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जिला योजना : बजट के नाम पर फुटबॉल बन गया खेल विभाग
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बदायूं। केंद्र और प्रदेश सरकार भले ही खेल और खिलाड़ियों के लिए तमाम सुविधाएं मुहैया कराने के दावे करे, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। जिला योजना 2021-22 में खेलकूद विभाग पूरे साल बजट का इंतजार करता रहा, लेकिन विभाग को पिछली जिला योजना में अनुमोदित 30.50 लाख में एक धेला नहीं मिला। ऐसे में स्टेडियम में काम लटके रहे।
जिले में खेलकूद प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन जिले से खेल प्रतिभाएं राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच पातीं। इसका सबसे बड़ा कारण सुविधाओं का अभाव है। जिम्मेदार खेलकूद विभाग, युवा कल्याण विभाग, नेहरू युवा केंद्र खेल प्रतियोगिताओं के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाते हैं। बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग भी समय-समय पर खेल प्रतियोगिताएं कराते हैं, लेकिन यहां भी प्रतिभाएं बमुश्किल राज्य स्तर तक पहुंच पाती हैं।
खेलों को बढ़ावा देने के लिए शहर से करीब पांच किमी बदायूं-बिजनौर हाईवे पर बहेड़ी गांव में स्पोर्ट्स स्टेडियम 1992 में बनकर तैयार हुआ था। करीब तीन साल बीतने को हैं, लेकिन यहां से कोई बड़ी खेल प्रतिभा नहीं निकली। सुविधाओं और साधनों के नाम पर यहां कुछ विशेष नहीं है। कोच की बात करें तो टेनिस और एथलेटिक खेलों के कोच ही हैं।
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यहां बता दें कि जिला योजना 2020-21 के बाद 2021-22 में भी स्टेडियम की दशा सुधारने को बजट नहीं मिलने से तमाम काम लटके हैं।
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दुर्दशा का शिकार है स्टेडियम
स्टेडियम दुर्दशा का शिकार है। मुख्य इमारत खस्ता हालत में है। इसमें जगह-जगह दरारें साफ देखी जा सकती हैं। यहां जीने का गेट बंद कर दिया गया है ताकि किसी भी हादसे से बचा जा सके, लेकिन इमारत के निचले हिस्से का उपयोग अब भी किया जा रहा है। जिला योजना 2021-22 में खेलकूद विभाग ने स्टेडियम में सुधार के साथ यहां खेलकूद सुविधाओं और संसाधनों के लिए 30.50 लाख की कार्ययोजना रखी थी। इसे जिला योजना समिति का अनुमोदन तो मिल गया, लेकिन बजट के नाम पर एक रुपया नहीं मिल सका।
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अनुबंध पर नहीं रखे जा सके कोच, थमी रहीं खेलकूद गतिविधियां
बजट न होने के कारण स्टेडियम में अनुबंध पर कोच भी नहीं रखे जा सके। ऐसे में पूरे वर्ष खेलकूद गतिविधियां एक तरह से थमी रहीं। खेलकूद विभाग पूरे वर्ष कोई बड़ी खेल प्रतियोगिता का आयोजन भी नहीं करा सका। औपचारिकता के लिए कुछ खास मौकों पर प्रतियोगिताएं कराई गईं।
स्टेडियम में बैडमिंटन कोर्ट तो है, लेकिन कोच नहीं है। क्रिकेट कोच भी नहीं है, जबकि जिले में बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमी हैं। इधर, बदायूं क्रिकेट एसोसिएशन ने भी स्टेडियम से दूरी बना ली है। बदायूं क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम के स्थान पर एसके कॉलेज फील्ड का इस्तेमाल कर रहा है।
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जिला योजना में खेलकूद विभाग ने स्टेडियम में कई सुधारों के साथ सुविधाओं और संसाधनों के विस्तार को 30.50 लाख की कार्य योजना दी थी। इसे अनुमोदन तो मिला, लेकिन बजट जारी नहीं हो सका। ऐसे में स्टेडियम में कई अहम काम पूरे नहीं हो सके। हमारे यहां खेलों के दो ही कोच हैं। स्टेडियम में सोलर लाइट का काम भी होना था। बजट न मिलने के कारण यह काम भी नहीं हो सका।
