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महिलाओं के जख्मों पर ‘नमक’ छिड़क रही खाकी
Updated Mon, 17 Jul 2017 11:07 PM IST
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महिलाओं के जख्मों पर ‘नमक’ छिड़क रही खाकी
नारी सुरक्षा और सम्मान की बात करने वाली पुलिस के दावे सिर्फ बयानबाजी तक सीमित हैं। महिला संबंधी अपराधों पर त्वरित और दमदार कार्रवाई की बात कही जा रही है। हालात यह हैं कि छेड़छाड़ और रेप के मामलों में पीड़िताओं को लगातार अपमानित होना पड़ता है।
पुलिस में जहां दर-दर की ठोकर खानी पड़ती हैं, तो वहीं समाज में हेय भावना का शिकार होना पड़ता है। अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान इनको अपमानित किया जाता है। केवल इतना ही नहीं, आरोपियों से मिलकर गैंगरेप की शिकार किशोरियों को भी डाक्टरी जांच में झूठी करार देने का खेल चल रहा है।
ऐसे में कई मामलों की शिकार पीड़िताएं परिजनों और पुलिस में शुरूआत में शिकायत ही नहीं करती हैं। इससे अपराधियों का हौसला और बढ़ता जाता है। पुलिस महिलाओं के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय कार्रवाई न करके उन पर ‘नमक’ छिड़कने का काम करती है। न्यायालय की चौखट से पहले ही पीड़िता की न्याय की उम्मीद पुलिस तोड़ देती है।
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केस-1
हाइवे गैंगरेप पीड़िताओं से महिला चिकित्सक ने की थी बदसलूकी
29 जुलाई 2016 को कोतवाली देहात क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर मां-बेटी से हुए गैंगरेप के बाद जब पीड़िताओं को पुलिस मेडिकल कराने के लिए महिला अस्पताल लेकर पहुंची तो महिला चिकित्सक ने मजाक उड़ाते हुए कहा था कि रोजाना रेप के झूठे मामले आ रहे हैं।
इसके बाद महिला आयोग की सदस्या ने भी जांच की थी। स्वास्थ्य अफसरों ने भी संज्ञान लेते हुए महिला चिकित्सक के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की थी।
केस - 2
जहांगीराबाद क्षेत्र के एक गांव में चार महीने पहले किशोरी के साथ सामूहिक रेप की कोशिश की गई। विरोध करने पर दबंगों ने उसके भाई की अंगुली काट दीं और घर व बाइक फूंक दी थीं।
केवल इतना ही नहीं पुलिस ने आरोपी पक्ष की तरफ से रिपोर्ट दर्ज करने में देर नहीं लगाई। जबकि पीड़ित पक्ष को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए एसएसपी का दरवाजा खटखटाना पड़ा। तब जाकर पुलिस ने चार दिन बाद रिपोर्ट दर्ज की।
केस-3
वर्ष 2012 में खुर्जा कोतवाली क्षेत्र के मदनपुर के जंगल में एक किशोरी से आठ लड़कों ने गैंगरेप किया था। दरिंदों ने इसकी वीडियो भी बना ली थी। मामला जब पुलिस के सामने आया तो शुरुआत में इसे फर्जी बताया गया।
आरोपियों से मिलकर मेडिकल में भी रेप की पुष्टी नहीं की गई। इसके बाद पुलिस ने रिपोर्ट को स्पंज कर दिया था। इसके एक सप्ताह बाद वारदात की वीडियो वायरल हो गई। जब पुलिस के पास वीडियो आई तब जाकर कार्रवाई की और आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
केस-4
फरवरी 2017 में नगर कोतवाली क्षेत्र से एक किशोरी को युवक बहला-फुसलाकर ले जाया गया था। आगरा में आरोपी ने उसके साथ रेप किया। पीड़िता ने जब तहरीर दी तो पुलिस ने एक सभासद के माध्यम से 50 हजार रुपये में फैसला करा दिया। मामला जब मीडिया में उछला तब जाकर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की और आरोपी को जेल भेजा।
केस-5
जनवरी 2017 में नरसेना थाना क्षेत्र में एक युवती से रेप मामला सामने आया। पुलिस ने कार्रवाई तो दूर एफआईआर तक दर्ज नहीं की। मामला जब कप्तान के समक्ष आया तो पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की। इसके बाद मेडिकल कराने और कोर्ट में बयान दर्ज कराने के लिए पीड़िता को चक्कर काटने पड़े।
केस - 6
खुर्जा देहात क्षेत्र में खेत पर शौच के लिए गई एक महिला से दुष्कर्म की कोशिश का मामला सामने आया है। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई करने के बजाय टरका दिया। पीड़िता ने एसएसपी को तहरीर दी है। पीड़िता ने एसएसपी को बताया कि 14 जुलाई की सुबह वह काली नदी किनारे शौच को गई थी। तभी गांव का एक युवक वहां आ धमका।
आरोपी ने अश्लील हरकत करते हुए दुष्कर्म की कोशिश की। गांव के लोगों को देखकर आरोपी भाग गया। परिजनों ने जब आरोपी के घर शिकायत की तो आरोपियों ने घर में घुसकर मारपीट की। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उन्हें थाने से टरका दिया। एसएसपी मुनिराज जी. ने पीड़िता को जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
महिला संबंधी अपराध रेप व छेड़छाड़ में पुलिस जांच के बाद रिपोर्ट दर्ज करती है। सही पाए जाने पर कार्रवाई करती है। थाना स्तर से संतुष्ट न होने पर पीड़ित मुझसे मिल सकते हैं। यदि किसी विवेचक ने दोषी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
