गया।
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गांव के बचाऊ तिवारी ने मानस पूजन किया। इसके बाद व्यासपीठ से मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का मोहक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में सत्कर्म, सेवा, परोपकार और भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। अच्छे कर्मों से पुण्य की वृद्धि होती है और मनुष्य को सद्मार्ग की प्राप्ति होती है।
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उन्होंने सुदामा चरित्र के माध्यम से मित्रता का महत्व समझाया। कहा कि सच्ची मित्रता में धन-दौलत और वैभव का कोई महत्व नहीं होता। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल सखा सुदामा को जिस प्रेम और सम्मान के साथ अपनाया, वह मित्रता की अनुपम मिसाल है।
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इस दौरान गोवर्धन लीला के साथ भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कछु माखन का बल भयो, कछु ग्वालन भयो सहाय... और ब्रज में रटन राधिका गोरी... भजन प्रस्तुत किए गए। ब्रह्मा के भगवान श्रीकृष्ण की लीला की परीक्षा लेने के प्रसंग का भी वर्णन किया गया।