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नवजात का जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं दिया 111
Updated Tue, 17 Oct 2017 12:55 AM IST
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चहनियां/ टांडाकला। चहनियां कस्बा स्थित एक निजी चिकित्सालय ने प्रसूता द्वारा पूरा भुगतान न किए जाने पर चिकित्सक ने दवा और बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र दिए बिना ही निकाल दिया। प्रसूता की मां ने इसके लिए आशा कार्यकर्ता प्रमिला निषाद को जिम्मेदार ठहराया है। कहा कि आशा कार्यकर्ता ने सरकारी चिकित्सालय में न ले जा कर निजी चिकित्सालय में भर्ती कराई। वहीं चिकित्सक द्वारा भी पहले से बताए गए खर्च के बाद अतिरिक्त धन की मांग की गई। बलुआ पुलिस ने इस मामले में अनभिज्ञता जाहिर की है। कहा कि अगर तहरीर दी जाती है तो कार्यवाई की जाएगी। वहीं आशा कार्यकर्ता प्रमिला निषाद ने बताया कि प्रसूता को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चहनियां में भर्ती कराया गया था। जहां डिलेवरी में समय होने कारण प्रसूता अपनी मां के साथ घर चली गई। बाद में तेज पेटदर्द होने के कारण मां विद्या देवी बिना कोई सूचना दिए खुद निजी चिकित्सालय ले गईं। जब निजी चिकित्सक द्वारा पैसे की मांग की जा रही है तो मेरे ऊपर दोषारोपण कर रही हैं।
पूरा गनेश गांव की विद्या देवी ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व वह अपनी पुत्री शकुंतला को प्रसव कराने के लिए गांव की आशा कर्ता के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराई। जहां प्रसूता को अधिक दर्द होने पर आशा कार्यकर्ता ने जिला अस्पताल ले जाने के बजाय कस्बा स्थित एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराई। कुछ समय पश्चात अस्पताल संचालक प्रसूता को आपरेशन के लिए वाराणसी ले गया और आपरेशन से बच्चा पैदा होने पर जच्चा और बच्चा को चौबीस घंटे बाद अपने चिकित्सालय ले आया और उपचार करने लगा। सोमवार को छुट्टी देने के लिए संचालक द्वारा पैसे की मांग की गई प्रसूता की मां विद्या देवी ने बताया उसने चिकित्सक को तीन किस्तों में 12 हजार रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन चिकित्सक ने छह हजार रुपये की अतिरिक्त मांग की। चिकित्सक के अत्यधिक दबाव देने पर उसने अपने स्वर्ण कर्णफूल को बेचकर चार हजार रुपये चिकित्सक को दिया तो चिकित्सक ने बिना दवा और जन्म प्रमाण पत्र दिए जच्चा और बच्चा को अस्पताल से बाहर निकाल दिया।
भुगतान ने किए जाने पर चिकित्सक ने बिना दवा के प्रसूता को निकाला बाहर
नवजात का जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं दिया
प्रसूता की मां ने आशा कार्यकर्त्री को ठहराया जिम्मेदार
सचित्र- 11
अमर उजाला ब्यूरो
चहनियां/ टांडाकला। चहनियां कस्बा स्थित एक निजी चिकित्सालय ने प्रसूता द्वारा पूरा भुगतान न किए जाने पर चिकित्सक ने दवा और बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र दिए बिना ही निकाल दिया। प्रसूता की मां ने इसके लिए आशा कार्यकर्ता प्रमिला निषाद को जिम्मेदार ठहराया है। कहा कि आशा कार्यकर्ता ने सरकारी चिकित्सालय में न ले जा कर निजी चिकित्सालय में भर्ती कराई। वहीं चिकित्सक द्वारा भी पहले से बताए गए खर्च के बाद अतिरिक्त धन की मांग की गई। बलुआ पुलिस ने इस मामले में अनभिज्ञता जाहिर की है। कहा कि अगर तहरीर दी जाती है तो कार्यवाई की जाएगी। वहीं आशा कार्यकर्ता प्रमिला निषाद ने बताया कि प्रसूता को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चहनियां में भर्ती कराया गया था। जहां डिलेवरी में समय होने कारण प्रसूता अपनी मां के साथ घर चली गई। बाद में तेज पेटदर्द होने के कारण मां विद्या देवी बिना कोई सूचना दिए खुद निजी चिकित्सालय ले गईं। जब निजी चिकित्सक द्वारा पैसे की मांग की जा रही है तो मेरे ऊपर दोषारोपण कर रही हैं।
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कस्बा स्थित एक निजी चिकित्सालय में एक सप्ताह पूर्व पूरा गनेश गांव की विद्या देवी ने अपनी पुत्री शकुंतला को प्रसव कराने के लिए गांव की आशा कर्ता के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराया। जहां प्रसूता को अधिक दर्द होने पर आशा कार्यकर्ता ने जिला अस्पताल ले जाने के बजाय कस्बा स्थित एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया। कुछ समय पश्चात अस्पताल संचालक प्रसूता को आपरेशन के लिए वाराणसी ले गया और आपरेशन से बच्चा पैदा होने पर जच्चा और बच्चा को चौबीस घंटे बाद अपने चिकित्सालय ले आया और उपचार करने लगा। सोमवार को प्रसूता को छुट्टी देने के लिए संचालक द्वारा पैसे की मांग की गई तथा मां और बेटी को कमरे से बाहर कर दिया। प्रसूता की मां विद्या देवी ने बताया उसने चिकित्सक को तीन किस्तों में 12 हजार रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन चिकित्सक ने छह हजार रुपये की अतिरिक्त मांग की। बताया कि चिकित्सक पैसे न देने की स्थिति में प्रसूता को अस्पताल में रखने की धमकी देने लगा। चिकित्सक के अत्यधिक दबाव देने पर उसने अपने स्वर्ण कर्णफूल को बेचकर चार हजार रुपये चिकित्सक को दिया तो चिकित्सक ने बिना दवा और जन्म प्रमाण पत्र दिए जच्चा और बच्चा को अस्पताल से बाहर निकाल दिया। विद्या देवी ने बताया कि आपरेशन के पूर्व चिकित्सक द्वारा दवा और अन्य खर्च के बारे में नहीं बताया गया था।
