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जिले के किसानों की गेंहू की 440 प्रजातियों की कर रहे खेती

Mon, 01 Mar 2021 12:52 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 01 Mar 2021 12:52 AM IST
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440 species of wheat are cultivated
चंदौली। जिले में गेंहू की खेती अब आधुनिकता की ओर अग्रसर होती दिख रही है। किसान एक नहीं बल्कि 440 प्रजातियों की खेती कर रहे है। बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के सहयोग से अनुसंधान के तौर पर शुरू हुआ यह अभियान व्यापक रूप ले चुका है। किसानों ने अनुसंधान के दौरान बेहतर निकली कई प्रजातियों की खेती का रकबा बढ़ा दिया है। जिंक व आयरन की मात्रा से भरपूर रोगरोधी प्रजातियों का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 45 से 50 क्विंटल तक है। संस्थान के ॎदेशक प्रोफेसर रमेश चंद्रा, प्रोफेसर विनोद कुमार मिश्रा व डा. संदीप शर्मा ने रविवार को सोता गांव के किसानों की फसल को देखा और सही ढंग से देखभाल का सुझाव दिया।
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निदेशक प्रोफेसर रमेशचंद्रा ने बताया कि गेहूं और जौ पर अनुसंधान करने वाली अमेरिका की संस्था सिमिट और बीएचयू के आपसी समन्वय से यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके पीछे उद्देश्य था कि जिंक और आयरन की मात्रा से भरपूर प्रजातियां विकसित की जाएं, ताकि महंगे फल और सब्जियां खरीदनें में असमर्थ गरीबों की रोटी सेहत से भरपूर हो। एक दशक पहले चंदौली के सोता गांव के किसान रामकृष्ण पाठक इस अभियान में सहभागी बने। उनके खेत में प्रयोग के तौर पर क्यारियों में प्रजातियां लगाई गई थीं। पहली दफा एक दर्जन प्रजातियां उगाई गई थीं। अब यह अभियान व्यापक रूप ले चुका है। इस साल यहां 440 रिसर्च प्रजातियां उगाई गई हैं। प्रोफेसर मिश्रा ने बताया कि रिसर्च प्रजातियों के बीज अमेरिका से ही आते हैं। इन्हें किसानों को उपलब्ध कराया जाता है। वहीं बीएचयू टीम की देखरेख में क्यारियों में इसकी बुआई कराई जाती है। इसके एक-एक दाने का विशेष महत्व है। फसल पकने के बाद अलग-अलग क्यारियों की मड़ाई कर पैकेट में पैक कर बीज बीएचयू मंगाया जाता है। इसके बाद इनमें मौजूद पौष्टिक तत्वों की जांच की जाती है। इन रोगरोधी प्रजातियों में 40 पीपीएम तक जिंक और आयरन की मात्रा मौजूद है।
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किसान की मेहनत रंग लाई
किसान रामकृष्ण पाठक ने बताया कि बीएचयू-35, 31 व बीएचयू 25 प्रजातियां काफी कारगर हैं। सामान्य प्रजातियों से इनकी बालियां लंबी होती हैं। वहीं उत्पादन भी अधिक है। ऐसे में इनकी व्यापक पैमाने पर खेती की जा रही है। उन्होंने करीब 15 एकड़ से अधिक भूमि में इन प्रजातियों की खेती की है। बताया कि जिले के सोता, मसोई, डुमरी, डोड़ापुर, खरीद, हथेड़ा, लटांव, अमरसीपुर गांव में खेती हो रही है।
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देरी से बोआई के बाद भी मिलेगा अधिक उत्पादन
किसान अभिषेक पांडेय, रामाज्ञा उपाध्याय, हौसिला सिंह ने बताया कि देर से बुआई में भी बीएचयू-35, 31 व 25 प्रजातियां बेहतर हैं। इससे उत्पादन पर कोई खास असर नहीं पड़ता है। इनमें अधिक पानी सोखने की भी क्षमता होती है। ऐसे में यदि रबी सीजन में मौसम खराब हुआ तो फसल बर्बाद होने का खतरा नहीं रहता।
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