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कथावाचक पर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का आरोप, उठा ले गई पुलिस
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बदायूं। पिछले छह दिन से लाही फरीदपुर गांव में भागवत कथा कर रहे कथावाचक को पुलिस ठगी के आरोप में उठाकर ले गई। शनिवार को कथा का समापन होना था और भंडारे का भी आयोजन था। कथा वाचक को थाने ले जाने से सारे इंतजाम धरे रह गए। गांव के तमाम लोग थाने पहुंच गए। दोपहर बाद तक थाने में लोगों का जमावड़ा लगा रहा। उनमें फैसले की बात चल रही है।
कुंवरगांव थाना क्षेत्र के गांव लाही फरीदपुर में शिव मंदिर पर चार फरवरी से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। रोजाना सुबह शाम मैनपुरी जिले से आए कथावाचक कथा सुना रहे हैं। शनिवार को कथा का समापन होना था। इस पर भंडारे का आयोजन किया गया। शुक्रवार शाम से भोजन बनाने की तैयारियां चल रहीं थीं। इसी दौरान शनिवार को लाही फरीदपुर निवासी रामदास थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि तीन साल पहले कथावाचक उनके घर आए थे। तब उन्होंने उनकी बेटी को नौकरी दिलाने के नाम पर 50 हजार रुपये लिए थे।
उसके बाद कथावाचक ने न तो नौकरी दिलाई और न ही रुपये वापस लौटाए। अब कथावाचक उनके गांव में आए तब उन्होंने पुलिस को तहरीर दी है। इस पर थाना पुलिस गांव पहुंची और कथावाचक को उठाकर थाने ले गई। इससे लाही गांव में भंडारे का आयोजन भी नहीं हुआ। सारी तैयारियां धरी रह गईं। गांव के तमाम लोग थाने पहुंच गए। दोपहर बाद तक पुलिस ने कथावाचक को नहीं छोड़ा। बताया जा रहा है कि दोनों पक्ष फैसले की बात कर रहे हैं। शाम तक उनके बीच फैसला नहीं हो पाया। तब तक कथावाचक थाने में बैठे रहे। संवाद
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कुंवरगांव थाना क्षेत्र के गांव लाही फरीदपुर में शिव मंदिर पर चार फरवरी से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। रोजाना सुबह शाम मैनपुरी जिले से आए कथावाचक कथा सुना रहे हैं। शनिवार को कथा का समापन होना था। इस पर भंडारे का आयोजन किया गया। शुक्रवार शाम से भोजन बनाने की तैयारियां चल रहीं थीं। इसी दौरान शनिवार को लाही फरीदपुर निवासी रामदास थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि तीन साल पहले कथावाचक उनके घर आए थे। तब उन्होंने उनकी बेटी को नौकरी दिलाने के नाम पर 50 हजार रुपये लिए थे।
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उसके बाद कथावाचक ने न तो नौकरी दिलाई और न ही रुपये वापस लौटाए। अब कथावाचक उनके गांव में आए तब उन्होंने पुलिस को तहरीर दी है। इस पर थाना पुलिस गांव पहुंची और कथावाचक को उठाकर थाने ले गई। इससे लाही गांव में भंडारे का आयोजन भी नहीं हुआ। सारी तैयारियां धरी रह गईं। गांव के तमाम लोग थाने पहुंच गए। दोपहर बाद तक पुलिस ने कथावाचक को नहीं छोड़ा। बताया जा रहा है कि दोनों पक्ष फैसले की बात कर रहे हैं। शाम तक उनके बीच फैसला नहीं हो पाया। तब तक कथावाचक थाने में बैठे रहे। संवाद
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