अजातशत्रु चौबे
पूरा गनेश गांव की विद्या देवी ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व वह अपनी पुत्री शकुंतला को प्रसव कराने के लिए गांव की आशा कर्ता के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराई। जहां प्रसूता को अधिक दर्द होने पर आशा कार्यकर्ता ने जिला अस्पताल ले जाने के बजाय कस्बा स्थित एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराई। कुछ समय पश्चात अस्पताल संचालक प्रसूता को आपरेशन के लिए वाराणसी ले गया और आपरेशन से बच्चा पैदा होने पर जच्चा और बच्चा को चौबीस घंटे बाद अपने चिकित्सालय ले आया और उपचार करने लगा। सोमवार को छुट्टी देने के लिए संचालक द्वारा पैसे की मांग की गई प्रसूता की मां विद्या देवी ने बताया उसने चिकित्सक को तीन किस्तों में 12 हजार रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन चिकित्सक ने छह हजार रुपये की अतिरिक्त मांग की। चिकित्सक के अत्यधिक दबाव देने पर उसने अपने स्वर्ण कर्णफूल को बेचकर चार हजार रुपये चिकित्सक को दिया तो चिकित्सक ने बिना दवा और जन्म प्रमाण पत्र दिए जच्चा और बच्चा को अस्पताल से बाहर निकाल दिया।
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भुगतान ने किए जाने पर चिकित्सक ने बिना दवा के प्रसूता को निकाला बाहर
नवजात का जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं दिया
प्रसूता की मां ने आशा कार्यकर्त्री को ठहराया जिम्मेदार
सचित्र- 11
अमर उजाला ब्यूरो
चहनियां/ टांडाकला। चहनियां कस्बा स्थित एक निजी चिकित्सालय ने प्रसूता द्वारा पूरा भुगतान न किए जाने पर चिकित्सक ने दवा और बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र दिए बिना ही निकाल दिया। प्रसूता की मां ने इसके लिए आशा कार्यकर्ता प्रमिला निषाद को जिम्मेदार ठहराया है। कहा कि आशा कार्यकर्ता ने सरकारी चिकित्सालय में न ले जा कर निजी चिकित्सालय में भर्ती कराई। वहीं चिकित्सक द्वारा भी पहले से बताए गए खर्च के बाद अतिरिक्त धन की मांग की गई। बलुआ पुलिस ने इस मामले में अनभिज्ञता जाहिर की है। कहा कि अगर तहरीर दी जाती है तो कार्यवाई की जाएगी। वहीं आशा कार्यकर्ता प्रमिला निषाद ने बताया कि प्रसूता को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चहनियां में भर्ती कराया गया था। जहां डिलेवरी में समय होने कारण प्रसूता अपनी मां के साथ घर चली गई। बाद में तेज पेटदर्द होने के कारण मां विद्या देवी बिना कोई सूचना दिए खुद निजी चिकित्सालय ले गईं। जब निजी चिकित्सक द्वारा पैसे की मांग की जा रही है तो मेरे ऊपर दोषारोपण कर रही हैं।
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कस्बा स्थित एक निजी चिकित्सालय में एक सप्ताह पूर्व पूरा गनेश गांव की विद्या देवी ने अपनी पुत्री शकुंतला को प्रसव कराने के लिए गांव की आशा कर्ता के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराया। जहां प्रसूता को अधिक दर्द होने पर आशा कार्यकर्ता ने जिला अस्पताल ले जाने के बजाय कस्बा स्थित एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया। कुछ समय पश्चात अस्पताल संचालक प्रसूता को आपरेशन के लिए वाराणसी ले गया और आपरेशन से बच्चा पैदा होने पर जच्चा और बच्चा को चौबीस घंटे बाद अपने चिकित्सालय ले आया और उपचार करने लगा। सोमवार को प्रसूता को छुट्टी देने के लिए संचालक द्वारा पैसे की मांग की गई तथा मां और बेटी को कमरे से बाहर कर दिया। प्रसूता की मां विद्या देवी ने बताया उसने चिकित्सक को तीन किस्तों में 12 हजार रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन चिकित्सक ने छह हजार रुपये की अतिरिक्त मांग की। बताया कि चिकित्सक पैसे न देने की स्थिति में प्रसूता को अस्पताल में रखने की धमकी देने लगा। चिकित्सक के अत्यधिक दबाव देने पर उसने अपने स्वर्ण कर्णफूल को बेचकर चार हजार रुपये चिकित्सक को दिया तो चिकित्सक ने बिना दवा और जन्म प्रमाण पत्र दिए जच्चा और बच्चा को अस्पताल से बाहर निकाल दिया। विद्या देवी ने बताया कि आपरेशन के पूर्व चिकित्सक द्वारा दवा और अन्य खर्च के बारे में नहीं बताया गया था।
अजातशत्रु चौबे