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तौफी नगला पुल का संपर्क मार्ग बहा, 50 से ज्यादा गांवों का आवागमन हुआ बाधित
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मिटटी डालकर की जा रही एप्रोच रोड की मरम्मत। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। सहसवान में महावा नदी पर बने तौफी नगला पुल का संपर्क मार्ग एक बारिश भी नहीं झेल सका। महावा में बाढ़ के कारण पुल के दोनों ओर संपर्क मार्ग पानी में डूब गया है तो सड़क का काफी हिस्सा बाढ़ में बह गया है। संपर्क मार्ग डूबने और काफी हिस्सा पानी में बहने के कारण पुल से आवागमन बंद हो गया है। ऐसे में आसपास के 50 से ज्यादा गांवों के लोगों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। हालांकि, संपर्क मार्ग को दुरुस्त करने का काम भी शुरू कर दिया गया है,
महावा नदी पर 12.91 करोड़ की लागत से तौफी नगला पुल का निर्माण हाल ही में पूरा हुआ है। अभी पुल का लोकार्पण भी नहीं हो सका है। पुल बनने से बेहद पिछड़े धापड़, हुसैनपुर पुख्ता, नगला बरन, नगला कोतल, नरसेना, रसूलपुर बेला, जरीफपुर गढ़िया, धुबिया, पालपुर, जमूनी आदि समेत 50 से ज्यादा गांवों के ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा हो गई। दरअसल, पुल न होने के कारण इन गांवों के लोगों को बदायूं या कासगंज की ओर जाने के लिए पहले सहसवान आना पड़ता था। पुल बनने के बाद उनका करीब 30 किमी का सफर कम हो गया।
पुल के बाद संपर्क मार्ग निर्माण के दौरान ही ग्रामीणों ने संपर्क मार्ग नीचा होने की शिकायत की थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। महावा नदी में बाढ़ के सीजन में गंगा से पानी आता है। कई दिन से गंगा खतरे के निशान के ऊपर हैं। मंगलवार को तो गंगा खतरे के निशान से 72 सेमी ऊपर पहुंच गई थीं। ऐसे में महावा में भी उफान आ गया और पुल का संपर्क मार्ग डूब गया तो काफी हिस्सा महावा में समा गया। संपर्क मार्ग को दुरुस्त करने के लिए काम किया जा रहा है, लेकिन पुल के दोनों ओर संपर्क मार्ग कई फुट पानी में डूबा होने के कारण यह काम भी नहीं हो पा रहा। ऐसे में इन गांवों के लोगों को मजबूरन अधिक सफर करना पड़ रहा है।
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अब मिट्टी डालकर ऊंचा किया जा रहा है संपर्क मार्ग
बारिश के पहले ही सीजन में महावा पुल का संपर्क मार्ग पानी में डूबने के बाद इतना तो साफ हो गया है कि संपर्क मार्ग को महावा के रुख को देखते हुए ऊंचा नहीं बनाया गया। आसपास के ग्रामीणों ने संपर्क मार्ग निर्माण के समय भी शिकायत की थी, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया। अब बाढ़ के दौरान कार्यदायी संस्था संपर्क मार्ग को मिट्टी से भराव डाल कर ऊंचा करने में लगी है।
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महावा में पानी बढ़ने के कारण पुल का संपर्क मार्ग का कुछ हिस्सा पानी में डूब गया था। कुछ हिस्सा बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हो गया। क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक करा दिया गया है। पानी कम होने के साथ ही हालात सामान्य हो जाएंगे। संपर्क मार्ग को लेकर संबंधित कांट्रैक्टर को निर्देशित किया गया है।
- वीके मौर्य, उप परियोजना प्रबंधक-सेतु निगम
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महावा नदी पर 12.91 करोड़ की लागत से तौफी नगला पुल का निर्माण हाल ही में पूरा हुआ है। अभी पुल का लोकार्पण भी नहीं हो सका है। पुल बनने से बेहद पिछड़े धापड़, हुसैनपुर पुख्ता, नगला बरन, नगला कोतल, नरसेना, रसूलपुर बेला, जरीफपुर गढ़िया, धुबिया, पालपुर, जमूनी आदि समेत 50 से ज्यादा गांवों के ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा हो गई। दरअसल, पुल न होने के कारण इन गांवों के लोगों को बदायूं या कासगंज की ओर जाने के लिए पहले सहसवान आना पड़ता था। पुल बनने के बाद उनका करीब 30 किमी का सफर कम हो गया।
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पुल के बाद संपर्क मार्ग निर्माण के दौरान ही ग्रामीणों ने संपर्क मार्ग नीचा होने की शिकायत की थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। महावा नदी में बाढ़ के सीजन में गंगा से पानी आता है। कई दिन से गंगा खतरे के निशान के ऊपर हैं। मंगलवार को तो गंगा खतरे के निशान से 72 सेमी ऊपर पहुंच गई थीं। ऐसे में महावा में भी उफान आ गया और पुल का संपर्क मार्ग डूब गया तो काफी हिस्सा महावा में समा गया। संपर्क मार्ग को दुरुस्त करने के लिए काम किया जा रहा है, लेकिन पुल के दोनों ओर संपर्क मार्ग कई फुट पानी में डूबा होने के कारण यह काम भी नहीं हो पा रहा। ऐसे में इन गांवों के लोगों को मजबूरन अधिक सफर करना पड़ रहा है।
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अब मिट्टी डालकर ऊंचा किया जा रहा है संपर्क मार्ग
बारिश के पहले ही सीजन में महावा पुल का संपर्क मार्ग पानी में डूबने के बाद इतना तो साफ हो गया है कि संपर्क मार्ग को महावा के रुख को देखते हुए ऊंचा नहीं बनाया गया। आसपास के ग्रामीणों ने संपर्क मार्ग निर्माण के समय भी शिकायत की थी, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया। अब बाढ़ के दौरान कार्यदायी संस्था संपर्क मार्ग को मिट्टी से भराव डाल कर ऊंचा करने में लगी है।
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महावा में पानी बढ़ने के कारण पुल का संपर्क मार्ग का कुछ हिस्सा पानी में डूब गया था। कुछ हिस्सा बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हो गया। क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक करा दिया गया है। पानी कम होने के साथ ही हालात सामान्य हो जाएंगे। संपर्क मार्ग को लेकर संबंधित कांट्रैक्टर को निर्देशित किया गया है।
- वीके मौर्य, उप परियोजना प्रबंधक-सेतु निगम