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Budaun News: झोलाछाप के इलाज से 80 दिन में दस मरीजों ने गंवाई जान, कार्रवाई शून्य
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उघैती क्षेत्र में संचालित झोलाछाप की दुकान। संवाद
बदायूं। झोलाछाप के इलाज में साल 2024 के 80 दिन में दस लोगों की मौत हो चुकी है। अगर इसे ही औसत माना जाए तो आठ दिन में एक मौत हो रही है पर कार्रवाई शून्य है। सिर्फ एक मामले में एफआईआर हुई। छह मामले रफादफा कर दिए गए। सातवां अब खत्म किया जा रहा है।
भारतीय न्याय संहिता जुलाई में लागू हुई, जिसमें अपंजीकृत (झोलाछाप) चिकित्सक की लापरवाही से जान जाने पर पांच साल की सजा का प्रावधान है। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य महानिदेशक अतुल गोयल ने राज्य के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में भी साफ कहा था कि अपंजीकृत चिकित्सक या झोलाछाप के गलत इलाज से मौत होने पर आईपीसी की धारा 304 के तहत रिपोर्ट दर्ज होगी। पहले इसमें दो साल की सजा थी, जो अब बढ़ाकर पांच साल कर दी गई है। बावजूद इसके जिले में सीएमओ आदेश का पालन तक नहीं करा पा रहे।
जनवरी 2024 से 8 मई तक सात लोगों की मौत के लिए परिजन ने झोलाछाप को जिम्मेदार ठहराया था, लेकिन मामलों में कार्रवाई नहीं हो सकी। एक मामले में परिजन अड़े तो उघैती पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की है। इसी लापरवाही से गली-गली में झोलाछाप बैठे हुए हैं।
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2024 में झोलाछाप का इलाज इनके लिए हुआ जानलेवा साबित
18 फरवरी : गांव मामूरगंज निवासी देवेंद्र ने पत्नी विमला को प्रसव के लिए कादरचौक में झोलाछाप के क्लीनिक में भर्ती कराया था। इलाज में लापरवाही से जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। मामला रफादफा हो चुका है।
23 फरवरी : कादरचौक थाना क्षेत्र के गांव गंगी नगला में झोलाछाप के इलाज से दो बहनों की हालत बिगड़ गई। इसमें एक आठ वर्षीय सोनम की उपचार के दौरान राजकीय मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने किसी तरह की कार्रवाई करना उचित नहीं समझा।
20 मार्च : सहसवान कोतवाली क्षेत्र के गांव भमोरी निवासी पुष्पेंद्र ने पत्नी नीतू को प्रसव पीड़ा होने पर इस्लामनगर रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। शाम सात बजे नीतू ने बेटी को जन्म दिया। झोलाछाप के गलत इंजेक्शन से जच्चा- बच्चा दोनों की मौत हो गई। कोई कार्रवाई नहीं हुई।
07 अप्रैल : दातागंज कोतवाली क्षेत्र के गांव दियोरी निवासी अनमोल (12) पुत्र अशोक शर्मा की झोलाछाप के यहां मौत हो हुई। कोई कार्रवाई नहीं हुई।
07 अप्रैल : उघैती थाना क्षेत्र के गांव घंसोली निवासी प्रेमवती (55) पत्नी रामप्रकाश की गलत इलाज से मौत हो गई। राम प्रकाश ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। गिरफ्तारी नहीं हुई है। डॉक्टर और पीड़ित ने पुलिस को फैसला लिखकर दे दिया। अब पुलिस एफआर लगाने तैयारी कर रही है।
06 मई : कस्बा आसफपुर निवासी सुनील पुत्र रमेश चंद्र ने अपनी पत्नी खुशबू को प्रसव पीड़ा होने पर दूंदपुर स्थित एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया। यहां मौजूद डॉक्टर ने सामान्य प्रसव होने की बात कहकर भर्ती कर लिया। प्रसव के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से नवजात की मौत हो गई। इस मामले में केवल नोटिस की कार्रवाई।
07 मई : वजीरगंज थाना क्षेत्र के गांव जाहरपुर निवासी सुल्तान सिंह की 32 वर्षीय पत्नी रीना उर्फ गुड्डो को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उसे प्रसव के लिए वजीरगंज आंवला रोड पर झोलाछाप के यहां ले गए। जहां प्रसव के दौरान जच्चा बच्चा की मौत हो गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। मामला रफा-दफा कर दिया गया।
नोटिस देकर 40 मामले बीते साल किए गए रफादफा
पिछले साल 40 झोलाछाप ऐसे थे जिनके इलाज से जच्चा-बच्चा की मौत हुई थी। विभाग ने नोटिस दिया। किसी भी झोलाछाप ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। सीएमओ ने एफआईआर कराने के निर्देश भी दिए, लेकिन विभाग के ही नोडल अधिकारी ने मामलों में कार्रवाई नहीं की। तत्कालीन सीएमओ खामोश पड़ गए। मौजूदा सीएमओ ने भी इस पर गौर नहीं किया।
एक रिटायर्ड प्रभारी चिकित्साधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्वास्थ्य विभाग में हर क्षेत्र में झोलाछापों पर कार्रवाई के लिए नोडल अधिकारी होते हैं। उसके बाद सीएचसी प्रभारी काे अधिकार होता है कि अपने क्षेत्र में झोलाछाप पर कभी भी रिपोर्ट दर्ज करा सकता है। झोलाछाप, सीएचसी प्रभारी और नोडल की मिलीभगत से ही क्लीनिक का संचालन कर रहे हैं।
