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चुनावी रण में आधी आबादी को नहीं मिला मौका
Updated Sat, 18 Nov 2017 01:14 AM IST
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मुगलसराय। निकाय चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार तय कर दिए गए हैं लेकिन किसी भी दल ने आधी आबादी को अध्यक्ष पद की दावेदारी पर भरोसा नहीं जताया है। इसे लेकर महिलाओं में नाराजगी है। उन्होंने कहा कि आधी आबादी पर भरोसा न कर राजनीतिक दलों ने पुरुषों की बराबरी का दर्जा देने वाले सरकार के नारे को बेमानी सिद्ध कर दिया है।
निकाय चुनाव 29 अक्तूबर को कराया जाएगा। जनपद में एक नगर पालिका पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय) और तीन नगर पंचायत सैयदराजा, चंदौली और चकिया है। चुनावी जोर में आरक्षण के अनुरूप महिलाओं को सभासद चुनाव लड़ने के लिए तो टिकटें दी गईं लेकिन अध्यक्ष पद पर आधी आबादी पर किसी ने भी प्रत्याशी बनाने का रिस्क नहीं लिया। भाजपा, सपा और बसपा सहित अन्य दलों के टिकट पर लोग भाग्य आजमा रहे हैं। किंतु चारों निकायों में किसी भी बड़े दल ने महिलाओं को चेयरमैन पद के लिए टिकट नहीं दिया है। इससे चुनाव प्रचार जोर तो पकड़ रहा है किंतु महिलाओं में पैठ बनाने में नाकाम साबित हो रहा है। चतुर्भुजपुर निवासिनी नीला सिंह का कहना है कि चुनाव के पूर्व सभी दल आधी आबादी के हित की बात करते हैं और चुनाव के समय महिलाओं को दरकिनार करके पुरुष प्रधान समाज को वरीयता दे दी जा रही है। इससे महिलाएं चुनाव प्रचार में दिलचस्पी नहीं ले रही हैं। अलीनगर निवासिनी पूनम ने बताया कि आधी आबादी पर विश्वास न जताना कहीं न कहीं पुरुष प्रधान समाज में इस बात को सिद्ध करता है कि महिलाएं अभी भी रबर स्टांप की तरह प्रयोग की जा रही हैं। वहीं महिलाओं द्वारा चुनावी रण से किनारा कर लेने से प्रत्याशियों और उनके समर्थक काफी निराश भी हैं।
निकाय चुनाव 29 अक्तूबर को कराया जाएगा। जनपद में एक नगर पालिका पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय) और तीन नगर पंचायत सैयदराजा, चंदौली और चकिया है। चुनावी जोर में आरक्षण के अनुरूप महिलाओं को सभासद चुनाव लड़ने के लिए तो टिकटें दी गईं लेकिन अध्यक्ष पद पर आधी आबादी पर किसी ने भी प्रत्याशी बनाने का रिस्क नहीं लिया। भाजपा, सपा और बसपा सहित अन्य दलों के टिकट पर लोग भाग्य आजमा रहे हैं। किंतु चारों निकायों में किसी भी बड़े दल ने महिलाओं को चेयरमैन पद के लिए टिकट नहीं दिया है। इससे चुनाव प्रचार जोर तो पकड़ रहा है किंतु महिलाओं में पैठ बनाने में नाकाम साबित हो रहा है। चतुर्भुजपुर निवासिनी नीला सिंह का कहना है कि चुनाव के पूर्व सभी दल आधी आबादी के हित की बात करते हैं और चुनाव के समय महिलाओं को दरकिनार करके पुरुष प्रधान समाज को वरीयता दे दी जा रही है। इससे महिलाएं चुनाव प्रचार में दिलचस्पी नहीं ले रही हैं। अलीनगर निवासिनी पूनम ने बताया कि आधी आबादी पर विश्वास न जताना कहीं न कहीं पुरुष प्रधान समाज में इस बात को सिद्ध करता है कि महिलाएं अभी भी रबर स्टांप की तरह प्रयोग की जा रही हैं। वहीं महिलाओं द्वारा चुनावी रण से किनारा कर लेने से प्रत्याशियों और उनके समर्थक काफी निराश भी हैं।
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