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भूमाफिया की लगी ‘नजर’ तो सूख गई झील, होने लगे कब्जे

Thu, 27 Jun 2019 02:20 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 27 Jun 2019 02:20 AM IST
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भूमाफिया की लगी ‘नजर’ तो सूख गई झील, होने लगे कब्जे
कादरचौक (बदायूं)। क्षेत्र के नूरपुर क्षेत्र में फैली झील खुद का अस्तित्व खो रही है। पानी न होने के कारण झील के सूख जाने से क्षेत्र में जल का संकट भी गहरा गहराने लगा है। भूमाफिया ने धीरे-धीरे झील को समतल करके इस पर कब्जा कर लिया। 2011 में अधिकारियों ने इसके लिए पक्षी विहार का प्रस्ताव बनाकर भेजा था, लेकिन वह आज तक परवान नहीं चढ़ सका।
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क्षेत्र के गांव लालूपुर, नगरिया, भोजपुर, नरायनपुर गढ़िया, मुतालिका, नूरपुर, चौडेरा, मामूरगंज समेत अन्य छह ग्राम पंचायतों के 140 हेक्टेयर रकबे में झील फैली हुई है। तत्कालीन डीएम शंभूनाथ ने झील के सौंदर्यीकरण के प्रयास भी किए। उन्होंने झील का निरीक्षण कर तहसील प्रशासन से झील के रकबे को नपवाकर बाढ़ खंड को झील की पत्रावली सौंपी थी। झील का प्रस्ताव बनाकर सौंदर्यीकरण की जिम्मेदारी बाढ़ खंड की थी, जिसमें झील की खुदाई, पानी रोकने व पानी भरने की व्यवस्था, साइडों में इंटरलाकिंग, पार्किंग आदि की व्यवस्था के लिये प्रोजेक्ट तैयार होना था। डीएम के तबादले के बाद में अन्य अधिकारी, कर्मचारियों ने इस ओर ध्यान देना बंद कर दिया। इसका फायदा भूमाफिया को मिला। उन्होंने इस पर नजरें गड़ा दीं और धीरे-धीरे इस पर कब्जा कर लिया। तत्कालीन बीडीओ सुभाष नेमा ने 2011 में इस झील को पक्षी विहार बनाने का प्रस्ताव भी भेजा था, क्योंकि उस वक्त झील अपने चरम पर थी। यहां पर कई प्रजातियों के पशु-पक्षी आते जाते थे।
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कब्जा धारकों पर हो चुका है मुकदमा, फिर भी नहीं आए बाज
-भूमाफिया ने झील पर धीरे धीरे कब्जा किया, पहले उन पर खेती की, बाद में निर्माण कार्य तक शुरू करा दिया। शिकायतें होने के बाद में प्रशासन ने अवैध कब्जा धारकों के खिलाफ अभियान चलाया। इसमें कई कब्जेदारों पर मुकदमा लिखा गया। इसके बावजूद भी कब्जेदार नहीं सुधरे, उन्होंने बाद में फिर से कब्जा करना शुरू कर दिया।
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कई बार अधिकारी मौके आए, झील के सौंदर्यीकरण की बात हुई, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं हुआ। अगर झील दोबारा पुनर्जीवित हो जाए, तो सैकड़ों गांव का जलस्तर सुधर सकता है।
-आले हसन, ग्रामीण

झील में जब पानी भरपूर था, तब इसमें कमल के फूल खिलते थे। झील की वजह से आसपास के गांव में पानी की स्थिति बहुत अच्छी थी, लेकिन जब से झील सूख गई, तब से आसपास में पानी का संकट बनने लगा है।
-अत्तन मियां, पूर्व प्रधान

पक्षी बिहार बनाए जाने के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। ये मामला काफी पुराना है। हालांकि झील की खुदाई करवाने के लिए डीएम को पत्र से माध्यम से अवगत कराया गया है।

-पारस नाथ मौर्य, एसडीएम सदर

इस झील को बेहतर बनाने लिए प्रस्ताव गया है या नहीं, इसके बारे में जानकारी नहीं है। ये काफी पुरानी बात है। इसको दिखवाने के बाद ही कुछ कह पाना संभव होगा।
- दीपक कुमार शर्मा, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड
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