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जिले के अस्पतालों में एंटी एलर्जिक दवाएं नहीं, कफ सीरप की भी किल्लत
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बदायूं। सर्दी आने जाने के दौरान कई तरह के इन्फेक्शन बढ़ जाते हैं। मगर जिले के सरकारी अस्पतालों में एंटी एलर्जिक दवाएं नहीं हैं। इसके साथ ही कप सीरप की भी किल्लत है। बदलते मौसम में सर्दी, जुकाम, खांसी और बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। इनमें ज्यादातर बीमारियां किसी न किसी तरह की एलर्जी की वजह से होती हैं।
सर्दी का प्रकोप धीरे-धीरे कम हो रहा है। दिन में तेज धूप, लेकिन रात में और सुबह को सर्द हवाओं के साथ ठंड हो रही है। इस बदलते मौसम की वजह से एलर्जी के साथ वायरल का दायरा भी बढ़ने लगा है। ऐसे में एंटी एलर्जिक दवाओं की आवश्यकता बढ़ जाती है। यूपीएमएससी के लिए एंटी एलर्जिक दवाओं की डिमांड कई बार भेजी गई है। इनमें सिट्राजिन, हाइड्रो कोटेशन, लिवो सिट्राजिन आदि दवाएं शामिल हैं। इसके बाद भी आपूर्ति नहीं मिल रही है। बदलते मौसम में सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। मरीजों को सरकारी अस्पतालों में एंटी एलर्जिक दवाओं के स्थान पर दूसरे विकल्पों से काम चलाना बढ़ रहा है। जिले के कई सीएचसी और पीएचसी पर तो करीब चार महीने से एंटी एलर्जिक दवाएं नहीं हैं।
मरीजों को बाहर से लेनी रही दवाएं
बदलते मौसम में सर्दी,जुकाम, खांसी के मरीज बढ़ रहे हैं। कफ सीरप अस्पतालों में लंबे समय से नहीं है। इन बीमारियों में काम आने वाली एंटी एलर्जिक दवाएं भी नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को यह दवाएं बाहर से खरीदने पड़ रही हैं। सरकारी डॉक्टरों पर बाहरी की दवाएं लिखने पर प्रतिबंध है। ऐसे में मरीजों को परेशानियों का सामना करना हो रहा है। हालांकि, जिला अस्पताल परिसर में जन औषधि केंद्र भी है। यहां सस्ते दामों पर जेनरिक दवाएं मिलती हैं। जन औषधि केंद्र में भी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक नहीं है।
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अस्पतालों में इन दिनों दवाओं का पर्याप्त स्टॉक है। हो सकता है कि कुछ दवाएं कम हो गई हों। अगर एंटी एलर्जिक दवाएं नहीं हैं तो इसे दिखवाया जाएगा। यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन को दवा आपूर्ति के लिए रिमाइंडर भेजा जाएगा।
- डॉ. यशपाल सिंह, सीएमओ
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सर्दी का प्रकोप धीरे-धीरे कम हो रहा है। दिन में तेज धूप, लेकिन रात में और सुबह को सर्द हवाओं के साथ ठंड हो रही है। इस बदलते मौसम की वजह से एलर्जी के साथ वायरल का दायरा भी बढ़ने लगा है। ऐसे में एंटी एलर्जिक दवाओं की आवश्यकता बढ़ जाती है। यूपीएमएससी के लिए एंटी एलर्जिक दवाओं की डिमांड कई बार भेजी गई है। इनमें सिट्राजिन, हाइड्रो कोटेशन, लिवो सिट्राजिन आदि दवाएं शामिल हैं। इसके बाद भी आपूर्ति नहीं मिल रही है। बदलते मौसम में सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। मरीजों को सरकारी अस्पतालों में एंटी एलर्जिक दवाओं के स्थान पर दूसरे विकल्पों से काम चलाना बढ़ रहा है। जिले के कई सीएचसी और पीएचसी पर तो करीब चार महीने से एंटी एलर्जिक दवाएं नहीं हैं।
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मरीजों को बाहर से लेनी रही दवाएं
बदलते मौसम में सर्दी,जुकाम, खांसी के मरीज बढ़ रहे हैं। कफ सीरप अस्पतालों में लंबे समय से नहीं है। इन बीमारियों में काम आने वाली एंटी एलर्जिक दवाएं भी नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को यह दवाएं बाहर से खरीदने पड़ रही हैं। सरकारी डॉक्टरों पर बाहरी की दवाएं लिखने पर प्रतिबंध है। ऐसे में मरीजों को परेशानियों का सामना करना हो रहा है। हालांकि, जिला अस्पताल परिसर में जन औषधि केंद्र भी है। यहां सस्ते दामों पर जेनरिक दवाएं मिलती हैं। जन औषधि केंद्र में भी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक नहीं है।
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अस्पतालों में इन दिनों दवाओं का पर्याप्त स्टॉक है। हो सकता है कि कुछ दवाएं कम हो गई हों। अगर एंटी एलर्जिक दवाएं नहीं हैं तो इसे दिखवाया जाएगा। यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन को दवा आपूर्ति के लिए रिमाइंडर भेजा जाएगा।
- डॉ. यशपाल सिंह, सीएमओ