सत्ता का संग्राम: गुन्नौर विधानसभा में कितना हुआ विकास, मतदाता कितना संतुष्ट? जानें इस रिपोर्ट में
यूपी में अगले साल यानी 2027 में विधानसभा का चुनाव होना है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी छोटे-बड़े दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं। सपा जहां अपनी खोई हुई जमीन वापस पाना चाहती है,वहीं भजापा लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के लिए पूरा जोर लगा रही है। इसी कड़ी में गुन्नौर विधानसभा सीट पर अमर उजाला की टीम ने लोगों से बातचीत की। ये सीट बदायूं जिले में आती है।
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यूपी में अगले साल यानी 2027 में विधानसभा का चुनाव होना है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी छोटे-बड़े दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं। सपा जहां अपनी खोई हुई जमीन वापस पाना चाहती है वहीं भजापा लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के लिए पूरा जोर लगा रही है। भाजपा सरकार के कामकाज से जनता कितना संतुष्ट है और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार को लेकर लोगों की राय क्या है? प्रदेश की जनता के 'मन की बात' जानने के लिए आमर उजाला ने एक अभियान चलाया है जिसका नाम है 'सत्ता का संग्राम'। इस अभियान के तहत अमर उजाला की टीम प्रदेश की सभी विधानसभाओं में जाकर तमाम मुद्दों को लेकर लोगों से बात कर रही है और ये जानने की कोशिश कर रही है कि क्षेत्र के मौजूदा विधायक के काम-काज से जनता कितना संतुष्ट है? इसी कड़ी में गुन्नौर विधानसभा का अमर उजाला की टीम ने जायजा लिया।
गुन्नौर में जनता ने दिया विधायक के काम का हिसाब
गुन्नौर विधानसभा क्षेत्र में बातचीत के दौरान राजेश गुप्ता ने अपने स्थानीय विधायक के कामकाज से संतुष्ट नजर आए। राजेश गुप्ता ने कहा कि सब अच्छा चल रहा है, विधायक आते हैं सबसे मिलते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे यहां जो रेलवे फाटक है उसकी क्रॉसिंग की डिमांड है सबकी। जाम लगा रहता है क्रॉसिंग बनने से जाम से निजात मिलेगी। राजेश गुप्ता ने कहा कि शिक्षा, सुरक्षा बहुत अच्छी है। सड़क बहुत अच्छी है। पानी की व्यवस्था बढ़िया है। वहीं आगे प्रमोद शर्मा ने कहा कि घर-घर विकास जाए चाहे हर किसी को विकास में तोल लें। इस क्षेत्र में जब से मैं हूं यहां तो जातिवाद पर ही इलेक्शन होगा। इस बार भी यही लग रहा है। यहां का जो विकास हुआ है उस पर वोट नहीं पड़ेगा, यहां पर वोट जाति के आधार पर ही पड़ता है। वहीं आगे बातचीत के दौरान पान सिंह यादव ने कहा कि जो अच्छा काम करेगा उसी के नाम पर वोट पड़ेगा।
कानून-व्यवस्था को लेकर लोगों की राय
दीपक शर्मा ने बताया कि यहां तो भूमाफियाओं का मुख्य मुद्दा है। एक तरफ योगी जी कहते हैं कि हम भूमाफियाओं को मिट्टी में मिला देंगे। जिलाधिकारी कहते हैं भरोसे की पर्ची। लेकिन वहां से जो भरोसे की पर्ची आती है, तहसील स्तर तक आती है, उसके नीचे जो अधिकारी हैं, वह सभी भ्रष्ट लेवल के अधिकारी हैं। कोई भी लेखपाल ऐसा नहीं है जिसके पास अपना एक स्टैनो नहीं हो। एक-एक लेखपाल के पास दो-दो स्टैनों हैं। यहां के अधिकारी की आंख तब खुलती है जब उनका लेखपाल या कानूनगो को रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन के द्वारा पकड़ा जाता है। बातचीत के दौरान जूलियस सीजर ने कहा कि यहां की जो पुरानी समस्याएं थी वो तो लगभग लगभग सरकार आने के बाद समाप्त हो गई। यहां पर अपराध