फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Aril river and pond Surprisingly dwindle

अरिल नदी और तालाब सूखना हैरानी की बात

Mon, 15 Feb 2016 08:21 PM IST
दातागंज (बदायूं)
दातागंज (बदायूं) Updated Mon, 15 Feb 2016 08:21 PM IST
विज्ञापन

विज्ञापन
 अरिल नदी और क्षेत्र के अधिकांश तालाब सर्दी के मौसम में ही सूख रहे हैं। रामंगगा का भी फांट (चौड़ाई) सिमटता जा रहा है। मौसम का परिवर्तन आपदा का पूर्व संकेत तो नहीं? ये सोचकर ही लोग चिंतित हो रहे हैं। मुख्य तौर पर जब गर्मी के मौसम में तेज लू-लपट चलती, तब छोटे-मोटे तालाब सूख जाते थे। पशुओं खासकर वन्य जीवों को पीने के पानी का एक मात्र सहारा रामगंगा और अरिल नदी ही रहती थी, लेकिन अब दोनों सूख रहे हैं, तो गर्मियों में इन जीवों को अपनी जान बचाना मुश्किल पड़ जाएगा।  इधर, प्रशासन का कहना है कि सूखे तालाबों में पानी की व्यवस्था समय से की जाएगी।
फरवरी के दूसरे सप्ताह से ही मौसम में परिवर्तन दिख रहा है। लोग भी इस बात को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि मौसम के बदले इस मिजाज का रबी फसलों पर असर पड़ेगा। गंभीर स्थिति सामने आ सकती है। बरेली जिले से आती अरिल नदी जो कि क्षेत्र के गांव पापड़ होकर गुजर रही है, वह इस समय अपना अस्तित्व ही खो चुकी है। यह नदी सूख गई है। यह भी पहली बार देखने में आया है। खासतौर से पापड़ के पास पुल के नीचे पानी कभी नहीं सूखता था। वर्तमान में नदी के स्थान पर पशुओं का चारागाह बन गया है। इसके अलावा गांव बजर मेरी, ढका, दयौरारा, समरेर आदि स्थित दर्जनों गांवों में बड़े-बड़े तालाब कागजों में हैं, लेकिन मौके पर अपवाद छोड़कर सभी तालाबों पर फसलें खड़ीं हुईं हैं। लोगों का कहना है कि जब ठंड के समय में यह तालाब और नदी सूख गए हैं, तो भीषण गर्मी और लू चलेगी तब हालात क्या होंगे?
विज्ञापन

सबसे खराब स्थिति पशुओं की रहेगी। पालतू पशुओं की तो प्यास किसी तरह बुझा ली जाएगी, लेकिन वन्य जीव अपनी प्यास कैसे बुझाएंगे? ये चिंता का विषय है। बता दें कि क्षेत्र में हडौरा, नवीगंज, बसेला और कटरी आदि क्षेत्र में हजारों बीघा का वन क्षेत्र है। इनमें हजारों की संख्या में नीलगाय, हिरन, खरगोश आदि वन्यजीव विचरते हैं। इनके सामने पानी का संकट आएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

-----
हमारे जिले में वाटर लेबल काफी नीचे चला गया है, जो आने वाली पीढ़ी के लिए शुभ संकेत नहीं है। उसकी वजह है कि कई वर्षों से उतनी बरसात नहीं हुई है, जितनी होनी चाहिए। जलस्तर को ठीक करने के लिए हर नागरिक को जागरूक होना होगा। हर किसी को यह प्रयास करना चाहिए कि वह व्यर्थ में पानी को न बहाए। बरसात के दिनों में छतों से जाने वाले पानी को गड्ढा खोदकर जमीन के अंदर पहंचाएं, इससे वाटरलेवल में सुधार आ सकेगा।

- राधेश्याम बिलाटिया, विज्ञान शिक्षक
-----
यह सही है कि वर्षा कम होने से वाटर लेबल लगातार गिर रहा है। तालाबों और नदियों का सूखना चिंताजनक है। प्रशासन की इस पर नजर है। तालाबों में पानी भरने का प्रयास किया जाएगा।
-ओपी तिवारी,एसडीएम दातागंज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed