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अंदाजे से हो रहा बच्चों का वजन, कैसे होगा कुपोषण दूर
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अंदाजे से हो रहा बच्चों का वजन, कैसे होगा कुपोषण दूर
बदायूं। शासन कुपोषण दूूर करने के लिए शासन पोषण मिशन योजना संचालित कर रहा है। इसके तहत हर माह आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार भेजा जाता है। कुपोषण की स्थिति मापने के लिए प्रत्येक केंद्र पर वजन तोलने की मशीन दी गई। जिन में अधिकतर खराब हो गई हैं। ऐसे मेें अंदाजे से बच्चों का वजन किया जा रहा है। विभाग अब उन केंद्रों को चिह्नित कर रहा है जहां मशीन खराब होने का अंदेशा है।
जिले में 2937 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों पर छह वर्ष तक के करीब साढ़े चार लाख बच्चे पंजीकृत है। इन बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए हर माह वजन कर कुपोषण की स्थिति की रिपोर्ट तैयार कर शासन और प्रशासन को दी जाती है। लेकिन अधिकतर केंद्रों में वजन मशीन खराब हो चुकी हैं। ऐसे में आंगनबाड़ियों की ओर से पिछले दो-तीन माह से बच्चों के कुपोषण की स्थिति का आकलन अंदाज से किया जा रहा है। इस कारण सही स्थिति की जगह शासन को अंदाजे की रिपोर्ट भेजी जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने इससे विभागीय उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। ऐसे में शासन की जनपद को कुपोषणमुक्त करने की मंशा पर पानी फिर रहा है।
वर्जन-
ऐसे आंगनबाड़ी केंद्रों को चिह्नित किया जा रहा है। जहां पर मशीन खराब है, अब तक लगभग साढ़ेे छह सौ मशीन खराब मिली हैं। जल्द ही नई मशीनों की खरीद कर इन केंद्रों पर वितरित कर दी जाएगी।
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-पीके दास, डीपीओ
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बदायूं। शासन कुपोषण दूूर करने के लिए शासन पोषण मिशन योजना संचालित कर रहा है। इसके तहत हर माह आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार भेजा जाता है। कुपोषण की स्थिति मापने के लिए प्रत्येक केंद्र पर वजन तोलने की मशीन दी गई। जिन में अधिकतर खराब हो गई हैं। ऐसे मेें अंदाजे से बच्चों का वजन किया जा रहा है। विभाग अब उन केंद्रों को चिह्नित कर रहा है जहां मशीन खराब होने का अंदेशा है।
जिले में 2937 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों पर छह वर्ष तक के करीब साढ़े चार लाख बच्चे पंजीकृत है। इन बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए हर माह वजन कर कुपोषण की स्थिति की रिपोर्ट तैयार कर शासन और प्रशासन को दी जाती है। लेकिन अधिकतर केंद्रों में वजन मशीन खराब हो चुकी हैं। ऐसे में आंगनबाड़ियों की ओर से पिछले दो-तीन माह से बच्चों के कुपोषण की स्थिति का आकलन अंदाज से किया जा रहा है। इस कारण सही स्थिति की जगह शासन को अंदाजे की रिपोर्ट भेजी जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने इससे विभागीय उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। ऐसे में शासन की जनपद को कुपोषणमुक्त करने की मंशा पर पानी फिर रहा है।
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वर्जन-
ऐसे आंगनबाड़ी केंद्रों को चिह्नित किया जा रहा है। जहां पर मशीन खराब है, अब तक लगभग साढ़ेे छह सौ मशीन खराब मिली हैं। जल्द ही नई मशीनों की खरीद कर इन केंद्रों पर वितरित कर दी जाएगी।
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-पीके दास, डीपीओ