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गुरु पूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का सैलाब
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कछला गंगाघाट पर स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : BADAUN
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उझानी/कछला (बदायूं) गुरु पूर्णिमा पर बुधवार पूरे दिन गंगाघाट आस्था से सराबोर रहा। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर घाट पर पूजा- अर्चना की। भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य दिया गया और भंडारे भी हुए। घाट पर ही लगे मेले में खासी भीड़ नजर आई।
कछला गंगाघाट पर दूरदराज के श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला मंगलवार देर शाम ही शुरू हो गया। अधिकतर श्रद्धालु आश्रमों में ठहरे। तड़के ब्रह्म मुहूर्त में डुबकी लगाने का दौर शुरू हुआ, जो दोपहर बाद करीब तीन बजे तक चला। श्रद्धालुओं ने भीड़ सुबह में ज्यादा दिखी। इसके बाद घाट पर हर-हर गंगे गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाने के बाद सबसे पहले सूर्यदेव को अर्घ्य दिया फिर गुरुदेव की स्तुति और मंत्रोच्चार किया। घाट पर ही पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद वितरण किया गया। कई श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भोजन कराया। आश्रमों में धार्मिक अनुष्ठान हुए। संतों का पूजन भी किया गया। उन्हें दक्षिणा में अंगवस्त्र और मिष्ठान भेंट किया गया।
आचार्य प्रवीण दास महाराज ने बताया कि गुरु का पूजन करने से पहले गंगा स्नान का विशेष महत्व है। यह पूर्णिमा गुरु के प्रति आस्था से सराबोर है। उधर, मेले में महिलाओं ने शृंगार के सामान की खरीदारी की। बच्चों ने खेल-तमाशों का लुत्फ उठाया। कुष्ठ आश्रम में भी धार्मिक कार्यक्रम हुए।
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जलस्तर बढ़ा, संकेतक से आगे नहीं बढ़ने दिया श्रद्धालुओं को
तीन-चार दिनों से गंगा में जलस्तर बढ़ता जा रहा है। इलाके में हालांकि बारिश नहीं हुई है लेकिन पहाड़ की बारिश का पानी गंगा में पहुंचने से जलस्तर में वृद्धि के चलते नगर पंचायत प्रशासन ने एक दिन पहले ही गहराई वाले स्थान चिह्नित कर संकेतक लगा दिए थे। संकेतक के आसपास नावों पर गोताखोरों को तैनात किया गया था। गोताखारों ने संकेतक के आगे किसी भी श्रद्धालु को बढ़ने नहीं दिया। पुल के पास नावों पर पुलिस कर्मी भी ड्यूटी करते नजर आए।
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गंगाघाट पर आज से पूरे सावन उमड़ेंगे कांवड़िये
बृहस्पतिवार से सावन शुरू हो गया। सावन में भगवान भोलेनाथ के पूजन का खास महत्व माना गया है। सावन के प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है। जलाभिषेक से पहले गंगाघाट पर बरेली, बदायूं, पीलीभीत और लखीमपुर-खीरी समेत गंगा पार के जिलों में कासगंज, हाथरस और एटा के कांवड़िये जल भरने के लिए आते हैं। बृहस्पतिवार से कांवड़ यात्रा शुरू हो रही है। कांवड़ियों के रास्ते पर बम-बम भोले की गूंज भी हर रोज सुनाई देगी।
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कछला गंगाघाट पर दूरदराज के श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला मंगलवार देर शाम ही शुरू हो गया। अधिकतर श्रद्धालु आश्रमों में ठहरे। तड़के ब्रह्म मुहूर्त में डुबकी लगाने का दौर शुरू हुआ, जो दोपहर बाद करीब तीन बजे तक चला। श्रद्धालुओं ने भीड़ सुबह में ज्यादा दिखी। इसके बाद घाट पर हर-हर गंगे गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाने के बाद सबसे पहले सूर्यदेव को अर्घ्य दिया फिर गुरुदेव की स्तुति और मंत्रोच्चार किया। घाट पर ही पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद वितरण किया गया। कई श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भोजन कराया। आश्रमों में धार्मिक अनुष्ठान हुए। संतों का पूजन भी किया गया। उन्हें दक्षिणा में अंगवस्त्र और मिष्ठान भेंट किया गया।
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आचार्य प्रवीण दास महाराज ने बताया कि गुरु का पूजन करने से पहले गंगा स्नान का विशेष महत्व है। यह पूर्णिमा गुरु के प्रति आस्था से सराबोर है। उधर, मेले में महिलाओं ने शृंगार के सामान की खरीदारी की। बच्चों ने खेल-तमाशों का लुत्फ उठाया। कुष्ठ आश्रम में भी धार्मिक कार्यक्रम हुए।
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जलस्तर बढ़ा, संकेतक से आगे नहीं बढ़ने दिया श्रद्धालुओं को
तीन-चार दिनों से गंगा में जलस्तर बढ़ता जा रहा है। इलाके में हालांकि बारिश नहीं हुई है लेकिन पहाड़ की बारिश का पानी गंगा में पहुंचने से जलस्तर में वृद्धि के चलते नगर पंचायत प्रशासन ने एक दिन पहले ही गहराई वाले स्थान चिह्नित कर संकेतक लगा दिए थे। संकेतक के आसपास नावों पर गोताखोरों को तैनात किया गया था। गोताखारों ने संकेतक के आगे किसी भी श्रद्धालु को बढ़ने नहीं दिया। पुल के पास नावों पर पुलिस कर्मी भी ड्यूटी करते नजर आए।
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गंगाघाट पर आज से पूरे सावन उमड़ेंगे कांवड़िये
बृहस्पतिवार से सावन शुरू हो गया। सावन में भगवान भोलेनाथ के पूजन का खास महत्व माना गया है। सावन के प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है। जलाभिषेक से पहले गंगाघाट पर बरेली, बदायूं, पीलीभीत और लखीमपुर-खीरी समेत गंगा पार के जिलों में कासगंज, हाथरस और एटा के कांवड़िये जल भरने के लिए आते हैं। बृहस्पतिवार से कांवड़ यात्रा शुरू हो रही है। कांवड़ियों के रास्ते पर बम-बम भोले की गूंज भी हर रोज सुनाई देगी।