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पूरी भव्यता से होगा ककोड़ा मेला
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मेला ककोड़ा स्थल का निरीक्षण करने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली से पहुंचे डीएम, एसएसपी। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। ककोड़ा मेले को लेकर चल रही हीलाहवाली पर आखिर धार्मिक ओर जनभावनाएं भारी रहीं। अब यह साफ हो गया है कि मेले का स्वरूप पहले की तरह विशाल होगा। भव्यता में भी कोई कमी नहीं आएगी। मंगलवार को ट्रैक्टर ट्रॉली से डीएम दीपा रंजन, एसएसपी व अन्य अधिकारियों ने फिर मेला स्थल पहुंच कर तैयारियों का जायजा लिया। जिला पंचायत को निर्देश दिए कि मेले के दायरा कम नहीं होना चाहिए। जिला पंचायत समेत संबंधित विभागों को युद्धस्तर पर काम पूरा करने के निर्देश भी दिए।
ककोड़ा मेले का आयोजन 12 से 26 नवंबर तक होना है। 23 अक्तूबर को मेला आयोजन के लिए शासन ने अनुमति भी दे दी थी। सदियों में पहली बार पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण मेले का आयोजन नहीं हो सका था। इस वर्ष मेला आयोजन की अनुमति मिलने के बाद भी जिला पंचायत प्रशासन की ओर से मेला आयोजन को लेकर हीलाहवाली की जा रही थी। जिला पंचायत के अधिकारी प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों तक को मेला स्थल पर पानी भरा होने के साथ गंगा का जलस्तर ज्यादा होने की रिपोर्ट देकर मेला आयोजन से हाथ खींच रहे थे। इस बीच कुर्मी समाज के लोगों ने डीएम से लेकर मंडलायुक्त तक को मेला आयोजन की मांग को लेकर ज्ञापन दिया।
जनभावनाओं में उबाल को देखते हुए शनिवार को नगर विकास राज्यमंत्री महेश गुप्ता और शेखूपुर विधायक धर्मेंद्र शाक्य ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी से मुलाकात की मेला आयोजन को लेकर जिला स्तर पर हो रही हीलाहवाली के बारे में शिकायत की। इसके बाद प्रशासन और जिला पंचायत हरकत में आया। अब मेला आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। मेला स्थल पर झंडियां लगाने के साथ सड़कें बनाने का काम भी शुरू हो गया है।
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जिला पंचायत प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
मेला ककोड़ा के आयोजन की जिम्मेदारी जिला पंचायत की होती है। 28 सितंबर को जिला पंचायत अध्यक्ष वर्षा यादव ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान मेला आयोजन को लेकर बात की थी। इसके बाद जिला पंचायत प्रशासन ने शासन से मेला आयोजन के लिए अनुमति मांगी थी। अनुमति मिलने से पहले 12 अक्तूबर की जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में सांकेतिक रूप से मेला आयोजन का प्रस्ताव भी पास कर दिया गया। इसके बाद शासन से मेला आयोजन की अनुमति मिल गई। इसके बाद मेला स्थल के चयन समेत अन्य जिम्मेदारियां जिला पंचायत की थीं, लेकिन जिला पंचायत प्रशासन ने अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक को गुमराह करने का काम चालू कर दिया। कई बार निरीक्षण के दौरान ऐसे स्थान दिखाए गए जहां पानी भरा था और स्थान उपयुक्त नहीं था।
राज्यमंत्री ने खुद किया निरीक्षण तब स्थान मिल गया
सोमवार को नगर विकास राज्यमंत्री महेश गुप्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष वर्षा यादव, शेखूपुर विधायक धर्मेंद्र शाक्य, भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता ने स्थानीय लोगों के साथ मेला स्थल का निरीक्षण किया तो उपयुक्त स्थान भी मिल गया। यहां घाट भी ठीक हैं। दरअसल, जिला पंचायत की टीम अधिकारियों को रास्ते में भरा पानी दिखाकर लौटा लाती थी। ऐसे में मेले का स्थान और स्वरूप तय नहीं हो पा रहा था।
