{"_id":"5b8980f242c792463254a5f5","slug":"61535738098-budaun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुखार से हुई मौतों ने मचाई शासन तक खलबली, जिला अस्पताल पहुंचे जेडी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुखार से हुई मौतों ने मचाई शासन तक खलबली, जिला अस्पताल पहुंचे जेडी
Updated Fri, 31 Aug 2018 11:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो--15, 16
बुखार से हुई मौतों ने मचाई शासन तक खलबली, जिला अस्पताल पहुंचे जेडी
निरीक्षण करने के बाद डेंगू और मलेरिया वार्ड बनवाए, गांवों में टीमें भेजने के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। बुखार से एक दिन में दस लोगों के मरने की खबर ‘अमर उजाला’ में छपी तो शासन तक खलबली मच गई। शासन के निर्देश पर ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. हरीश चंद्रा शुक्रवार को बदायूं पहुंचे। उन्होंने जिला अस्पताल का निरीक्षण कर बुखार के मरीजों का हालचाल जाना। अलग से डेंगू और मलेरिया वार्ड बनवाए। सीएमओ से बुखार प्रभावित गांवों में टीमें भेजने को कहा। जेडी ने महिला अस्पताल का निरीक्षण भी किया।
जिले में बुखार अपने पैर पसारता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह में बुखार से 20 लोगों की मौत हो चुकी है। गुरुवार को एक दिन में दस लोगों की मौत हुई थी। इसकी खबर अमर उजाला में छपी तो शासन तक खलबली मच गई। शासन के निर्देश पर ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. हरीश चंद्रा शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे जिला अस्पताल जा पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले बुखार से पीड़ित मरीजों का हाल जाना। जिला अस्पताल में बुखार के कितने मरीज भर्ती हैं और कितने भर्ती होने के बाद ठीक होकर घर चले गए। किसकी बुखार से इलाज के दौरान मौत हुई यह पूरा रिकार्ड जेडी ने खंगाला। इसके बाद जेडी ने जिला अस्पताल के वार्डों का निरीक्षण किया। उन्हें वार्डों में सीलन और गंदगी भरी मिली। बेड पर चादरें बेहद गंदी बिछी मिलीं। जेडी ने इस अव्यवस्था पर सीएमएस डॉ. सुकुमार अग्रवाल से कड़ी नाराजगी जताई। कहा कि यह रवैया जल्द से जल्द बदल दें। मरीज को भर्ती करते समय बैड की चादर जरूर बदली जाए। चादर न बदलने से मरीजों में इंफेशन फैलने का डर रहता है। वार्डों में साफ-सफाई का भी पूरा ध्यान रखें।
जेडी ने हार्ट वार्ड को डेंगू बुखार से पीड़ित मरीजों के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया। डेंगू के मरीजों की देखभाल और इलाज अच्छी तरह से करने को कहा। कहा-प्रत्येक बैड पर मच्छरदानी लगाई जाए। दवाओं की कमी हो तो खरीद ली जाएं। जेडी ने पेइंग वार्ड को बाल रोग वार्ड और मलेरिया वार्ड को मलेरिया के मरीजों के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया। कहा है कि दो दिन के अंदर यह सब व्यवस्था हो जानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो लापरवाही की रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
विज्ञापन
इसके बाद जेडी महिला अस्पताल पहुंचे। यहां भी उन्होंने मरीजों का हाल-चाल पूछा और वार्ड में सफाई व्यवस्था को चेक किया। लेबर रूम में साफ-सफाई के निर्देश दिए।
इंसेट--
...तो लापरवाही से गई थी बच्चे की जान
जिला अस्पताल में गुरुवार दोपहर बच्चे की मौत का कारण बुखार था, लेकिन कहीं न कहीं बच्चे की मौत का अस्पताल प्रशासन भी जिम्मेदार रहा। अगर परिवार वालों का माने तो बच्चा सुबह सात बजे भर्ती हुआ था। अगर सीएमएस डॉ. सुकुमार अग्रवाल की माने तो उन्होंने बच्चे को सुबह साढ़े दस बजे देखा। बीच में गुजरे साढ़े तीन घंटे तक बालक जिंदगी-मौत से जूझता रहा। इस दौरान न किसी डॉक्टर को कॉल लिखी गई और न ही किसी ने बच्चे को देखा। राउंड पर निकले सीएमएस ने बच्चे की हालत देखने के बाद ब्लड लगवाने को एडवाइज किया था। उसके बाद दोपहर ढाई बजे तक खून टेस्ट करने की खानापूर्ति चलती रही। परंतु बच्चे को ब्लड नहीं मिल सका और उसकी जान चली गई।
वर्जन-
