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गूड फ्राइडे पर चर्च में हुई विशेष प्रार्थना
Updated Sat, 31 Mar 2018 01:27 AM IST
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मुगलसराय। प्रभु यीशु का बलिदान दिवस गुड फ्राइडे नगर सहित पूरे जिले में परपंरागत तरीके से मनाया गया। नगर के यूरोपियन कालोनी स्थित बाल यीशु कैथोलिक चर्च में विशेष प्रार्थना की गई और लोगों को उनके पापों से छुटकारा दिलाने की प्रार्थना की गई। इस दौरान यीशु के जीवन पर चर्चा हुई और प्रभु यीशु को विश्व मानवता का रक्षक बताया गया।
गुरुवार की शाम से ही नगर के यूरोपियन कालोनी स्थित बाल यीशु चर्च और घंटाघर चर्च में प्रार्थना शुरू हो गई थी। शुक्रवार की सुबह प्रार्थना सभा की शुरूआत हुई। नगर के आस पास के इलाकों से आए मसीही समुदाय के लोगों ने प्रार्थना की। इस मौके पर 12 बच्चों की विशेष पूजा की गई। बाद में बाल यीशु कैथोलिक चर्च के फादर विपिन सीजे ने अपने सहयोगी फादर के साथ लोगों को प्रभु यीशु के जनम और बलिदान की कथा सुनाई। बताया कि ईश्वर ने मनुष्य को पापों से छुटकारा दिलाने के लिए अपने सबसे प्यारे पुत्र यीशु को धरती पर भेजा। यहां उन्होंने लोगों को मानव से प्रेम करना सिखाया। यह सब जिन्हें पसंद नहीं आया तो यीशु को पकड़ कर यातनाएं दी और सूली पर लटकाया। यीशु ने लोगों के पाप को अपने सिर लेकर उसकी सजा भोगी और लोगों को पापों से छुटकारा दिलाया। तीन दिन बाद प्रभु यीशु एक बार फिर जीवित हो उठे और लोगों के साथ रहे। इस मौके पर ईस्टर का त्योहार मनाया जाता है। इसी तरह घंटाघर चर्च में दिन भर प्रार्थना सभाओं का दौर चलता रहा। लोगों ने चर्च में पहुंच कर प्रार्थना की। शनिवार की रात में विशेष प्रार्थना होगी और रविवार को ईस्टर मनाया जाएगा।
गुरुवार की शाम से ही नगर के यूरोपियन कालोनी स्थित बाल यीशु चर्च और घंटाघर चर्च में प्रार्थना शुरू हो गई थी। शुक्रवार की सुबह प्रार्थना सभा की शुरूआत हुई। नगर के आस पास के इलाकों से आए मसीही समुदाय के लोगों ने प्रार्थना की। इस मौके पर 12 बच्चों की विशेष पूजा की गई। बाद में बाल यीशु कैथोलिक चर्च के फादर विपिन सीजे ने अपने सहयोगी फादर के साथ लोगों को प्रभु यीशु के जनम और बलिदान की कथा सुनाई। बताया कि ईश्वर ने मनुष्य को पापों से छुटकारा दिलाने के लिए अपने सबसे प्यारे पुत्र यीशु को धरती पर भेजा। यहां उन्होंने लोगों को मानव से प्रेम करना सिखाया। यह सब जिन्हें पसंद नहीं आया तो यीशु को पकड़ कर यातनाएं दी और सूली पर लटकाया। यीशु ने लोगों के पाप को अपने सिर लेकर उसकी सजा भोगी और लोगों को पापों से छुटकारा दिलाया। तीन दिन बाद प्रभु यीशु एक बार फिर जीवित हो उठे और लोगों के साथ रहे। इस मौके पर ईस्टर का त्योहार मनाया जाता है। इसी तरह घंटाघर चर्च में दिन भर प्रार्थना सभाओं का दौर चलता रहा। लोगों ने चर्च में पहुंच कर प्रार्थना की। शनिवार की रात में विशेष प्रार्थना होगी और रविवार को ईस्टर मनाया जाएगा।
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