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Budaun News: नहीं मिल पा रही सुविधाएं, कैसे निखरें खेल प्रतिभाएं
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रितिक।(खेल वाली खबर के साथ)
बदायूं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल मैदान और जिला मुख्यालय पर कोच नहीं होने से ग्रामीण इलाकों के युवा खिलाड़ियों को निराशा हाथ लग रही है। वे खुद ही तैयारी करते हैं लेकिन उचित मार्गदर्शन न मिलने से आगे नहीं बढ़ पाते।
प्रदेश सरकार खेलों को बढ़ावा देने का दावा तो करती है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं देती। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले युवा खिलाड़ियों को निराशा हाथ लगती है। ऐसे में वे प्रतिभा को निखार नहीं पाते।
जिले में मात्र एक स्पोर्ट्स स्टेडियम शहर से सटे गांव में बना हुआ है। ऐसे में पूरे जिले से युवा वहां नहीं जा पाते। तहसील सहसवान से जिला मुख्यालय की एक तरफ से दूरी 40 किलोमीटर है। जबकि सहसवान क्षेत्र के जरीफनगर गांव से शहर 60 किलोमीटर दूर है।
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तहसील बिल्सी से जिला मुख्यालय 27 और क्षेत्र के अल्लापुर की बात करें तो वह शहर से 58 किलोमीटर दूर है। इसी प्रकार तहसील बिसौली से जिला मुख्यालय 40 और क्षेत्र का ओरछी गांव 65 किलोमीटर दूर है तो दातागंज करीब 32 किलोमीटर दूर है। अगर सदर तहसील की बात करें तो कछला करीब 30 किलोमीटर दूर है। ऐसे में इन इलाकों के खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स स्टेडियम पहुंचने में दिक्कत आती है।
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स्टेडियम में नहीं है पर्याप्त कोच
स्पोर्ट्स स्टेडियम में फिलहाल लॉन टेनिस प्रशिक्षक अमित रिछारिया, बैडमिंटन प्रशिक्षक नाजिया बेगम, भारोत्तोलन प्रशिक्षक राजीव कुमार, हाॅकी प्रशिक्षक सैयद आबिद अली, बॉक्सिंग प्रशिक्षक शैवर अली खान, फुटबॉल प्रशिक्षक आशु भारती ही हैं। जबकि तीरंदाजी, क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स समेत अन्य खेलों के प्रशिक्षक नहीं हैं।
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ग्राम पंचायतों में अस्तित्व खो रहे खेल मैदान
गंगा यात्रा के दौरान जिले में 41 गांवों का चयन किया गया था। यहां खेल मैदान बनाए गए थे, लेकिन यहां पर किसी भी कोच की तैनाती नहीं की गई। ऐसे में धीरे-धीरे इन मैदानों ने अपना अस्तित्व खो दिया है। कुछ जगहों पर खेल मैदान हैं भी तो वहां पर घास उगी हुई है। बगरैन में खेल मैदान तैयार किया जा रहा है।
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युवाओं ने कहा
सरकार युवाओं के लिए खेल सुविधाएं मुहैया कराने का वायदा कर रही है, लेकिन हकीकत में उन्हें सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। ऐसे में युवा आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
- आदित्य सक्सेना, खजुरारा
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फोटो-8
जिले में मात्र एक स्टेडियम है। गांव से वहां पहुंचने में काफी समय लग जाता है। सुबह के वक्त सवारी भी नहीं मिलती है। ऐसे में प्रतिभा कैसें निखारें यही सोचते रह जाते हैं।
-बच्चू सिंह, पिपरौल
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सरकार को चाहिए कि प्रत्येक तहसील में कम से कम एक स्टेडियम बनवाए। साथ ही वहां पर कोच को भी तैनाती करे। जिससे युवा देश-प्रदेश में अपना नाम रोशन कर सकें।
-रितिक, बिल्सी
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अगर जिले में युवाओं के लिए पर्याप्त खेल की सुविधाएं मिल जाएं, तो काफी अच्छे खिलाड़ी आगे आ सकते हैं, जो देश-प्रदेश में जिले का नाम रोशन कर सकते हैं, लेकिन यहां सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिल पा रहा है।
- शिव गौड़, बांस बरोलिया
