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दुआ करो, कहीं और हो न ये हादसा...
ककराला (बदायूं)।
Updated Thu, 21 Sep 2017 12:33 AM IST
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हादसा
- फोटो : अमर उजाला
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दुआ करो, कहीं और हो न ये हादसा...
एक-एक कर दफनाई गईं 11 लाशें, रो पड़ा पूरा गांव, पति के अंतिम दीदार को पहुंची नाजरीन
मेरे साथ तुम भी दुआ करो, यूं किसी के हक में बुरा न हो
कहीं और हो न ये हादसा, कोई रास्ते से जुदा न हो
न जाने किस मन:स्थिति में बशीर बद्र साहब ने यह शेर गढ़ा होगा। लेकिन बुधवार को आसफपुर गांव में जब एक-एक कर ग्यारह लाशें दफनाईं जाने लगीं तो वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखों से निकले आंसुओं ने उनके शेर को ताजा कर दिया। अल्लाह ऐसा दुख किसी को न दे। नाजरीन के हाथों की मेहंदी तो पूरी तरह चढ़ने के पहले ही उतर गई। शौहर को अंतिम विदा देने आई तो पत्थर दिल वालों का भी कलेजा फट गया। हादसे में सिर्फ एक नहीं, चार जोड़े हमेशा के लिए बिछड़ गए। गांव में मातमी सन्नाटा रहा। न चूल्हे जले, न भूख ने बच्चों को सताया।
ककराला से करीब दो किलोमीटर दूर बसे आसपुर निवासी इदरीस के बेटे अमजद, बेटी इमराना, परवीन, सोनी, बहू मेराज, नाती फरहान, भतीजे राजा उर्फ हासिम, उसकी पत्नी नसरीन और परवीन की बेटी शमरीन और एक माह के बेटे की मौत हो गई थी। तीन दिन पहले 17 सितंबर को अमजद और मई बूचन के इकबाल की पुत्री नाजरीन का निकाह हुआ हुआ था।
सोमवार आसपुर में शादी की दावत के बाद नाजरीन अपने मायके चली गई थी। मंगलवार को अमजद और उसके घरवाले नाजरीन की विदा कराकर अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में गभियाई गांव के पास उनकी कार नियंत्रित होकर रोड किनारे खड़े पेड़ से टकराने के बाद खाई में पलट गई।
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पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार आधी रात के सभी 10 शव आसपुर गांव ले जाए गए। इसका पता लगा तो बुधवार सुबह चार बजे से लोग आसपुर गांव में जमा होने लगे और सुबह होने तक हजारों की भीड़ जमा हो गई। ककराला और गौराई, मसूदपुरा, बिलहा, अलापुर, शखानू, इरौलिया, म्यायूं गबिया समेत करीब 50 गांवों के लोग मृतकों का अंतिम दीदार करने पहुंचे। मृतकों के घरों में मचे कोहराम से हर किसी का दिल दहल गया। सुबह करीब 11.30 बजे अमजद और उसके भतीजे फरहान का जनाजा कब्रिस्तान ले जाया गया। फिर दोपहर करीब दो बजे तक एक के बाद एक करके सभी को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान आने-जाने वालों का तांता लगा रहा।
जनाजे में कलेजे के टुकड़े जाते देख मां तसरीकन और पिता इदरीस बुरी तरह बिलख रहे थे। हर किसी की आंखों से आंसू थे।
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कई नेता पहुंचे ढाढ़स बंधाने
सपा जिलाध्यक्ष आशीष यादव पीड़ित परिवार को ढाढ़स बंधाने उनके घर पहुंचे। उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया। उनके साथ अशोक यादव, खालिद रजा, सुरेंद्र सिंह, चरन सिंह आदि रहे। इस दुख की घड़ी में पूर्व विधायक मुस्लिम खां भी सांत्वना देने इदरीस के घर पहुंचे। बसपा से विधानसभा पद पर प्रत्याशी रहे काजी रिजवान ने भी आसपुर जाकर पीड़ित परिवार को ढाढ़स बंधाया।
