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हत्या के प्रयास में दो को दस-दस साल की सजा
Updated Fri, 01 Dec 2017 12:13 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट पंकज कुमार अग्रवाल ने जानलेवा हमले में नामजद दो मुल्जिमों को दोषी करार देते हुए 10-10 साल की कैद सहित 47 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की रकम जमा होने पर आधी धनराशि वादी को देने के भी आदेश हैं।
घटना थाना धनारी क्षेत्र के गांव सूरपुर में नौ अप्रैल 2003 को घटी थी। उस समय यह थाना बदायूं जिले में लगता था। अब संभल में आता है। वादी नत्थू सिंह ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि गांव का ही सुलेराम पुत्र लटूरी उसके यहां पर मजदूरी करता था। सो उसने कुछ सामान और रुपये के लेनदेन में गड़बड़ी कर दी थी। तब उसने सुलेराम को काम से हटा दिया था। इसी से वह उससे रंजिश मानने लगा। नौ अप्रैल को सुलेराम ने अपने साथी राजपाल निवासी भोजराजपुर थाना गुन्नौर के साथ उस समय तमंचे से गोलियां बरसानी शुरू कर दी थीं जब वह अपने बेटों के साथ खेत पर फसल काट रहा था। गोली उसके बेटे आराम सिंह और विद्याराम के लगी थी। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
इस मामले में सुलेराम, उसके भाई महेंद्र और राजपाल को नामजद कराया गया था। जांच में पुलिस ने महेंद्र को निकाल दिया था। स्पेशल जज पंकज कुमार अग्रवाल ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी रईस अहमद और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद मामले में नामजद सुलेराम और राजपाल को दोषी मानते हुए दस-दस साल की कैद के साथ ही दोनों पर 47 हजार रुपये का जुर्माने का आदेश सुनाया।
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घटना थाना धनारी क्षेत्र के गांव सूरपुर में नौ अप्रैल 2003 को घटी थी। उस समय यह थाना बदायूं जिले में लगता था। अब संभल में आता है। वादी नत्थू सिंह ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि गांव का ही सुलेराम पुत्र लटूरी उसके यहां पर मजदूरी करता था। सो उसने कुछ सामान और रुपये के लेनदेन में गड़बड़ी कर दी थी। तब उसने सुलेराम को काम से हटा दिया था। इसी से वह उससे रंजिश मानने लगा। नौ अप्रैल को सुलेराम ने अपने साथी राजपाल निवासी भोजराजपुर थाना गुन्नौर के साथ उस समय तमंचे से गोलियां बरसानी शुरू कर दी थीं जब वह अपने बेटों के साथ खेत पर फसल काट रहा था। गोली उसके बेटे आराम सिंह और विद्याराम के लगी थी। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
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इस मामले में सुलेराम, उसके भाई महेंद्र और राजपाल को नामजद कराया गया था। जांच में पुलिस ने महेंद्र को निकाल दिया था। स्पेशल जज पंकज कुमार अग्रवाल ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी रईस अहमद और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद मामले में नामजद सुलेराम और राजपाल को दोषी मानते हुए दस-दस साल की कैद के साथ ही दोनों पर 47 हजार रुपये का जुर्माने का आदेश सुनाया।
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