{"_id":"576d6d724f1c1ba321b48694","slug":"umesh-yadav-cbi-started-investigating-the-kidnapping-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"उमेश यादव अपहरण कांड की सीबीआई जांच शुरू","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
उमेश यादव अपहरण कांड की सीबीआई जांच शुरू
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Fri, 24 Jun 2016 11:16 PM IST
विज्ञापन
अदालत का फैसला
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
- एजेंसी की लखनऊ अपराध शाखा ने चस्पा किए पंफलेट
इस्लामनगर थाने के गांव सिठौली निवासी उमेश यादव पुत्र चंद्रपाल यादव के मामले में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई ने पड़ताल शुरू कर दी है। मुकदमे से जुड़ा पूरा रिकार्ड कब्जे में लेने के बाद जांच एजेंसी की लखनऊ अपराध शाखा ने उमेश यादव संबंधी पंफलेट चस्पा कर दिए हैं। इस संबंध में लोगों से जानकारियां भी मांगी गई हैं।
इस्लामनगर थाने के गांव सिठौली निवासी उमेश यादव का गांव के ही मनफूल यादव से विवाद चल रहा था। कई साल पहले सिठौली के भूदेव ने अपनी 52 बीघा जमीन बेची थी। इसमें 26 बीघा जमीन उमेश के पिता चंद्रपाल ने खरीद ली। मनफूल पूरी जमीन खरीदना चाहता था। मनफूल चंद्रपाल से रंजिश मानने लगा। मनफूल का भाई रनवीर सिंह रिटायर्ड डिप्टी एसपी है। रुपये का इंतजाम न होने पर मनफूल ने 26 बीघा जमीन अपने बहनोई चरन सिंह निर्माण के नाम करा दी। चरन सिंह निर्माण के दामाद योगेश यादव उस समय आईजी बरेली के स्टाफ अफसर थे। नाते रिश्तेदारों की मदद से मनफूल ने पूरी 52 बीघा जमीन पर कब्जा कर लिया।
जमीन की इसी रंजिश में वर्ष 2002 में हुए खूनी संघर्ष में मनफूल पक्ष के रघुवीर की मौत हो गई। हत्या के आरोप में निचली अदालत ने चंद्रपाल और उसके बेटे उमेश को उम्रकैद की सजा सुनाई। बाद में दोनों को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। चंद्रपाल का बेटा उमेश यादव 31 जुलाई 2014 को लापता हो गया। उमेश की मां सत्यवती ने थाने में अपहरण का मुकदमा दर्ज कराने को तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की। बाद में पीड़ित पक्ष ने कोर्ट में परिवाद दाखिल किया। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर मामला अपहरण में तरमीम कर लिया।
विज्ञापन
मामले की विवेचना में मनफूल उसके बेटे अवधेश, विजय समेत गांव के ही मदन और लोचन के नाम प्रकाश में आए। इसी दौरान विवेचक का तबादला कर दिया गया। कार्रवाई न होने पर पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील की। कोर्ट ने फरवरी 2016 में मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। उमेश की मां सत्यवती गांव में अकेली रहती हैं। चंद्रपाल कई साल से मथुरा में अपने पुत्र गोपाल के साथ रहकर मेहनत मजदूरी करता है। सीबीआई जांच शुरू होने के बाद पीड़ित पक्ष को न्याय की उम्मीद जगी है।
कई पुलिस अफसरों पर जांच प्रभावित करने का आरोप
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मनफूल के कई रिश्तेदार पुलिस में बड़े पदों पर हैं। बदायूं में एसएसपी रहे सौमित्र यादव भी मनफूल के रिश्तेदार हैं। मनफूल का भाई रनवीर सिंह रिटायर्ड डिप्टी एसपी है। मनफूल के बहनोई चरन सिंह निर्माण का दामाद योगेश यादव डिप्टी एसपी है। कई अन्य रिश्तेदार भी पुलिस में बड़े पदों पर होने की वजह से यह लोग जांच को प्रभावित करते रहे।
इस्लामनगर थाने के गांव सिठौली निवासी उमेश यादव पुत्र चंद्रपाल यादव के मामले में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई ने पड़ताल शुरू कर दी है। मुकदमे से जुड़ा पूरा रिकार्ड कब्जे में लेने के बाद जांच एजेंसी की लखनऊ अपराध शाखा ने उमेश यादव संबंधी पंफलेट चस्पा कर दिए हैं। इस संबंध में लोगों से जानकारियां भी मांगी गई हैं।
इस्लामनगर थाने के गांव सिठौली निवासी उमेश यादव का गांव के ही मनफूल यादव से विवाद चल रहा था। कई साल पहले सिठौली के भूदेव ने अपनी 52 बीघा जमीन बेची थी। इसमें 26 बीघा जमीन उमेश के पिता चंद्रपाल ने खरीद ली। मनफूल पूरी जमीन खरीदना चाहता था। मनफूल चंद्रपाल से रंजिश मानने लगा। मनफूल का भाई रनवीर सिंह रिटायर्ड डिप्टी एसपी है। रुपये का इंतजाम न होने पर मनफूल ने 26 बीघा जमीन अपने बहनोई चरन सिंह निर्माण के नाम करा दी। चरन सिंह निर्माण के दामाद योगेश यादव उस समय आईजी बरेली के स्टाफ अफसर थे। नाते रिश्तेदारों की मदद से मनफूल ने पूरी 52 बीघा जमीन पर कब्जा कर लिया।
विज्ञापन
जमीन की इसी रंजिश में वर्ष 2002 में हुए खूनी संघर्ष में मनफूल पक्ष के रघुवीर की मौत हो गई। हत्या के आरोप में निचली अदालत ने चंद्रपाल और उसके बेटे उमेश को उम्रकैद की सजा सुनाई। बाद में दोनों को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। चंद्रपाल का बेटा उमेश यादव 31 जुलाई 2014 को लापता हो गया। उमेश की मां सत्यवती ने थाने में अपहरण का मुकदमा दर्ज कराने को तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की। बाद में पीड़ित पक्ष ने कोर्ट में परिवाद दाखिल किया। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर मामला अपहरण में तरमीम कर लिया।
विज्ञापन
मामले की विवेचना में मनफूल उसके बेटे अवधेश, विजय समेत गांव के ही मदन और लोचन के नाम प्रकाश में आए। इसी दौरान विवेचक का तबादला कर दिया गया। कार्रवाई न होने पर पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील की। कोर्ट ने फरवरी 2016 में मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। उमेश की मां सत्यवती गांव में अकेली रहती हैं। चंद्रपाल कई साल से मथुरा में अपने पुत्र गोपाल के साथ रहकर मेहनत मजदूरी करता है। सीबीआई जांच शुरू होने के बाद पीड़ित पक्ष को न्याय की उम्मीद जगी है।
कई पुलिस अफसरों पर जांच प्रभावित करने का आरोप
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मनफूल के कई रिश्तेदार पुलिस में बड़े पदों पर हैं। बदायूं में एसएसपी रहे सौमित्र यादव भी मनफूल के रिश्तेदार हैं। मनफूल का भाई रनवीर सिंह रिटायर्ड डिप्टी एसपी है। मनफूल के बहनोई चरन सिंह निर्माण का दामाद योगेश यादव डिप्टी एसपी है। कई अन्य रिश्तेदार भी पुलिस में बड़े पदों पर होने की वजह से यह लोग जांच को प्रभावित करते रहे।