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फसलें बर्बादः बाढ़ में डूबे किसानों के अरमान

Sat, 30 Oct 2021 12:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 30 Oct 2021 12:48 AM IST
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agricultural,Aspirations of farmers submerged in flood
बाढ़ के पानी डूबी धान की फसल। संवाद - फोटो : BADAUN
उझानी/कछला/बदायूं। पिछले दिनों बारिश और आंधी के बाद मैदानी क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका ने जिले के किसानों की फसलों के साथ उनके अरमानों पर भी पानी फेर दिया है। सैकड़ों बीघा रकबे में खड़ी धान, उड़द और सरसों की फसलों को काफी नुकसान हुआ है।
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इस बार धान और उड़द से अच्छी पैदावार की उम्मीद में अनगिनत किसान अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ दिवाली भी अच्छे तरीके से मनाने के सपने संजोए थे। ऐसे में अधिकतर किसानों के घरों में दिवाली की मिठास घुलने की आस पूरी होती नजर नहीं आ रही।
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गंगा में आई बाढ़ से ज्यादा नुकसान रामगंगा व गंगा किनारे के गांवों के किसानों को हुआ है। पिछले सप्ताह गंगा का जो रूप दिखा, उसने सैकड़ों बीघा रकबे में धान और उड़द और सरसों की फसलों को अपने आगोश में समेट लिया। गंगा का जलस्तर कम होने के बाद जहां भी पानी सूखा, उन खेतों में धान और उड़द की फसल सड़ने के कगार पर पहुंच गई है। डूब क्षेत्र में करीब 30 फीसदी तक फसलें ही बची हैं। सरसों की फिर से बुआई करने का मौका नहीं मिल पाया है। आर्थिक दिक्कतों के दौर से गुजर रहे किसानों के सामने घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ त्योहार के खर्चे हैं। फसलों को नुकसान का आकलन करने के लिए चार दिन पहले राजस्व कर्मियों ने मुआयना भी किया था लेकिन अब तक किसी भी किसान को मुुआवजा नहीं मिल पाया है, ऐसे में दिवाली तक मुआवजा मिलने की उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है।
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यह बोले किसान
गंगा किनारे खेती तो काफी है लेकिन सभी फसलें नहीं हो पातीं। धान की फसल काफी अच्छी रही। उड़द भी बेहतर दिखा पर पिछले दिनों आई बाढ़ ने सबकुछ तबाह कर डाला। खेत में कटी पड़ी उड़द की फल भी सैलाब में बह गई। अब ठूंठ के अलावा कुछ भी नजर नहीं आ रहा।
- ऋषिपाल सिंह
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फसलों को 80 फीसदी तक नुकसान हुआ है। राजस्व विभाग की टीम ने मुआयना कर लिया है। बताया भी गया है कि मुआवजा मिलेगा लेकिन अब तक धेला भी नहीं दिया गया है। त्योहार सिर पर है। घरेलू जरूरतें पूरी होने की उम्मीद टूटने लगी है।
- उदयसिंह
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गंगा में बाढ़ से नुकसान तो पहले भी काफी हुआ है। जब तक फसल घर में नहीं पहुंच जाए तब तक उसे अपना नहीं माना जा सकता। इस बार तो पहाड़ की आफत ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। किसानों को मुआवजा फसलों के हिसाब से मिलना चाहिए।

- सत्यपाल
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बाढ़ से नुकसान तो गंगा किनारे के हर किसान को हुआ है लेकिन जिनकी जमीनें तलहटी से दूर हैं, उनमें थोड़ी-बहुत फसल बच गई है। मुआवजा निर्धारित करने से पहले अफसरों को इस बात पर भी गौर करना चाहिए। मुआवजा दिवाली से पहले मिले तो बात बने।
- गिरीश कुमार
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