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चीनी मिल कर्मी का सवा सौ रुपये महीने का बनाया आय प्रमाणपत्र
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बदायूं। शेखूपुर क्षेत्र पर तैनात लेखपाल पिछले दिनों मृतक के आय प्रमाणपत्र जारी करके चर्चा में आए थे। तहसील प्रशासन ने जांच के नाम पर खानापूरी कर दी थी। अब इन्हीं लेखपाल की रिपोर्ट पर तहसीलदार सदर ने एक युवक का सवा सौ रुपये प्रतिमाह का आय प्रमाणपत्र जारी कर दिया है जो व्यवहारिकता में संभव नहीं है। बताते हैं कि प्रमाणपत्र पाने वाला शख्स चीनी मिल का संविदा कर्मचारी है जबकि उसके पिता चीनी मिल में तीस हजार रुपये मासिक के नियमित कर्मचारी हैं। डीएम व अन्य अधिकारियों से ट्विटर पर मामले की शिकायत की गई है।
शेखूपुर क्षेत्र पर तैनात एक लेखपाल के कारनामे फिर चर्चा में हैं। पिछले दिनों वह मृत व्यक्ति का प्रमाणपत्र तहसीलदार से बनवाकर सुर्खियों में आए थे। इसके अलावा कई और अजीबोगरीब प्रमाणपत्र वह सदर तहसीलदार की कलम से जारी करा चुके हैं। अब सदर तहसीलदार ने इन्हीं लेखपाल की संस्तुति पर सवा सौ रुपये प्रतिमाह यानि पंद्रह सौ रुपये वार्षिक का प्रमाणपत्र जारी कराया गया है। जाहिर है कि आज के दौर में मजदूरी भी इतनी है कि इस तरह का आय प्रमाणपत्र किसी सूरत में नहीं बनाया जा सकता। बताते हैं कि शेखूपुर निवासी जिस शख्स का यह प्रमाणपत्र जारी हुआ है कि वह चीनी मिल में संविदा पर काम करता है। प्रमाणपत्र में परिवार की कुल आय पंद्रह सौ रुपया महीना दिखाई गई है जबकि युवक के पिता चीनी मिल में तीस हजार रुपये प्रतिमाह के वेतन पर तैनात बताए जा रहे हैं।
प्राइवेट मुंशी सेटिंग करके लगवाते हैं रिपोर्ट
- शहर भर में कुछ चर्चित लेखपाल खुद बड़ी आमदनी के कामों लगे रहते हैं जबकि उन्होंने इस तरह की रिपोर्ट लगाने व अन्य कामों के लिए निजी मुंशी रख लिए हैं। यह मुंशी आवेदन होते ही संबंधित आवेदक से संपर्क साध लेते हैं। फिर सुविधाशुल्क के लिहाज से काम की फीस तय हो जाती है। इसमें हर तरह का काम कराने की पक्की गारंटी होती है। प्रमाणपत्र जारी करने वाले तहसीलदार जैसे वरिष्ठ अधिकारी आंख मूंदकर किस तरह ऐसे प्रमाणपत्रों को जारी कर देते हैं, यह बड़ा सवाल है।
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शेखूपुर क्षेत्र पर तैनात एक लेखपाल के कारनामे फिर चर्चा में हैं। पिछले दिनों वह मृत व्यक्ति का प्रमाणपत्र तहसीलदार से बनवाकर सुर्खियों में आए थे। इसके अलावा कई और अजीबोगरीब प्रमाणपत्र वह सदर तहसीलदार की कलम से जारी करा चुके हैं। अब सदर तहसीलदार ने इन्हीं लेखपाल की संस्तुति पर सवा सौ रुपये प्रतिमाह यानि पंद्रह सौ रुपये वार्षिक का प्रमाणपत्र जारी कराया गया है। जाहिर है कि आज के दौर में मजदूरी भी इतनी है कि इस तरह का आय प्रमाणपत्र किसी सूरत में नहीं बनाया जा सकता। बताते हैं कि शेखूपुर निवासी जिस शख्स का यह प्रमाणपत्र जारी हुआ है कि वह चीनी मिल में संविदा पर काम करता है। प्रमाणपत्र में परिवार की कुल आय पंद्रह सौ रुपया महीना दिखाई गई है जबकि युवक के पिता चीनी मिल में तीस हजार रुपये प्रतिमाह के वेतन पर तैनात बताए जा रहे हैं।
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प्राइवेट मुंशी सेटिंग करके लगवाते हैं रिपोर्ट
- शहर भर में कुछ चर्चित लेखपाल खुद बड़ी आमदनी के कामों लगे रहते हैं जबकि उन्होंने इस तरह की रिपोर्ट लगाने व अन्य कामों के लिए निजी मुंशी रख लिए हैं। यह मुंशी आवेदन होते ही संबंधित आवेदक से संपर्क साध लेते हैं। फिर सुविधाशुल्क के लिहाज से काम की फीस तय हो जाती है। इसमें हर तरह का काम कराने की पक्की गारंटी होती है। प्रमाणपत्र जारी करने वाले तहसीलदार जैसे वरिष्ठ अधिकारी आंख मूंदकर किस तरह ऐसे प्रमाणपत्रों को जारी कर देते हैं, यह बड़ा सवाल है।
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