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जिले में लटक गया पुलिस का कंप्यूटरीकरण

Sat, 13 Dec 2014 12:15 AM IST
बदायूं।
बदायूं। Updated Sat, 13 Dec 2014 12:15 AM IST
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भले ही बदायूं वीआईपी जिलों में शुमार है लेकिन यहां क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) का सपना जल्द साकार होता नजर नहीं आ रहा। करीब एक साल पहले पुलिस महकमे के कंप्यूटरीकरण की कवायद शुरू जरूर हुई थी लेकिन यह कंप्यूटर, जनरेटर खरीद और इंटरनेट कनेक्शन तक ही सिमट कर रह गई। आलम यह है कि जिले के 22 थानों में कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं। कुछ थानों में तो कंप्यूटर ऑपरेटर्स की तैनाती जरूर हो गई है लेकिन यहां भी काम कंप्यूटर पर नहीं हो रहा।
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सीसीटीएनएस के तहत पुलिस महकमे को हाईटेक करने की योजना करीब दो साल पहले बनी थी। इसके तहत अपराधियों की निगरानी के साथ घर बैठे रिपोर्ट दर्ज कराने की सुविधा भी है। इतना ही नहीं सभी थानों का रिकार्ड भी ऑनलाइन रहेगा और एफआईआर भी कंप्यूटर पर ही दर्ज होगी। करीब एक साल पहले पुलिस महकमे के लिए 35 कंप्यूटर भी मिल गए। इन कंप्यूटर को थानों के अलावा, सीओ ऑफिस और एसएसपी, एएसपी के दफ्तरों में लगा भी दिया गया। पुलिस महकमे को इंटरनेट से जोड़ने के लिए थानों में इंटरनेट कनेक्शन भी हो गए। बिजली सप्लाई बंद होने की स्थिति में काम प्रभावित न हो इसके लिए सभी थानों को जनरेटर भी मुहैया करा दिए गए। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई धर्मेंद्र यादव बदायूं से सांसद हैं। ऐसे में माना जा रहा था कि बदायूं में पुलिस महकमा जल्द हाईटेक हो जाएगा लेकिन कुछ दिन चली यह कवायद अब ठहर सी गई है। पुलिस महकमे का कंप्यूटरीकरण लटक गया है। ऐसे में घर बैठे इंटरनेट से एफआईआर दर्ज कराने का सपना जल्द पूरा होता नहीं दिख रहा।
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सीसीटीएनएस के फायदे
- अलग-अलग जिलों में ऐसे गिरोह जो एक ही तरह से वारदात करते हैं। उन पर नजर रखना आसान होगा।
- घर बैठे कोई भी व्यक्ति इंटरनेट के जरिए शिकायत दर्ज करा सकेगा।
- सभी थानों और अपराधियों का रिकार्ड ऑन लाइन हो जाएगा।
- फरार अपराधियों को पकड़ने में असानी होगी। पुलिस के साथ पब्लिक की भाग दौड़ भी बचेगी।
सीसीटीएनएस पर काम चल रहा है। बदायूं तीसरे फेज में है। कुछ थानों में कंप्यूटर ऑपरेटर्स की तैनाती हो गई है। कुछ थानों में अभी कंप्यूटर ऑपरेटर्स की तैनाती होनी बाकी है। -लल्लन सिंह, एसपी सिटी/नोडल अधिकारी
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