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पीएम आवास देने में हुई धांधली
Updated Thu, 21 Dec 2017 01:18 AM IST
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धानापुर। स्थानीय विकास खंड में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पात्रों को नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों की मानें तो सुविधा शुल्क के आधार पर ही गरीबों को आवास नहीं मिल रहा है। विकास खंड अंतर्गत खड़ान गांव के 12 से अधिक लोगों ने मामले की जांच कराने के लिए जिलाधिकारी को पत्र भेजा है।
पत्र के माध्यम से ग्रामीणों ने बताया कि गांव में आवास के लिये चयनित पात्रों में ऊपर रहे पात्रों को दरकिनार कर अपात्रों को लाभ दे दिया गया है। गांव के श्यामसुंदर बिंद, गर्जन बिंद, सुदामा बिंद, राजनारायण बिंद, पुल्लू बिंद, आदि ने आरोप लगाया कि उनके नाम प्रधानमंत्री आवास के लिए चयनित हुए थे। गांव की दीवारों पर हुई वाल पेंटिंग में दर्शाई गई सूची में नाम भी लिखा था, लेकिन उन लोगों के नाम लाभार्थियों की सूची से अलग कर दिया। आरोप लगाया कि एक वर्ष पहले प्रधान और तत्कालीन सेक्रेटरी ने उनसे पांच पांच हजार रुपये लेकर उनके नाम पीएम आवास योजना की पात्रता सूची में सम्मिलित किया था। आवास की स्वीकृति के बाद जैसे ही गांव की दीवारों पर चयनित लाभार्थियों की सूची का प्रकाशन हुआ, लेकिन बाद में 25- 25 हजार रुपये की मांग की जाने लगी। ऐसा नहीं करने पर उनके अलग अलग नाम पर स्वीकृत 11 आवासों को दूसरे अन्य के नाम स्वीकृत कर दिया गया, और प्रधानमंत्री आवास योजनांतर्गत चयनित पात्र लाभार्थियों की सूची से उन्हें तत्काल बाहर कर दिया गया। इसे गरीब परिवारों में नाराजगी है। चयनीत लाभार्थियों के अचानक सूची से बाहर कर दिए जाने पर विभागीय लोग भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। वहीं ग्राम प्रधान युगल किशोर गोंड़ ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से नकार दिया है। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी प्रभात कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास के लिए पात्रता के निर्धारण में किसी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रधान और सेक्रेटरी के ऊपर लगे आरोपों की जांच होगी। जो दोषी पाए जाएंगे, कार्रवाई की जाएगी।
पत्र के माध्यम से ग्रामीणों ने बताया कि गांव में आवास के लिये चयनित पात्रों में ऊपर रहे पात्रों को दरकिनार कर अपात्रों को लाभ दे दिया गया है। गांव के श्यामसुंदर बिंद, गर्जन बिंद, सुदामा बिंद, राजनारायण बिंद, पुल्लू बिंद, आदि ने आरोप लगाया कि उनके नाम प्रधानमंत्री आवास के लिए चयनित हुए थे। गांव की दीवारों पर हुई वाल पेंटिंग में दर्शाई गई सूची में नाम भी लिखा था, लेकिन उन लोगों के नाम लाभार्थियों की सूची से अलग कर दिया। आरोप लगाया कि एक वर्ष पहले प्रधान और तत्कालीन सेक्रेटरी ने उनसे पांच पांच हजार रुपये लेकर उनके नाम पीएम आवास योजना की पात्रता सूची में सम्मिलित किया था। आवास की स्वीकृति के बाद जैसे ही गांव की दीवारों पर चयनित लाभार्थियों की सूची का प्रकाशन हुआ, लेकिन बाद में 25- 25 हजार रुपये की मांग की जाने लगी। ऐसा नहीं करने पर उनके अलग अलग नाम पर स्वीकृत 11 आवासों को दूसरे अन्य के नाम स्वीकृत कर दिया गया, और प्रधानमंत्री आवास योजनांतर्गत चयनित पात्र लाभार्थियों की सूची से उन्हें तत्काल बाहर कर दिया गया। इसे गरीब परिवारों में नाराजगी है। चयनीत लाभार्थियों के अचानक सूची से बाहर कर दिए जाने पर विभागीय लोग भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। वहीं ग्राम प्रधान युगल किशोर गोंड़ ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से नकार दिया है। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी प्रभात कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास के लिए पात्रता के निर्धारण में किसी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रधान और सेक्रेटरी के ऊपर लगे आरोपों की जांच होगी। जो दोषी पाए जाएंगे, कार्रवाई की जाएगी।
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