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तीनों गुर्गों पर मुकदमे दर्ज, जिला पुलिस को खबर ही नहीं

Fri, 13 Apr 2018 11:28 PM IST
Updated Fri, 13 Apr 2018 11:28 PM IST
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तीनों गुर्गों पर दर्ज हैं आपराधिक
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मुकदमे, जिला पुलिस अनजान
- 1992 में पहली बार जिला जेल गया था मुख्य आरोपी सलीम, फिर 1994 में गया जेल
- इसके बाद मुंबई में चार साल आर्थर जेल में रहा, लेकिन जिला पुलिस को नहीं है जानकारी
- आरिफ दस वर्ष पूर्व गया था जेल और अबरार 28 दिन पहले जेल से था छूटा
आशीष शुक्ला
बुलंदशहर। जनपद पुलिस का एक ढुलमुल रवैया एक बार फिर सामने आया है। नगर कोतवाली क्षेत्र से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के द्वारा पकड़े गए दाऊद के तीन शातिर गुर्गों की क्राइम हिस्ट्री जिला पुलिस के पास नहीं है। जबकि, सलीम सहित तीनों आरोपी जिला कारागार की सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। अबरार 28 दिन पहले ही जमानत पर जेल से बाहर आया है। सूत्रों की मानें तो दाऊद अब पश्चिमांचल के हिस्ट्रीशीटरों पर दांव लगा रहा है।
बता दें कि बृहस्पतिवार दोपहर बाद दिल्ली की स्पेशल पुलिस फोर्स ने दाऊद गैंग से जुड़े तीन गुर्गों को नगर के शांतिनगर भूड़ स्थित घर से दबोचा था। शुक्रवार दोपहर को दिल्ली पुलिस ने प्रेस कांफ्रेंस कर मामले का खुलासा कर दिया। जिसमें बताया गया कि यूपी वक्फ बोर्ड के चैयरमैन की हत्या की साजिश बुलंदशहर में बैठे गुर्गे रच रहे थे। तीनों का सरताज सलीम था और सलीम सऊदी अरब में दाऊद गैंग के छोटा शकील से जुड़े एक एसोसिएट से लगातार संपर्क में था। वहीं अब जिला पुलिस को इसकी भनक तक नहीं थी। हद तो तब हुई जब जिला पुलिस से तीनों आरोपियों की क्राइम हिस्ट्री के बारे में जानने की कोशिश की गई। जिला पुलिस का कहना है कि तीनों आरोपियों की जनपद में कोई क्राइम हिस्ट्री नहीं है, जबकि गैंग का सरगना सलीम 1992 में पहली बार चेन स्नेचिंग के एक मामले में जेल जा चुका है, इस दौरान वह 20 दिन तक जेल में रहा। इसके बाद 1994 में वह चेन स्नेचिंग और लूट के एक मामले में जेल गया। तब वह करीब ढाई माह तक जेल में रहा। सलीम का आपराधिक इतिहास यहीं नहीं थमता है। सलीम वर्ष 1998 के आस-पास मुंबई की आर्थर जेल में करीब चार साल तक कैद रहा था। दूसरी ओर आरोपी आरिफ हत्या की कोशिश के एक मामले में करीब दस वर्ष पूर्व जिला कारागार की सलाखों में बीता चुका है। जबकि, तीसरा आरोपी अबरार 28 दिन पूर्व यानि 15 मार्च 2018 को ही सिकंदराबाद में हुए एक हत्या के प्रयास मामले में जेल से जमानत पर रिहा हुआ है। जिला पुलिस को आरोपियों का यह इतिहास खंगालना भी गंवारा गुजरा। जबकि, दिल्ली पुलिस ने पूरा कच्चा चिट्ठा खोल यूपी पुलिस को करारा जवाब दिया है।
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अबरार के परिजनों को थी चारों की दोस्ती की जानकारी
अबरार के परिजनों की मानें तो सलीम को वह काफी समय से जानते हैं। बीते चार-पांच दिन पूर्व ही सलीम और आरिफ अबरार के घर के नजदीक आए थे और काफी देर तक गली के कोने पर खड़े होकर अबरार के साथ बातचीत की थी।
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अबरार के आधार कार्ड में होना था परिवर्तन
परिजनों ने बताया कि अबरार जेल से छूटने के बाद ओला कैब चलाने के लिए दिल्ली जाने वाला था। इसके लिए उसे अपने आधार कार्ड में कुछ परिवर्तन कराना था।

कोट..
तीनों आरोपियों का आपराधिक इतिहास खंगाला गया, लेकिन जिला पुलिस के पास उनका कोई आपराधिक इतिहास मौजूद नहीं है। - मुनीराज जी, एसएसपी
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