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कई थानों की पुलिस रही मौजूद
सुरक्षा के लिहाज से बुधवार को आसपुर गांव में अलापुर समेत कई थानों की पुलिस मौजूद रही। मृतकों के सुपुर्द-ए- खाक होने बाद पुलिस वाले चले गए। हालांकि कोई अधिकारी पीड़ित परिवार को सांत्वना देने नहीं पहुंचा।
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11 शव किए सुपुर्द के खाक
मृतकों में शामिल इदरीस की बेटी सोनी आठ माह की गर्भवती थी। उसका पोस्टमार्टम करने के दौरान डॉक्टरों ने देखा तो गर्भ में शिशु की मौत हो चुकी थी। सोनी का शव घर ले जाने पर शिशु का शव गर्भ से निकालकर अलग हो गया। उसे अलग कब्र बनाकर सुपुर्द ए खाक किया गया।
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दूसरे दिन भी दुर्घटना स्थल देखते रहे लोग
हादसे में एक ही परिवार के दस लोगों की मौत से पूरा जिला दहल उठा। बुधवार को हर इलाके में इसी की चर्चा रही। बुधवार दूसरे दिन भी दुर्घटना स्थल पर लोगों की भीड़ रही। उधर से गुजरने वाले राहगीर अपनी गाड़ी रोककर उस पेड़ जिससे कार टकराई थी और मौके पर बिखरा पड़ा सामान देखते रहे।
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रिश्तेदारों ने उतारे थे जेवर
मंगलवार को हादसे के बाद दुल्हन नाजरीन और अन्य महिलाओं के जेवर, दूल्हे अमजद की अंगूठी और पुरुषों की जेब से रुपये गायब थे। हादसे के समय उधर से गुजर रहे गालिब नाम के व्यक्ति ने अपने मोबाइल से वीडियो बना ली थी। वीडियो में दुल्हन नाजरीन पक्ष के रिश्तेदार मृतकों और घायलों के जेवर आदि उतारते दिख रहे हैं।
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एक-एक कर दफनाई गईं 11 लाशें, रो पड़ा पूरा गांव, पति के अंतिम दीदार को पहुंची नाजरीन
मेरे साथ तुम भी दुआ करो, यूं किसी के हक में बुरा न हो
कहीं और हो न ये हादसा, कोई रास्ते से जुदा न हो
न जाने किस मन:स्थिति में बशीर बद्र साहब ने यह शेर गढ़ा होगा। लेकिन बुधवार को आसफपुर गांव में जब एक-एक कर ग्यारह लाशें दफनाईं जाने लगीं तो वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखों से निकले आंसुओं ने उनके शेर को ताजा कर दिया। अल्लाह ऐसा दुख किसी को न दे। नाजरीन के हाथों की मेहंदी तो पूरी तरह चढ़ने के पहले ही उतर गई। शौहर को अंतिम विदा देने आई तो पत्थर दिल वालों का भी कलेजा फट गया। हादसे में सिर्फ एक नहीं, चार जोड़े हमेशा के लिए बिछड़ गए। गांव में मातमी सन्नाटा रहा। न चूल्हे जले, न भूख ने बच्चों को सताया।
ककराला से करीब दो किलोमीटर दूर बसे आसपुर निवासी इदरीस के बेटे अमजद, बेटी इमराना, परवीन, सोनी, बहू मेराज, नाती फरहान, भतीजे राजा उर्फ हासिम, उसकी पत्नी नसरीन और परवीन की बेटी शमरीन और एक माह के बेटे की मौत हो गई थी। तीन दिन पहले 17 सितंबर को अमजद और मई बूचन के इकबाल की पुत्री नाजरीन का निकाह हुआ हुआ था।
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सोमवार आसपुर में शादी की दावत के बाद नाजरीन अपने मायके चली गई थी। मंगलवार को अमजद और उसके घरवाले नाजरीन की विदा कराकर अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में गभियाई गांव के पास उनकी कार नियंत्रित होकर रोड किनारे खड़े पेड़ से टकराने के बाद खाई में पलट गई।