बच्चे को मैंने स्वयं साढ़े दस बजे देखा था। मुझे बताया गया कि कोई डॉक्टर राउंड पर नहीं आया है तो मैं स्वयं वार्ड में पहुंचा था। मुझे कोई कॉल नहीं लिखी गई। जब तक उनसे कोई बात पूछ पाते उससे पहले वह निकल गए।
-डॉ. सुकुमार अग्रवाल, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल
विज्ञापन
बुखार से हुई मौतों ने मचाई शासन तक खलबली, जिला अस्पताल पहुंचे जेडी
निरीक्षण करने के बाद डेंगू और मलेरिया वार्ड बनवाए, गांवों में टीमें भेजने के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। बुखार से एक दिन में दस लोगों के मरने की खबर ‘अमर उजाला’ में छपी तो शासन तक खलबली मच गई। शासन के निर्देश पर ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. हरीश चंद्रा शुक्रवार को बदायूं पहुंचे। उन्होंने जिला अस्पताल का निरीक्षण कर बुखार के मरीजों का हालचाल जाना। अलग से डेंगू और मलेरिया वार्ड बनवाए। सीएमओ से बुखार प्रभावित गांवों में टीमें भेजने को कहा। जेडी ने महिला अस्पताल का निरीक्षण भी किया।
जिले में बुखार अपने पैर पसारता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह में बुखार से 20 लोगों की मौत हो चुकी है। गुरुवार को एक दिन में दस लोगों की मौत हुई थी। इसकी खबर अमर उजाला में छपी तो शासन तक खलबली मच गई। शासन के निर्देश पर ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. हरीश चंद्रा शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे जिला अस्पताल जा पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले बुखार से पीड़ित मरीजों का हाल जाना। जिला अस्पताल में बुखार के कितने मरीज भर्ती हैं और कितने भर्ती होने के बाद ठीक होकर घर चले गए। किसकी बुखार से इलाज के दौरान मौत हुई यह पूरा रिकार्ड जेडी ने खंगाला। इसके बाद जेडी ने जिला अस्पताल के वार्डों का निरीक्षण किया। उन्हें वार्डों में सीलन और गंदगी भरी मिली। बेड पर चादरें बेहद गंदी बिछी मिलीं। जेडी ने इस अव्यवस्था पर सीएमएस डॉ. सुकुमार अग्रवाल से कड़ी नाराजगी जताई। कहा कि यह रवैया जल्द से जल्द बदल दें। मरीज को भर्ती करते समय बैड की चादर जरूर बदली जाए। चादर न बदलने से मरीजों में इंफेशन फैलने का डर रहता है। वार्डों में साफ-सफाई का भी पूरा ध्यान रखें।
विज्ञापन
जेडी ने हार्ट वार्ड को डेंगू बुखार से पीड़ित मरीजों के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया। डेंगू के मरीजों की देखभाल और इलाज अच्छी तरह से करने को कहा। कहा-प्रत्येक बैड पर मच्छरदानी लगाई जाए। दवाओं की कमी हो तो खरीद ली जाएं। जेडी ने पेइंग वार्ड को बाल रोग वार्ड और मलेरिया वार्ड को मलेरिया के मरीजों के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया। कहा है कि दो दिन के अंदर यह सब व्यवस्था हो जानी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो लापरवाही की रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
विज्ञापन
इसके बाद जेडी महिला अस्पताल पहुंचे। यहां भी उन्होंने मरीजों का हाल-चाल पूछा और वार्ड में सफाई व्यवस्था को चेक किया। लेबर रूम में साफ-सफाई के निर्देश दिए।
इंसेट--
...तो लापरवाही से गई थी बच्चे की जान
जिला अस्पताल में गुरुवार दोपहर बच्चे की मौत का कारण बुखार था, लेकिन कहीं न कहीं बच्चे की मौत का अस्पताल प्रशासन भी जिम्मेदार रहा। अगर परिवार वालों का माने तो बच्चा सुबह सात बजे भर्ती हुआ था। अगर सीएमएस डॉ. सुकुमार अग्रवाल की माने तो उन्होंने बच्चे को सुबह साढ़े दस बजे देखा। बीच में गुजरे साढ़े तीन घंटे तक बालक जिंदगी-मौत से जूझता रहा। इस दौरान न किसी डॉक्टर को कॉल लिखी गई और न ही किसी ने बच्चे को देखा। राउंड पर निकले सीएमएस ने बच्चे की हालत देखने के बाद ब्लड लगवाने को एडवाइज किया था। उसके बाद दोपहर ढाई बजे तक खून टेस्ट करने की खानापूर्ति चलती रही। परंतु बच्चे को ब्लड नहीं मिल सका और उसकी जान चली गई।
वर्जन-
बच्चे को मैंने स्वयं साढ़े दस बजे देखा था। मुझे बताया गया कि कोई डॉक्टर राउंड पर नहीं आया है तो मैं स्वयं वार्ड में पहुंचा था। मुझे कोई कॉल नहीं लिखी गई। जब तक उनसे कोई बात पूछ पाते उससे पहले वह निकल गए।
-डॉ. सुकुमार अग्रवाल, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल