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कुपोषण से बच्चों को बचाने की पहल
Chandauli
Updated Tue, 15 Jan 2013 05:30 AM IST
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बबुरी। सपा सरकार बच्चों में खून की कमी व उनको कुपोषण से बचाने के लिए आशीर्वाद बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत 14 वर्ष के नीचे के बच्चों का नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण करके यह पता लगाने का प्रयास किया जायेगा कि उनके रक्त में किस प्रकार की कमी है। जिनसे उनके विकास में कमी आ रही है। लगभग एक सौ करोड़ रुपये की लागत से शुरू की जाने वाली इस योजना का लाभ सबसे पहले सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मिलेगा।
प्रदेश में कुपोषित बच्चों की बढ़ रही संख्या से चिंतित सरकार ने 14 वर्ष से नीचे के बच्चों के नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिये आशीर्वाद बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना शुरूआत कर रही है। इससे बच्चों में बढ़ रही मृत्यु दर में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है। पहले चरण में एनआरएचएम के तहत लगभग 1 करोड़ रुपये से शुरू होने वाली इस योजना का लाभ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मिलेगा। इसके तहत बच्चों के खून की जांच करके उनके स्वास्थ्य को परखने का प्रयास किया जायेगा। शासन द्वारा इसके लिये पूरे प्रदेश में बारह सौ तेरह मेडिकल टीमों का गठन किया गया है। इन दिनों बच्चों में कुपोषण की मात्रा बेतहाशा बढ़ने के कारण उनक ी मृत्यु दर भी तेजी से बढ़ रही है। इस पर कैसे रोक लगाई जाये काफी चिंता का विषय बनता जा रहा है। जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी केएन श्रीवास्तव के अनुसार इस योजना को मूर्तरूप रूप देने के लिये जिले में 18 चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है तथा उनको बाकायदा ट्रेनिंग भी दी जा रही है। वहीं विख्यात पर्यावरण विद परशुराम सिंह बच्चों में कुपोषण के चलते बढ़ रहे मृत्यु दर का सबसे बड़ा कारण खानपान में पौष्टिक तत्वों की कमी व पर्यावरण के बिगड़ते संतुलन को मानते हैं। उनके अनुसार बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिये सरकार का यह प्रयास सराहनीय कदम है।
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प्रदेश में कुपोषित बच्चों की बढ़ रही संख्या से चिंतित सरकार ने 14 वर्ष से नीचे के बच्चों के नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिये आशीर्वाद बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना शुरूआत कर रही है। इससे बच्चों में बढ़ रही मृत्यु दर में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है। पहले चरण में एनआरएचएम के तहत लगभग 1 करोड़ रुपये से शुरू होने वाली इस योजना का लाभ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मिलेगा। इसके तहत बच्चों के खून की जांच करके उनके स्वास्थ्य को परखने का प्रयास किया जायेगा। शासन द्वारा इसके लिये पूरे प्रदेश में बारह सौ तेरह मेडिकल टीमों का गठन किया गया है। इन दिनों बच्चों में कुपोषण की मात्रा बेतहाशा बढ़ने के कारण उनक ी मृत्यु दर भी तेजी से बढ़ रही है। इस पर कैसे रोक लगाई जाये काफी चिंता का विषय बनता जा रहा है। जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी केएन श्रीवास्तव के अनुसार इस योजना को मूर्तरूप रूप देने के लिये जिले में 18 चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है तथा उनको बाकायदा ट्रेनिंग भी दी जा रही है। वहीं विख्यात पर्यावरण विद परशुराम सिंह बच्चों में कुपोषण के चलते बढ़ रहे मृत्यु दर का सबसे बड़ा कारण खानपान में पौष्टिक तत्वों की कमी व पर्यावरण के बिगड़ते संतुलन को मानते हैं। उनके अनुसार बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिये सरकार का यह प्रयास सराहनीय कदम है।
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