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पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार आधी रात के सभी 10 शव आसपुर गांव ले जाए गए। इसका पता लगा तो बुधवार सुबह चार बजे से लोग आसपुर गांव में जमा होने लगे और सुबह होने तक हजारों की भीड़ जमा हो गई। ककराला और गौराई, मसूदपुरा, बिलहा, अलापुर, शखानू, इरौलिया, म्यायूं गबिया समेत करीब 50 गांवों के लोग मृतकों का अंतिम दीदार करने पहुंचे। मृतकों के घरों में मचे कोहराम से हर किसी का दिल दहल गया। सुबह करीब 11.30 बजे अमजद और उसके भतीजे फरहान का जनाजा कब्रिस्तान ले जाया गया। फिर दोपहर करीब दो बजे तक एक के बाद एक करके सभी को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान आने-जाने वालों का तांता लगा रहा।
जनाजे में कलेजे के टुकड़े जाते देख मां तसरीकन और पिता इदरीस बुरी तरह बिलख रहे थे। हर किसी की आंखों से आंसू थे।
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कई नेता पहुंचे ढाढ़स बंधाने
सपा जिलाध्यक्ष आशीष यादव पीड़ित परिवार को ढाढ़स बंधाने उनके घर पहुंचे। उन्होंने हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया। उनके साथ अशोक यादव, खालिद रजा, सुरेंद्र सिंह, चरन सिंह आदि रहे। इस दुख की घड़ी में पूर्व विधायक मुस्लिम खां भी सांत्वना देने इदरीस के घर पहुंचे। बसपा से विधानसभा पद पर प्रत्याशी रहे काजी रिजवान ने भी आसपुर जाकर पीड़ित परिवार को ढाढ़स बंधाया।
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कई थानों की पुलिस रही मौजूद
सुरक्षा के लिहाज से बुधवार को आसपुर गांव में अलापुर समेत कई थानों की पुलिस मौजूद रही। मृतकों के सुपुर्द-ए- खाक होने बाद पुलिस वाले चले गए। हालांकि कोई अधिकारी पीड़ित परिवार को सांत्वना देने नहीं पहुंचा।
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11 शव किए सुपुर्द के खाक
मृतकों में शामिल इदरीस की बेटी सोनी आठ माह की गर्भवती थी। उसका पोस्टमार्टम करने के दौरान डॉक्टरों ने देखा तो गर्भ में शिशु की मौत हो चुकी थी। सोनी का शव घर ले जाने पर शिशु का शव गर्भ से निकालकर अलग हो गया। उसे अलग कब्र बनाकर सुपुर्द ए खाक किया गया।
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दूसरे दिन भी दुर्घटना स्थल देखते रहे लोग
हादसे में एक ही परिवार के दस लोगों की मौत से पूरा जिला दहल उठा। बुधवार को हर इलाके में इसी की चर्चा रही। बुधवार दूसरे दिन भी दुर्घटना स्थल पर लोगों की भीड़ रही। उधर से गुजरने वाले राहगीर अपनी गाड़ी रोककर उस पेड़ जिससे कार टकराई थी और मौके पर बिखरा पड़ा सामान देखते रहे।
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रिश्तेदारों ने उतारे थे जेवर
मंगलवार को हादसे के बाद दुल्हन नाजरीन और अन्य महिलाओं के जेवर, दूल्हे अमजद की अंगूठी और पुरुषों की जेब से रुपये गायब थे। हादसे के समय उधर से गुजर रहे गालिब नाम के व्यक्ति ने अपने मोबाइल से वीडियो बना ली थी। वीडियो में दुल्हन नाजरीन पक्ष के रिश्तेदार मृतकों और घायलों के जेवर आदि उतारते दिख रहे हैं।