मुनिराज जी.-एसएसपी
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नारी सुरक्षा और सम्मान की बात करने वाली पुलिस के दावे सिर्फ बयानबाजी तक सीमित हैं। महिला संबंधी अपराधों पर त्वरित और दमदार कार्रवाई की बात कही जा रही है। हालात यह हैं कि छेड़छाड़ और रेप के मामलों में पीड़िताओं को लगातार अपमानित होना पड़ता है।
पुलिस में जहां दर-दर की ठोकर खानी पड़ती हैं, तो वहीं समाज में हेय भावना का शिकार होना पड़ता है। अस्पताल में चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान इनको अपमानित किया जाता है। केवल इतना ही नहीं, आरोपियों से मिलकर गैंगरेप की शिकार किशोरियों को भी डाक्टरी जांच में झूठी करार देने का खेल चल रहा है।
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ऐसे में कई मामलों की शिकार पीड़िताएं परिजनों और पुलिस में शुरूआत में शिकायत ही नहीं करती हैं। इससे अपराधियों का हौसला और बढ़ता जाता है। पुलिस महिलाओं के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय कार्रवाई न करके उन पर ‘नमक’ छिड़कने का काम करती है। न्यायालय की चौखट से पहले ही पीड़िता की न्याय की उम्मीद पुलिस तोड़ देती है।
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केस-1
हाइवे गैंगरेप पीड़िताओं से महिला चिकित्सक ने की थी बदसलूकी
29 जुलाई 2016 को कोतवाली देहात क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर मां-बेटी से हुए गैंगरेप के बाद जब पीड़िताओं को पुलिस मेडिकल कराने के लिए महिला अस्पताल लेकर पहुंची तो महिला चिकित्सक ने मजाक उड़ाते हुए कहा था कि रोजाना रेप के झूठे मामले आ रहे हैं।
इसके बाद महिला आयोग की सदस्या ने भी जांच की थी। स्वास्थ्य अफसरों ने भी संज्ञान लेते हुए महिला चिकित्सक के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की थी।
केस - 2
जहांगीराबाद क्षेत्र के एक गांव में चार महीने पहले किशोरी के साथ सामूहिक रेप की कोशिश की गई। विरोध करने पर दबंगों ने उसके भाई की अंगुली काट दीं और घर व बाइक फूंक दी थीं।
केवल इतना ही नहीं पुलिस ने आरोपी पक्ष की तरफ से रिपोर्ट दर्ज करने में देर नहीं लगाई। जबकि पीड़ित पक्ष को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए एसएसपी का दरवाजा खटखटाना पड़ा। तब जाकर पुलिस ने चार दिन बाद रिपोर्ट दर्ज की।
केस-3
वर्ष 2012 में खुर्जा कोतवाली क्षेत्र के मदनपुर के जंगल में एक किशोरी से आठ लड़कों ने गैंगरेप किया था। दरिंदों ने इसकी वीडियो भी बना ली थी। मामला जब पुलिस के सामने आया तो शुरुआत में इसे फर्जी बताया गया।
आरोपियों से मिलकर मेडिकल में भी रेप की पुष्टी नहीं की गई। इसके बाद पुलिस ने रिपोर्ट को स्पंज कर दिया था। इसके एक सप्ताह बाद वारदात की वीडियो वायरल हो गई। जब पुलिस के पास वीडियो आई तब जाकर कार्रवाई की और आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
केस-4
फरवरी 2017 में नगर कोतवाली क्षेत्र से एक किशोरी को युवक बहला-फुसलाकर ले जाया गया था। आगरा में आरोपी ने उसके साथ रेप किया। पीड़िता ने जब तहरीर दी तो पुलिस ने एक सभासद के माध्यम से 50 हजार रुपये में फैसला करा दिया। मामला जब मीडिया में उछला तब जाकर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की और आरोपी को जेल भेजा।
केस-5
जनवरी 2017 में नरसेना थाना क्षेत्र में एक युवती से रेप मामला सामने आया। पुलिस ने कार्रवाई तो दूर एफआईआर तक दर्ज नहीं की। मामला जब कप्तान के समक्ष आया तो पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की। इसके बाद मेडिकल कराने और कोर्ट में बयान दर्ज कराने के लिए पीड़िता को चक्कर काटने पड़े।
केस - 6
खुर्जा देहात क्षेत्र में खेत पर शौच के लिए गई एक महिला से दुष्कर्म की कोशिश का मामला सामने आया है। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई करने के बजाय टरका दिया। पीड़िता ने एसएसपी को तहरीर दी है। पीड़िता ने एसएसपी को बताया कि 14 जुलाई की सुबह वह काली नदी किनारे शौच को गई थी। तभी गांव का एक युवक वहां आ धमका।
आरोपी ने अश्लील हरकत करते हुए दुष्कर्म की कोशिश की। गांव के लोगों को देखकर आरोपी भाग गया। परिजनों ने जब आरोपी के घर शिकायत की तो आरोपियों ने घर में घुसकर मारपीट की। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उन्हें थाने से टरका दिया। एसएसपी मुनिराज जी. ने पीड़िता को जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
महिला संबंधी अपराध रेप व छेड़छाड़ में पुलिस जांच के बाद रिपोर्ट दर्ज करती है। सही पाए जाने पर कार्रवाई करती है। थाना स्तर से संतुष्ट न होने पर पीड़ित मुझसे मिल सकते हैं। यदि किसी विवेचक ने दोषी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
मुनिराज जी.-एसएसपी