जिस किसी नोडल अधिकारी के क्षेत्र में झोलाछाप इलाज करता पाया गया तो नोडल पर कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा। जब तक कार्रवाई नहीं होगीस, तब तक इस मकड़जाल से छुटकारा नहीं मिल सकेगा। - डॉ. अब्दुल सलाम, सीएमओ
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भारतीय न्याय संहिता जुलाई में लागू हुई, जिसमें अपंजीकृत (झोलाछाप) चिकित्सक की लापरवाही से जान जाने पर पांच साल की सजा का प्रावधान है। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य महानिदेशक अतुल गोयल ने राज्य के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में भी साफ कहा था कि अपंजीकृत चिकित्सक या झोलाछाप के गलत इलाज से मौत होने पर आईपीसी की धारा 304 के तहत रिपोर्ट दर्ज होगी। पहले इसमें दो साल की सजा थी, जो अब बढ़ाकर पांच साल कर दी गई है। बावजूद इसके जिले में सीएमओ आदेश का पालन तक नहीं करा पा रहे।
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जनवरी 2024 से 8 मई तक सात लोगों की मौत के लिए परिजन ने झोलाछाप को जिम्मेदार ठहराया था, लेकिन मामलों में कार्रवाई नहीं हो सकी। एक मामले में परिजन अड़े तो उघैती पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की है। इसी लापरवाही से गली-गली में झोलाछाप बैठे हुए हैं।
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2024 में झोलाछाप का इलाज इनके लिए हुआ जानलेवा साबित
18 फरवरी : गांव मामूरगंज निवासी देवेंद्र ने पत्नी विमला को प्रसव के लिए कादरचौक में झोलाछाप के क्लीनिक में भर्ती कराया था। इलाज में लापरवाही से जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। मामला रफादफा हो चुका है।
23 फरवरी : कादरचौक थाना क्षेत्र के गांव गंगी नगला में झोलाछाप के इलाज से दो बहनों की हालत बिगड़ गई। इसमें एक आठ वर्षीय सोनम की उपचार के दौरान राजकीय मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने किसी तरह की कार्रवाई करना उचित नहीं समझा।
20 मार्च : सहसवान कोतवाली क्षेत्र के गांव भमोरी निवासी पुष्पेंद्र ने पत्नी नीतू को प्रसव पीड़ा होने पर इस्लामनगर रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। शाम सात बजे नीतू ने बेटी को जन्म दिया। झोलाछाप के गलत इंजेक्शन से जच्चा- बच्चा दोनों की मौत हो गई। कोई कार्रवाई नहीं हुई।
07 अप्रैल : दातागंज कोतवाली क्षेत्र के गांव दियोरी निवासी अनमोल (12) पुत्र अशोक शर्मा की झोलाछाप के यहां मौत हो हुई। कोई कार्रवाई नहीं हुई।
07 अप्रैल : उघैती थाना क्षेत्र के गांव घंसोली निवासी प्रेमवती (55) पत्नी रामप्रकाश की गलत इलाज से मौत हो गई। राम प्रकाश ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। गिरफ्तारी नहीं हुई है। डॉक्टर और पीड़ित ने पुलिस को फैसला लिखकर दे दिया। अब पुलिस एफआर लगाने तैयारी कर रही है।
06 मई : कस्बा आसफपुर निवासी सुनील पुत्र रमेश चंद्र ने अपनी पत्नी खुशबू को प्रसव पीड़ा होने पर दूंदपुर स्थित एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया। यहां मौजूद डॉक्टर ने सामान्य प्रसव होने की बात कहकर भर्ती कर लिया। प्रसव के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से नवजात की मौत हो गई। इस मामले में केवल नोटिस की कार्रवाई।
07 मई : वजीरगंज थाना क्षेत्र के गांव जाहरपुर निवासी सुल्तान सिंह की 32 वर्षीय पत्नी रीना उर्फ गुड्डो को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उसे प्रसव के लिए वजीरगंज आंवला रोड पर झोलाछाप के यहां ले गए। जहां प्रसव के दौरान जच्चा बच्चा की मौत हो गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। मामला रफा-दफा कर दिया गया।
नोटिस देकर 40 मामले बीते साल किए गए रफादफा
पिछले साल 40 झोलाछाप ऐसे थे जिनके इलाज से जच्चा-बच्चा की मौत हुई थी। विभाग ने नोटिस दिया। किसी भी झोलाछाप ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। सीएमओ ने एफआईआर कराने के निर्देश भी दिए, लेकिन विभाग के ही नोडल अधिकारी ने मामलों में कार्रवाई नहीं की। तत्कालीन सीएमओ खामोश पड़ गए। मौजूदा सीएमओ ने भी इस पर गौर नहीं किया।
एक रिटायर्ड प्रभारी चिकित्साधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्वास्थ्य विभाग में हर क्षेत्र में झोलाछापों पर कार्रवाई के लिए नोडल अधिकारी होते हैं। उसके बाद सीएचसी प्रभारी काे अधिकार होता है कि अपने क्षेत्र में झोलाछाप पर कभी भी रिपोर्ट दर्ज करा सकता है। झोलाछाप, सीएचसी प्रभारी और नोडल की मिलीभगत से ही क्लीनिक का संचालन कर रहे हैं।
जिस किसी नोडल अधिकारी के क्षेत्र में झोलाछाप इलाज करता पाया गया तो नोडल पर कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा। जब तक कार्रवाई नहीं होगीस, तब तक इस मकड़जाल से छुटकारा नहीं मिल सकेगा। - डॉ. अब्दुल सलाम, सीएमओ

उघैती क्षेत्र में संचालित झोलाछाप की दुकान। संवाद

उघैती क्षेत्र में संचालित झोलाछाप की दुकान। संवाद