ज्यादा था। उसकी वजह से जो सामान्य प्रवृत्ति के लोग थे सीधे लोग वो उनको रहने में असहजता थी। जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई है तब से यहां पर क्राइम काफी कंट्रोल हुआ है। लोग अपने आप को बहुत सुरक्षित महसूस करते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी काम हुआ है। लेकिन कुछ बिंदु ऐसे हैं जहां पर अभी और कार्य करने की आवश्यकता है। वहीं एक शख्स ने कहा कि ये जो दुकानदार हैं चौराहे पे ठेली वाले गरीब व्यक्ति हैं, इनका सामान ले लेते थे इन्हें पैसे नहीं देते थे यहां पर यह हाल है। अगर मैं झूठ बोल रहा हूं तो ये सब लोग खड़े हैं पूछ लो समझे गुंडागर्दी चरम सीमा पर थी। आज बहन बेटी रात के 12:00 बजे कहीं घूम रही है। कोई उंगली करने वाला नहीं है। सड़कें बन रही हैं। हर काम हो रहा है।
गुन्नौर के लोगों की क्या है सबसे बड़ी मांग
सत्ता के संग्राम के तहत बातचीत की कड़ी में केवी यादव ने कहा कि हमारे गुन्नौर में जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है यहां पर ट्रामा सेंटर की बहुत आवश्यकता है। आए दिन एक्सीडेंट से दो चार लोगों की मौत हो रही है। यहां से 65 किमी की दूरी है मेडिकल कॉलेज की। वहीं सुमित शर्मा है ने कहा कि भाजपा की योगी सरकार आने के बाद काफी बदलाव हुए हैं। लेकिन अभी और बदलाव की आवश्यकता है। आगे उन्होंने कहा कि सरकार के जो भी नुमाइंदे हैं उनसे मेरा ये कहना है कि 101 वर्षों से जो है एसीजीएम कोर्ट के लिए मांग चल रही है उसे पूरा कर दिया जाए। वहीं अकील खान ने कहा कि युवा यह सोचकर विधायक चुनता है कि शिक्षा के क्षेत्र में हमारे यहां पर काम हो। लेकिन ऐसा जमीन पर नहीं होता। वहीं आबिद ने बताया कि यहां पर अस्पताल की कमी है और एक डिग्री कॉलेज बनना चाहिए।
इस बार के चुनाव में किसानों के क्या हैं मुद्दे
बातचीत के दौरान हरि ओम ने पानी का मुद्दा उठाया। अकील खान ने आगे बताया कि अगर खाद की बात करें तो सारी चीजें आधार कार्ड से अटैच हैं सब चीजें। उसके बाद भी किसान अगर खाद लेने जाता है तो उससे कहते हैं कि फार्मर आईडी लेकर आइए। अब वो दुकानों पर भागता है। जनसेवा केंद्रों पर साइटें चल रही हैं। नहीं चल रही है। भीड़ इकट्ठी हो जाती है। जब सारी चीजें आधार कार्ड से कनेक्टेड हैं तो फिर क्या जरूरत है इन सब चीजों की? आधार कार्ड लो। आप अपने सिस्टम में डाटा चेक करो कि यह बंदा किसान है या नहीं है? उसके बाद भी उसे खाद मिल रहा है तो वह भी महंगा मिल रहा है। वहीं शेर सिंह कहा कि महंगाई बहुत है। चीनी का रेट ₹70 किलो तक पहुंच गया। सरकार को महंगाई पर ध्यान देना चाहिए।
जानें गुन्नौर के युवाओं के बड़े मुद्दे
रंजीत यादव ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सरकार का बहुत सराहनीय काम रहा है और जब से मौजूदा सरकार चली है तब से शिक्षा के लिए प्रगति हुई है। बढ़िया काम हुआ है और सड़कों का तो बहुत अच्छा काम हुआ है। चौड़ीकरण हुआ है। बदायूं हाईवे हो, नौरा वाला हो सारे रोडों का बहुत अच्छा सरकार ने काम किया है। सरकार सब तरीके से बढ़िया काम कर रही है। रूपेश कुमार ने बताया कि मुद्दे तो यहां बहुत सारे हैं। मुद्दे तो यहां के नेताओं ने आज तक पूरे किए नहीं क्योंकि ये पिछड़ा क्षेत्र रहा है और यहां के लोग आपसी गुटबाजी पार्टी बंदी में एक दूसरे को लड़ा देते हैं। शाहिद ने कहा कि हमारा जो क्षेत्र है यह स्वास्थ्य के हिसाब से बहुत पीछे है। यहां पे कोई बड़ा मेडिकल नहीं है जो कि कोई इमरजेंसी में मरीज को यहां एडमिट कर दिया जाए।