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दरोगा से दिव्यांग कल्याण अधिकारी बने राघवेंद्र
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चंदौली। सकलडीहा तहसील के आखिरी गांव गाजीपुर जनपद से सटे महुंजी गांव निवासी राघवेंद्र प्रताप सिंह ने लोक सेवा आयोग 20017 की परीक्षा पास करके जिले का मान बढ़ाया है। उनका चयन दिव्यांग कल्याण अधिकारी के पद पर हुआ है। वर्तमान में राघवेंद्र पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक के पद पर प्रयागराज पुलिस लाइन में तैनात हैं।
महुंजी निवासी स्व. शशिकांत सिंह(पुलिस में निरीक्षक) के बेटे राघवेंद्र सिंह की प्राथमिक शिक्षा गांव के बगल में बीरासराय स्थित मां मिनाक्षी देवी जूनीयर विद्यालय से हुई है। इसके बाद उन्होंने गाजीपुर जिले के जमानिया स्थित अमर शहीद इंटर कालेज से इंटर तक की पढ़ाई करने के बाद वाराणसी के यूपी कालेज से बीएससी से स्नातक किया। इसके उपरांत वर्ष 2015 में उनका चयन यूपी पुलिस में उपनिरीक्षक पद पर हो गया। लेकिन पुलिस विभाग में अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए भी राघवेंद्र ने अपने लक्ष्य को पाने के लिए कठिन परिश्रम करते रहे। दो दिन पूर्व में लोक सेवा आयोग 2017 के परीक्षा परिणाम घोषित होने पर राघवेंद्र के खुशी का ठीकाना नहीं रहा। उनका चयन दिव्यांग कल्याण अधिकारी के पद पर हुआ है। राघवेंद्र बताते है कि लक्ष्य को हासिल करने के लिए चाचा विजय शंकर सिंह, बृजनारायन सिंह, भाई रेवतीरमण सिंह, मृत्युंजय सिंह और पत्नी शालिनी सिंह ने हमेशा हौसला दिया। परिवार के लोगों का स्नेह और प्रेरणा के बदौलत ही उनका यह लक्ष्य प्राप्त हुआ है।
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महुंजी निवासी स्व. शशिकांत सिंह(पुलिस में निरीक्षक) के बेटे राघवेंद्र सिंह की प्राथमिक शिक्षा गांव के बगल में बीरासराय स्थित मां मिनाक्षी देवी जूनीयर विद्यालय से हुई है। इसके बाद उन्होंने गाजीपुर जिले के जमानिया स्थित अमर शहीद इंटर कालेज से इंटर तक की पढ़ाई करने के बाद वाराणसी के यूपी कालेज से बीएससी से स्नातक किया। इसके उपरांत वर्ष 2015 में उनका चयन यूपी पुलिस में उपनिरीक्षक पद पर हो गया। लेकिन पुलिस विभाग में अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए भी राघवेंद्र ने अपने लक्ष्य को पाने के लिए कठिन परिश्रम करते रहे। दो दिन पूर्व में लोक सेवा आयोग 2017 के परीक्षा परिणाम घोषित होने पर राघवेंद्र के खुशी का ठीकाना नहीं रहा। उनका चयन दिव्यांग कल्याण अधिकारी के पद पर हुआ है। राघवेंद्र बताते है कि लक्ष्य को हासिल करने के लिए चाचा विजय शंकर सिंह, बृजनारायन सिंह, भाई रेवतीरमण सिंह, मृत्युंजय सिंह और पत्नी शालिनी सिंह ने हमेशा हौसला दिया। परिवार के लोगों का स्नेह और प्रेरणा के बदौलत ही उनका यह लक्ष्य प्राप्त हुआ है।
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