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रंजिश का बदला लेने को दांव पर आबरू
badaun
Updated Sat, 09 May 2015 07:26 PM IST
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रंजिश का बदला लेने को अब आबरू भी दांव पर लगाई जाने लगी है। इसके लिए धारा 376 को हथियार बनाया जा रहा है। रेप और गैंगरेप के तमाम मामलों में जांच के बाद यह बात सामने आ रही है। उघैती में दो सिपाहियों समेत पांच लोगों पर लगा गैंगरेप का आरोप। रंजिशन दुष्कर्म के आरोपों के मामलों से समाज शर्मसार हो रहा है। चार महीने में जिले में रेप-गैंगरेप के 29 मामले दर्ज हुए। इनमें कुछ को छोड़ दिया जाए तो बाकी मामलों में प्रथम दृष्टया रेप की पुष्टि नहीं हुई।
दिल्ली के निर्भया कांड के बाद सरकार ने दुष्कर्म के कानूनों को सख्त कर दिया। सख्त कानून का दुरुपयोग होना भी लाजिमी है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले साल जिले में रेप-गैंगरेप के 49 मामले दर्ज हुए। इस साल चार महीने में 29 मामले दर्ज हो चुके हैं। हर महीने औसतन दुष्कर्म के सात मामले दर्ज हो रहे हैं। बच्चियों से दुष्कर्म की वारदातों को छोड़ दें तो ज्यादातर ऐसे मामले हैं जिनमें जोर-जबरदस्ती की पुष्टि नहीं हुई। सिविल लाइंस, उघैती और बिल्सी थानों में दर्ज दुष्कर्म के इस साल दर्ज हुए तीन मामलों में पुलिस एफआर लगा चुकी है। रेप की तीनों घटनाओं के पीछे रंजिश थी। यहां भी विरोधियों को जेल भेजने के लिए धारा 376 को हथियार बनाकर आबरू को दांव पर लगाया गया। चार महीने में दर्ज 29 रेप के मामलों में अफसर भी कई को फर्जी मान रहे हैं, लेकिन सच ट्रायल या जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।
केस -1
उघैती के एक गांव की महिला ने थाने के दो सिपाहियों समेत पांच लोगों पर गैंगरेप का आरोप लगाया था। रिपोर्ट दर्ज हुई। महिला को मेडिकल के लिए भिजवाया गया तो उसने मेडिकल से इंकार कर दिया। बाद में इस महिला ने 164 के बयान में भी दुष्कर्म होने की बात से इंकार कर दिया।
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केस-2
सितंबर 2014 में सिविल लाइंस थाने के एक मोहल्ले में दलित किशोरी ने विषाक्त खा लिया था। परिवार वालों ने मोहल्ले के ही तीन लोगों पर आरोप लगाया कि दुष्कर्म के बाद उसे विषाक्त खिला दिया गया। पोस्टमार्टम में रेप की पुष्टि नहीें हुई। जांच में मामला फर्जी पाया गया।
केस-3
अलापुर थाने के एक गांव की दलित किशोरी ने मीन मई को दो सगे भाइयों पर गैंगरेप का आरोप लगाया। मुकदमा दर्ज हो गया। मेडिकल में प्रथम दृष्टया दुष्कर्म होने की पुष्टि नहीं हुई। पुलिस भी अब इस मामले को संदिग्ध मान रही है। मामला आपसी रंजिश का पाया जा रहा है।
केस- चार
उझानी थाने की एक 22 वर्षीय विवाहिता ने आठ मई को गांव के ही युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगाया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवाहिता को मेडिकल के लिए भेजा। यहां आकर महिला दुष्कर्म की बात से मुकर गई। उसने कहा कि पति के कहने पर उसने यह आरोप लगाया।
महिला बोली, पति ने लगवाया रेप का आरोप
मेडिकल को पहुंची, मीडिया के सामने आरोप से मुकरी
बदायूं। रेप का आरोप लगाने वाली महिला मुकर गई है। महिला ने पति के कहने पर गांव के युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। मेडिकल में भी महिला के साथ प्रथम दृष्टया रेप की पुष्टि नहीं हुई है।
बिनावर के एक गांव ब्याही महिला का उझानी के एक गांव में मायका है। वह अपने मायके आई हुई थी। महिला के पति ने आरोप लगाया था कि वह शुक्रवार तड़के पांच बजे खेत पर शौच को गई थी। वहां गांव के शिशुपाल ने उसके साथ रेप किया। पुलिस ने शिशुपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। शुक्रवार शाम महिला का मेडिकल हुआ। मेडिकल में रेप की पुष्टि नहीं हुई। इधर महिला से जब मीडिया ने बात की तो वह रेप की बात से मुकर गई। महिला का कहना है कि उसका पति दुष्कर्म का आरोप लगवा रहा है। शिशुपाल ने उसको पकड़ा जरूर था, लेकिन उसके साथ बुरा काम नहीं किया।