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स्टेडियम में प्रशिक्षकों की कमीं है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही प्रशिक्षण मिल जाएंगे।
- अमित रिछारिया, जिला क्रीड़ा अधिकारी
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प्रदेश सरकार खेलों को बढ़ावा देने का दावा तो करती है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं देती। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले युवा खिलाड़ियों को निराशा हाथ लगती है। ऐसे में वे प्रतिभा को निखार नहीं पाते।
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जिले में मात्र एक स्पोर्ट्स स्टेडियम शहर से सटे गांव में बना हुआ है। ऐसे में पूरे जिले से युवा वहां नहीं जा पाते। तहसील सहसवान से जिला मुख्यालय की एक तरफ से दूरी 40 किलोमीटर है। जबकि सहसवान क्षेत्र के जरीफनगर गांव से शहर 60 किलोमीटर दूर है।
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तहसील बिल्सी से जिला मुख्यालय 27 और क्षेत्र के अल्लापुर की बात करें तो वह शहर से 58 किलोमीटर दूर है। इसी प्रकार तहसील बिसौली से जिला मुख्यालय 40 और क्षेत्र का ओरछी गांव 65 किलोमीटर दूर है तो दातागंज करीब 32 किलोमीटर दूर है। अगर सदर तहसील की बात करें तो कछला करीब 30 किलोमीटर दूर है। ऐसे में इन इलाकों के खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स स्टेडियम पहुंचने में दिक्कत आती है।
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स्टेडियम में नहीं है पर्याप्त कोच
स्पोर्ट्स स्टेडियम में फिलहाल लॉन टेनिस प्रशिक्षक अमित रिछारिया, बैडमिंटन प्रशिक्षक नाजिया बेगम, भारोत्तोलन प्रशिक्षक राजीव कुमार, हाॅकी प्रशिक्षक सैयद आबिद अली, बॉक्सिंग प्रशिक्षक शैवर अली खान, फुटबॉल प्रशिक्षक आशु भारती ही हैं। जबकि तीरंदाजी, क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स समेत अन्य खेलों के प्रशिक्षक नहीं हैं।
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ग्राम पंचायतों में अस्तित्व खो रहे खेल मैदान
गंगा यात्रा के दौरान जिले में 41 गांवों का चयन किया गया था। यहां खेल मैदान बनाए गए थे, लेकिन यहां पर किसी भी कोच की तैनाती नहीं की गई। ऐसे में धीरे-धीरे इन मैदानों ने अपना अस्तित्व खो दिया है। कुछ जगहों पर खेल मैदान हैं भी तो वहां पर घास उगी हुई है। बगरैन में खेल मैदान तैयार किया जा रहा है।
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युवाओं ने कहा
सरकार युवाओं के लिए खेल सुविधाएं मुहैया कराने का वायदा कर रही है, लेकिन हकीकत में उन्हें सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। ऐसे में युवा आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
- आदित्य सक्सेना, खजुरारा
फोटो-8
जिले में मात्र एक स्टेडियम है। गांव से वहां पहुंचने में काफी समय लग जाता है। सुबह के वक्त सवारी भी नहीं मिलती है। ऐसे में प्रतिभा कैसें निखारें यही सोचते रह जाते हैं।
-बच्चू सिंह, पिपरौल
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सरकार को चाहिए कि प्रत्येक तहसील में कम से कम एक स्टेडियम बनवाए। साथ ही वहां पर कोच को भी तैनाती करे। जिससे युवा देश-प्रदेश में अपना नाम रोशन कर सकें।
-रितिक, बिल्सी
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अगर जिले में युवाओं के लिए पर्याप्त खेल की सुविधाएं मिल जाएं, तो काफी अच्छे खिलाड़ी आगे आ सकते हैं, जो देश-प्रदेश में जिले का नाम रोशन कर सकते हैं, लेकिन यहां सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिल पा रहा है।
- शिव गौड़, बांस बरोलिया
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स्टेडियम में प्रशिक्षकों की कमीं है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही प्रशिक्षण मिल जाएंगे।
- अमित रिछारिया, जिला क्रीड़ा अधिकारी

रितिक।(खेल वाली खबर के साथ)

रितिक।(खेल वाली खबर के साथ)

रितिक।(खेल वाली खबर के साथ)