- अमित रिछारिया, जिला क्रीड़ा अधिकारी
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जिले में खेलकूद प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन जिले से खेल प्रतिभाएं राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच पातीं। इसका सबसे बड़ा कारण सुविधाओं का अभाव है। जिम्मेदार खेलकूद विभाग, युवा कल्याण विभाग, नेहरू युवा केंद्र खेल प्रतियोगिताओं के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाते हैं। बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग भी समय-समय पर खेल प्रतियोगिताएं कराते हैं, लेकिन यहां भी प्रतिभाएं बमुश्किल राज्य स्तर तक पहुंच पाती हैं।
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खेलों को बढ़ावा देने के लिए शहर से करीब पांच किमी बदायूं-बिजनौर हाईवे पर बहेड़ी गांव में स्पोर्ट्स स्टेडियम 1992 में बनकर तैयार हुआ था। करीब तीन साल बीतने को हैं, लेकिन यहां से कोई बड़ी खेल प्रतिभा नहीं निकली। सुविधाओं और साधनों के नाम पर यहां कुछ विशेष नहीं है। कोच की बात करें तो टेनिस और एथलेटिक खेलों के कोच ही हैं।
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यहां बता दें कि जिला योजना 2020-21 के बाद 2021-22 में भी स्टेडियम की दशा सुधारने को बजट नहीं मिलने से तमाम काम लटके हैं।
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दुर्दशा का शिकार है स्टेडियम
स्टेडियम दुर्दशा का शिकार है। मुख्य इमारत खस्ता हालत में है। इसमें जगह-जगह दरारें साफ देखी जा सकती हैं। यहां जीने का गेट बंद कर दिया गया है ताकि किसी भी हादसे से बचा जा सके, लेकिन इमारत के निचले हिस्से का उपयोग अब भी किया जा रहा है। जिला योजना 2021-22 में खेलकूद विभाग ने स्टेडियम में सुधार के साथ यहां खेलकूद सुविधाओं और संसाधनों के लिए 30.50 लाख की कार्ययोजना रखी थी। इसे जिला योजना समिति का अनुमोदन तो मिल गया, लेकिन बजट के नाम पर एक रुपया नहीं मिल सका।
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अनुबंध पर नहीं रखे जा सके कोच, थमी रहीं खेलकूद गतिविधियां
बजट न होने के कारण स्टेडियम में अनुबंध पर कोच भी नहीं रखे जा सके। ऐसे में पूरे वर्ष खेलकूद गतिविधियां एक तरह से थमी रहीं। खेलकूद विभाग पूरे वर्ष कोई बड़ी खेल प्रतियोगिता का आयोजन भी नहीं करा सका। औपचारिकता के लिए कुछ खास मौकों पर प्रतियोगिताएं कराई गईं।
स्टेडियम में बैडमिंटन कोर्ट तो है, लेकिन कोच नहीं है। क्रिकेट कोच भी नहीं है, जबकि जिले में बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमी हैं। इधर, बदायूं क्रिकेट एसोसिएशन ने भी स्टेडियम से दूरी बना ली है। बदायूं क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम के स्थान पर एसके कॉलेज फील्ड का इस्तेमाल कर रहा है।
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जिला योजना में खेलकूद विभाग ने स्टेडियम में कई सुधारों के साथ सुविधाओं और संसाधनों के विस्तार को 30.50 लाख की कार्य योजना दी थी। इसे अनुमोदन तो मिला, लेकिन बजट जारी नहीं हो सका। ऐसे में स्टेडियम में कई अहम काम पूरे नहीं हो सके। हमारे यहां खेलों के दो ही कोच हैं। स्टेडियम में सोलर लाइट का काम भी होना था। बजट न मिलने के कारण यह काम भी नहीं हो सका।
- अमित रिछारिया, जिला क्रीड़ा अधिकारी