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प्रति क्विंटल तीन सौ का नुकसान...फिर भी आढ़तियों को गेहूं बेच रहे किसान

Thu, 22 Apr 2021 02:01 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 22 Apr 2021 02:01 AM IST
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Loss of 300 rupees per quintal ... yet farmers are selling wheat to the agents
बदायूं। सरकारी केंद्रों पर गेहूं खरीद शुरू होने के बाद भी किसानों के हालात सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं। किसानों को सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने के बाद में समय से धनराशि नहीं मिल पा रही है, जिससे वे आढ़तियों को गेहूं बेचने पर मजबूर हैं। किसानों को प्रति क्विंटल तीन सौ रुपये का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है, लेकिन तत्काल रकम मिलने से वे गेहूं बेच रहे हैं।
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शासन के निर्देश पर प्रदेश के अधिकांश जिलों में एक अप्रैल से गेहूं खरीद केंद्रों को खोलने के निर्देश दिए गए थे, जिसके बाद संबंधित जिलों में केंद्रों को खोल दिया गया है। हालांकि शासन की तरफ से खरीद शुरू होने से करीब 20 दिन पहले ही यहां पर समर्थन मूल्य की घोषणा कर दी गई थी, जिसमें गत वर्ष की अपेक्षा 50 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए 1975 रुपये मूल्य निर्धारित किया गया। शासन से निर्देश मिलने के बाद में जिला प्रशासन ने जिले में छह क्रय एजेंसियों के 121 गेहूं केंद्रों को खोला, जहां पर गेहूं की खरीदारी होनी थी। शुरुआत के चार दिन तक तो गेहूं खरीद नहीं हुई। पांचवें दिन से खरीद शुरू हो सकी, लेकिन गेहूं खरीद सेंटरों पर अभी भी अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं। जिले में कई जगहों पर माफिया और बिचौलिए हावी हैं, जिसकी वजह से संबंधित क्षेत्रों में गेहूं की खरीद नहीं हो पा रही है।
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रजिस्ट्रेशन के बगैर नहीं बेचा जा सकता केंद्र पर गेहूं
शासन ने साफ निर्देश दिए हैं कि सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों से गेहूं की खरीदारी तभी की जाएगी, जब उनके द्वारा विभाग की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन होगा। बिना रजिस्ट्रेशन के किसानों का गेहूं नहीं खरीदा जाएगा। जब किसान केंद्रों पर पहुुंच रहे, तो वहां पर मौजूद बिचौलिए किसानों को तमाम दिक्कतों को दिखाते हुए उन्हें सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने को मना कर रहे हैं। ऐसे में किसान भी भ्रम में आ जाता है और बिचौलियों को ही कम दामों पर गेहूं बेच देता है।
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आढ़तियों के पास से मिल रही नकद धनराशि
सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने वाले किसानों को 48 घंटे बाद धनराशि उनके खाते में दी जाती है। इसके बाद में किसान को उस धनराशि लेने के लिए बैंक के चक्कर लगाने होते हैं। ऐसे में चार पांच दिन बाद उन्हें अपनी उपज का दाम मिल पाता है। बैंकों में भी लाइन लगानी पड़ती है, जबकि आढ़तियों के यहां पर उन्हें नकद धनराशि मिल जाती है। हालांकि ये धनराशि इस समय 1650 से 1700 रुपये की बीच ही दी जा रही है। ऐसे में किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कागजों में सरकारी केंद्र खोल दिए गए हैं, लेकिन मौजूदा हालात बिल्कुल ही अलग है। सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद नहीं हो पा रही है। किसान परेशान है। हर तरफ भटक रहा है। ऐसे में आढ़तियों के यहां पर सस्ते में धनराशि बेचने में दिक्कत आ रही है।
- विनोद, कुवरगांव
किसानों का क्या है, उन्हें तो केवल परेशान किया जाता है। हर चीज पर कीमतें आसमान छू रही हैं लेकिन खेतों में होने वाली फसल के रेट नहीं बढ़ते हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए तमाम शर्तों को पूरा करना होता है। समय से धनराशि भी नहीं मिलती है।

- दिगम्बर सिंह, सिंगरौरा
क्रय केंद्र प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि ज्यादा से ज्यादा गेहूं की खरीद करें। किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न होने दें। केंद्रों पर बिचौलियों को प्रवेश न होने दें, केवल किसानों से ही गेहूं की खरीद की जाए, ताकि उन्हें शासन की योजना का लाभ मिल सके।
- प्रकाश नारायण, डिप्टी आरएमओ
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