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महिला बंदी की मौत के मामले में लापरवाही नकारी
बदायूं, ब्यूरो
Updated Mon, 06 Feb 2017 11:43 PM IST
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अप्रैल 2014 में हुई थी जिला जेल में महिला बंदी की मौत
मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप पर मांगी गई थी रिपोर्ट
जिला जेल में महिला बंदी की मौत के मामले में सीएमओ कार्यालय ने शासन को आख्या भेज दी है। महिला बंदी की मौत अप्रैल 2014 में जिला जेल में हुई थी। मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप पर शासन ने पैनल बनाकर बंदी की बीमारी और इलाज से लेकर पोस्टमार्टम तक पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। पैनल ने जिला अस्पताल में महिला बंदी के इलाज के साथ हायर सेंटरों में इलाज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इसमें कहा गया है कि रामबेटी की मौत कैंसर की वजह से हुई है। उसका समुचित इलाज कराया गया। कैंसर एडवांस स्टेज पर पहुंच चुका था। ऐसे में महिला बंदी को बचाया नहीं जा सका। पैनल ने इलाज में लापरवाही की बात को नकार दिया है। महिला बंदी रामबेटी को उनके पति मोहर सिंह और बेटे के साथ 15 जुलाई 2013 को दहेज हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
मूसाझाग थाने के गांव बरसुनिया निवासी रामबेटी (55) पत्नी मोहर सिंह नौ अप्रैल 2014 को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार न होने पर आगरा और लखनऊ मेडिकल कॉलेज में भी इलाज कराया गया। इससे पहले मार्च 2014 में भी इलाज हायर सेंटर में हुआ था। रामबेटी की 19 अप्रैल को जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। रामबेटी के परिवार वालों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। इस मामले में मजिस्ट्रीयल जांच भी कराई गई। जेल में महिला बंदी की मौत का मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया था। दो साल से मामले में जांच चल रही है। शासन ने सीएमओ से महिला बंदी मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। इसके लिए सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा ने डॉ. आशू अग्रवाल, डॉ. आरएस यादव और डॉ. केके जौहरी का पैनल बनाया था।
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शासन ने महिला बंदी रामबेटी के मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। तीन डॉक्टर के पैनल से सभी पहलुओं की विस्तार से जांच कराई गई। जांच में पाया गया है कि महिला बंदी के इलाज में लापरवाही नहीं हुई थी। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।-डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ
मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप पर मांगी गई थी रिपोर्ट
जिला जेल में महिला बंदी की मौत के मामले में सीएमओ कार्यालय ने शासन को आख्या भेज दी है। महिला बंदी की मौत अप्रैल 2014 में जिला जेल में हुई थी। मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप पर शासन ने पैनल बनाकर बंदी की बीमारी और इलाज से लेकर पोस्टमार्टम तक पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। पैनल ने जिला अस्पताल में महिला बंदी के इलाज के साथ हायर सेंटरों में इलाज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इसमें कहा गया है कि रामबेटी की मौत कैंसर की वजह से हुई है। उसका समुचित इलाज कराया गया। कैंसर एडवांस स्टेज पर पहुंच चुका था। ऐसे में महिला बंदी को बचाया नहीं जा सका। पैनल ने इलाज में लापरवाही की बात को नकार दिया है। महिला बंदी रामबेटी को उनके पति मोहर सिंह और बेटे के साथ 15 जुलाई 2013 को दहेज हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
मूसाझाग थाने के गांव बरसुनिया निवासी रामबेटी (55) पत्नी मोहर सिंह नौ अप्रैल 2014 को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार न होने पर आगरा और लखनऊ मेडिकल कॉलेज में भी इलाज कराया गया। इससे पहले मार्च 2014 में भी इलाज हायर सेंटर में हुआ था। रामबेटी की 19 अप्रैल को जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। रामबेटी के परिवार वालों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। इस मामले में मजिस्ट्रीयल जांच भी कराई गई। जेल में महिला बंदी की मौत का मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया था। दो साल से मामले में जांच चल रही है। शासन ने सीएमओ से महिला बंदी मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। इसके लिए सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा ने डॉ. आशू अग्रवाल, डॉ. आरएस यादव और डॉ. केके जौहरी का पैनल बनाया था।
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शासन ने महिला बंदी रामबेटी के मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। तीन डॉक्टर के पैनल से सभी पहलुओं की विस्तार से जांच कराई गई। जांच में पाया गया है कि महिला बंदी के इलाज में लापरवाही नहीं हुई थी। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।-डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ
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