यह कहना गलत नहीं होगा कि दुष्कर्म के तमाम मामले रंजिश का बदला लेने के लिए दर्ज कराए जाते हैं। जांच में सच सामने आ जाता है। रेप की घटनाएं बढ़ने के पीछे एक वजह रंजिश का बदला लेना भी है। -सौमित्र यादव, एसएसपी
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दिल्ली के निर्भया कांड के बाद सरकार ने दुष्कर्म के कानूनों को सख्त कर दिया। सख्त कानून का दुरुपयोग होना भी लाजिमी है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले साल जिले में रेप-गैंगरेप के 49 मामले दर्ज हुए। इस साल चार महीने में 29 मामले दर्ज हो चुके हैं। हर महीने औसतन दुष्कर्म के सात मामले दर्ज हो रहे हैं। बच्चियों से दुष्कर्म की वारदातों को छोड़ दें तो ज्यादातर ऐसे मामले हैं जिनमें जोर-जबरदस्ती की पुष्टि नहीं हुई। सिविल लाइंस, उघैती और बिल्सी थानों में दर्ज दुष्कर्म के इस साल दर्ज हुए तीन मामलों में पुलिस एफआर लगा चुकी है। रेप की तीनों घटनाओं के पीछे रंजिश थी। यहां भी विरोधियों को जेल भेजने के लिए धारा 376 को हथियार बनाकर आबरू को दांव पर लगाया गया। चार महीने में दर्ज 29 रेप के मामलों में अफसर भी कई को फर्जी मान रहे हैं, लेकिन सच ट्रायल या जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।
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केस -1
उघैती के एक गांव की महिला ने थाने के दो सिपाहियों समेत पांच लोगों पर गैंगरेप का आरोप लगाया था। रिपोर्ट दर्ज हुई। महिला को मेडिकल के लिए भिजवाया गया तो उसने मेडिकल से इंकार कर दिया। बाद में इस महिला ने 164 के बयान में भी दुष्कर्म होने की बात से इंकार कर दिया।
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केस-2
सितंबर 2014 में सिविल लाइंस थाने के एक मोहल्ले में दलित किशोरी ने विषाक्त खा लिया था। परिवार वालों ने मोहल्ले के ही तीन लोगों पर आरोप लगाया कि दुष्कर्म के बाद उसे विषाक्त खिला दिया गया। पोस्टमार्टम में रेप की पुष्टि नहीें हुई। जांच में मामला फर्जी पाया गया।
केस-3
अलापुर थाने के एक गांव की दलित किशोरी ने मीन मई को दो सगे भाइयों पर गैंगरेप का आरोप लगाया। मुकदमा दर्ज हो गया। मेडिकल में प्रथम दृष्टया दुष्कर्म होने की पुष्टि नहीं हुई। पुलिस भी अब इस मामले को संदिग्ध मान रही है। मामला आपसी रंजिश का पाया जा रहा है।
केस- चार
उझानी थाने की एक 22 वर्षीय विवाहिता ने आठ मई को गांव के ही युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगाया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवाहिता को मेडिकल के लिए भेजा। यहां आकर महिला दुष्कर्म की बात से मुकर गई। उसने कहा कि पति के कहने पर उसने यह आरोप लगाया।
महिला बोली, पति ने लगवाया रेप का आरोप
मेडिकल को पहुंची, मीडिया के सामने आरोप से मुकरी
बदायूं। रेप का आरोप लगाने वाली महिला मुकर गई है। महिला ने पति के कहने पर गांव के युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। मेडिकल में भी महिला के साथ प्रथम दृष्टया रेप की पुष्टि नहीं हुई है।
बिनावर के एक गांव ब्याही महिला का उझानी के एक गांव में मायका है। वह अपने मायके आई हुई थी। महिला के पति ने आरोप लगाया था कि वह शुक्रवार तड़के पांच बजे खेत पर शौच को गई थी। वहां गांव के शिशुपाल ने उसके साथ रेप किया। पुलिस ने शिशुपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। शुक्रवार शाम महिला का मेडिकल हुआ। मेडिकल में रेप की पुष्टि नहीं हुई। इधर महिला से जब मीडिया ने बात की तो वह रेप की बात से मुकर गई। महिला का कहना है कि उसका पति दुष्कर्म का आरोप लगवा रहा है। शिशुपाल ने उसको पकड़ा जरूर था, लेकिन उसके साथ बुरा काम नहीं किया।
यह कहना गलत नहीं होगा कि दुष्कर्म के तमाम मामले रंजिश का बदला लेने के लिए दर्ज कराए जाते हैं। जांच में सच सामने आ जाता है। रेप की घटनाएं बढ़ने के पीछे एक वजह रंजिश का बदला लेना भी है। -सौमित्र यादव, एसएसपी