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पेंपल गांव में पुलिस के डर से ताले लगाकर ग्रामीण भागे
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पेंपल गांव में सुनसान गली। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। वजीरगंज थाना क्षेत्र के पेंपल गांव में अपहरण के बाद युवक की हत्या और पुलिस से मारपीट व पथराव के बाद दहशत बनी हुई है। गांव के अधिकतर लोग अपने घरों पर ताला डालकर भाग गए हैं। ऐसे में कई घरों में रक्षाबंधन का पर्व तक नहीं मनाया जा सका।
पेंपल गांव के 20 वर्षीय सुखवीर की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। जब छह अगस्त को उसका क्षतविक्षत शव पड़ा मिला तो ग्रामीण पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए आक्रोशित हो गए थे। उन्होंने पुलिस टीम पर पथराव कर दिया था। जिसमें एक एसओ समेत दो पुलिस कर्मी जख्मी हो गए थे। 16 लोगों को नामजद और 100 अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
गांव की महिलाओं के मुताबिक 10 अगस्त को सुखवीर का दसवां संस्कार था लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने उसके तीन भाइयों समेत 12 लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।
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इसके अलावा गांव की महिलाओं ने पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। एक महिला का कहना था कि पुलिस ने आकर मारपीट भी की, जिससे एक महिला घायल हो गई। जिले के अधिकतर लोगों ने रक्षाबंधन का त्योहार मनाया। बहनों ने अपने भाइयों के राखी बांधी थी लेकिन पेंपल गांव में कुछ घरों को छोड़कर पूरे गांव में रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मनाया गया।
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अज्ञात में लिखी एफआईआर से ज्यादा दहशत
पुलिस ने पेंपल गांव के 16 नामजद और सौ अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन सोलह नामजदों में से चार लोग जेल भेजे जा चुके हैं जबकि आठ लोग अज्ञात वाले जेल गए हैं। जो अन्य नामजद हैं, वे पुलिस के डर से भाग गए हैं। ग्रामीणों को डर है कि पुलिस उन्हें अज्ञात में नामजद करके जेल भेज देगी। इससे और ज्यादा डर बना हुआ है।
पेंपल गांव के केवल उन्हीं लोगों को नामजद कराया गया, जो लोग वीडियो फुटेज में दिखाई दे रहे थे और प्रकाश में आए हैं। आगे उन्हीं लोगों पर कार्रवाई होगी। इसमें और जो लोग भी प्रकाश में आते जा रहे हैं, उन पर कार्रवाई हो रही है। जिस महिला ने मारपीट करने का आरोप लगाया है। उसको एक माह पहले चोट लगी थी। उसके टांके भी लगे थे। अब जिन्होंने पुलिस से मारपीट की है, पथराव किया है, वे पुलिस से बचेंगे ही। वे रक्षाबंधन क्यों नहीं मना रहे हैं या आजादी के जश्न में शामिल क्यों नहीं हो रहे, इस पर हम क्या कह सकते हैं।
- सिद्धार्थ वर्मा, एसपी देहात
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पेंपल गांव के 20 वर्षीय सुखवीर की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। जब छह अगस्त को उसका क्षतविक्षत शव पड़ा मिला तो ग्रामीण पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए आक्रोशित हो गए थे। उन्होंने पुलिस टीम पर पथराव कर दिया था। जिसमें एक एसओ समेत दो पुलिस कर्मी जख्मी हो गए थे। 16 लोगों को नामजद और 100 अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
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गांव की महिलाओं के मुताबिक 10 अगस्त को सुखवीर का दसवां संस्कार था लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने उसके तीन भाइयों समेत 12 लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।
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इसके अलावा गांव की महिलाओं ने पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। एक महिला का कहना था कि पुलिस ने आकर मारपीट भी की, जिससे एक महिला घायल हो गई। जिले के अधिकतर लोगों ने रक्षाबंधन का त्योहार मनाया। बहनों ने अपने भाइयों के राखी बांधी थी लेकिन पेंपल गांव में कुछ घरों को छोड़कर पूरे गांव में रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मनाया गया।
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अज्ञात में लिखी एफआईआर से ज्यादा दहशत
पुलिस ने पेंपल गांव के 16 नामजद और सौ अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन सोलह नामजदों में से चार लोग जेल भेजे जा चुके हैं जबकि आठ लोग अज्ञात वाले जेल गए हैं। जो अन्य नामजद हैं, वे पुलिस के डर से भाग गए हैं। ग्रामीणों को डर है कि पुलिस उन्हें अज्ञात में नामजद करके जेल भेज देगी। इससे और ज्यादा डर बना हुआ है।
पेंपल गांव के केवल उन्हीं लोगों को नामजद कराया गया, जो लोग वीडियो फुटेज में दिखाई दे रहे थे और प्रकाश में आए हैं। आगे उन्हीं लोगों पर कार्रवाई होगी। इसमें और जो लोग भी प्रकाश में आते जा रहे हैं, उन पर कार्रवाई हो रही है। जिस महिला ने मारपीट करने का आरोप लगाया है। उसको एक माह पहले चोट लगी थी। उसके टांके भी लगे थे। अब जिन्होंने पुलिस से मारपीट की है, पथराव किया है, वे पुलिस से बचेंगे ही। वे रक्षाबंधन क्यों नहीं मना रहे हैं या आजादी के जश्न में शामिल क्यों नहीं हो रहे, इस पर हम क्या कह सकते हैं।
- सिद्धार्थ वर्मा, एसपी देहात