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Budaun News: प्रश्नोत्तरी में अथर्व ने मारी बाजी, वंशिका दूसरे स्थान पर रहीं
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उझानी में जागरुक शिविर को संबोधित करतीं अपरन जिला जज शिव कुमारी। स्रोत:स्वयं
बदायूं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का विधिक साक्षरता एवं जागरुकता शिविर मंगलवार को उझानी में आयोजित किया गया। शिविर का शुभारंभ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिव कुमारी ने किया।
विद्यालय के छात्र-छात्राओं की चार टीमें गठित कर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें अथर्व ने पहला व वंशिका कुमारी ने दूसरा स्थान पाया। तीसरे, चौथे, पांचवें व छठे स्थान पर क्रमश: प्रियांशी कुमारी, आराध्या शर्मा, जिज्ञासा कुमारी व अक्षित जैन रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शिव कुमारी ने प्रस्शति-पत्र व प्रतीक चिन्ह देकर छात्र व छात्राओं को सम्मानित किया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिव कुमारी ने कहा कि शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने संबंधी कानून के लागू होने से स्वतंत्रता के छः दशक बाद बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का सपना साकार हुआ है। यह कानून एक अप्रैल, 2010 से लागू हुआ, इससे बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 नाम दिया गया है।
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इस अधिनियम के लागू होने से छह से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को अपने नजदीकी विद्यालय में निःशुल्क तथा अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा पाने का कानूनी अधिकार मिला हुआ है। इस अधिनियम की खास बात यह है कि गरीब परिवार के वे बच्चे, जो प्राथमिक शिक्षा से वंचित हैं, के लिए निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान रखा गया है। शिविर में छात्र छात्राओं को जागरूक किया गया। इस मौके पर संबंधित अधिकारी व कर्मचारी व स्कूल का स्टाफ मौजूद रहा।
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विद्यालय के छात्र-छात्राओं की चार टीमें गठित कर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें अथर्व ने पहला व वंशिका कुमारी ने दूसरा स्थान पाया। तीसरे, चौथे, पांचवें व छठे स्थान पर क्रमश: प्रियांशी कुमारी, आराध्या शर्मा, जिज्ञासा कुमारी व अक्षित जैन रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शिव कुमारी ने प्रस्शति-पत्र व प्रतीक चिन्ह देकर छात्र व छात्राओं को सम्मानित किया।
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिव कुमारी ने कहा कि शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने संबंधी कानून के लागू होने से स्वतंत्रता के छः दशक बाद बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का सपना साकार हुआ है। यह कानून एक अप्रैल, 2010 से लागू हुआ, इससे बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 नाम दिया गया है।
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इस अधिनियम के लागू होने से छह से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को अपने नजदीकी विद्यालय में निःशुल्क तथा अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा पाने का कानूनी अधिकार मिला हुआ है। इस अधिनियम की खास बात यह है कि गरीब परिवार के वे बच्चे, जो प्राथमिक शिक्षा से वंचित हैं, के लिए निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान रखा गया है। शिविर में छात्र छात्राओं को जागरूक किया गया। इस मौके पर संबंधित अधिकारी व कर्मचारी व स्कूल का स्टाफ मौजूद रहा।