ककोड़ा मेले को मंजूरी मिलने के साथ ही सड़कें बनाने का काम शुरू हो गया है। मेला लगाने को जनता व कई संगठन लगातार प्रयास कर रहे थे। इससे जहां लोगों की धार्मिक आस्था को बल मिलेगा वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। मेला पूरी भव्यता से लगाया जाएगा। घाटों पर सुरक्षा बंदोबस्त और रास्तों की समुचित व्यवस्था करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
- महेश चंद्र गुप्ता, नगर विकास राज्यमंत्री
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ककोड़ा मेले का आयोजन 12 से 26 नवंबर तक होना है। 23 अक्तूबर को मेला आयोजन के लिए शासन ने अनुमति भी दे दी थी। सदियों में पहली बार पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण मेले का आयोजन नहीं हो सका था। इस वर्ष मेला आयोजन की अनुमति मिलने के बाद भी जिला पंचायत प्रशासन की ओर से मेला आयोजन को लेकर हीलाहवाली की जा रही थी। जिला पंचायत के अधिकारी प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों तक को मेला स्थल पर पानी भरा होने के साथ गंगा का जलस्तर ज्यादा होने की रिपोर्ट देकर मेला आयोजन से हाथ खींच रहे थे। इस बीच कुर्मी समाज के लोगों ने डीएम से लेकर मंडलायुक्त तक को मेला आयोजन की मांग को लेकर ज्ञापन दिया।
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जनभावनाओं में उबाल को देखते हुए शनिवार को नगर विकास राज्यमंत्री महेश गुप्ता और शेखूपुर विधायक धर्मेंद्र शाक्य ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी से मुलाकात की मेला आयोजन को लेकर जिला स्तर पर हो रही हीलाहवाली के बारे में शिकायत की। इसके बाद प्रशासन और जिला पंचायत हरकत में आया। अब मेला आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। मेला स्थल पर झंडियां लगाने के साथ सड़कें बनाने का काम भी शुरू हो गया है।
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जिला पंचायत प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
मेला ककोड़ा के आयोजन की जिम्मेदारी जिला पंचायत की होती है। 28 सितंबर को जिला पंचायत अध्यक्ष वर्षा यादव ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान मेला आयोजन को लेकर बात की थी। इसके बाद जिला पंचायत प्रशासन ने शासन से मेला आयोजन के लिए अनुमति मांगी थी। अनुमति मिलने से पहले 12 अक्तूबर की जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में सांकेतिक रूप से मेला आयोजन का प्रस्ताव भी पास कर दिया गया। इसके बाद शासन से मेला आयोजन की अनुमति मिल गई। इसके बाद मेला स्थल के चयन समेत अन्य जिम्मेदारियां जिला पंचायत की थीं, लेकिन जिला पंचायत प्रशासन ने अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक को गुमराह करने का काम चालू कर दिया। कई बार निरीक्षण के दौरान ऐसे स्थान दिखाए गए जहां पानी भरा था और स्थान उपयुक्त नहीं था।
राज्यमंत्री ने खुद किया निरीक्षण तब स्थान मिल गया
सोमवार को नगर विकास राज्यमंत्री महेश गुप्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष वर्षा यादव, शेखूपुर विधायक धर्मेंद्र शाक्य, भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता ने स्थानीय लोगों के साथ मेला स्थल का निरीक्षण किया तो उपयुक्त स्थान भी मिल गया। यहां घाट भी ठीक हैं। दरअसल, जिला पंचायत की टीम अधिकारियों को रास्ते में भरा पानी दिखाकर लौटा लाती थी। ऐसे में मेले का स्थान और स्वरूप तय नहीं हो पा रहा था।
ककोड़ा मेले को मंजूरी मिलने के साथ ही सड़कें बनाने का काम शुरू हो गया है। मेला लगाने को जनता व कई संगठन लगातार प्रयास कर रहे थे। इससे जहां लोगों की धार्मिक आस्था को बल मिलेगा वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। मेला पूरी भव्यता से लगाया जाएगा। घाटों पर सुरक्षा बंदोबस्त और रास्तों की समुचित व्यवस्था करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
- महेश चंद्र गुप्ता, नगर विकास राज्यमंत्री