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बाजरा की फसल भी किसानों को दे गई धोखा
Updated Mon, 30 Oct 2017 11:09 PM IST
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बर्बाद हुई फसल।
- फोटो : अमर उजाला
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दातागंज। बाजरा की उपज में किसानों की लागत निकलना तो दूर कटाई और मढ़ाई की मजदूरी तक के लाले हैं। सैकड़ों निराश किसानों ने फसल को यूं ही खड़ा छोड़ दिया है।
आधुनिक शैली से खेती करने वाले गांव हजरतपुर के कृषक रामशंकर गुप्ता ने बताया कि सामान्यता बाजरा की उपज दो से तीन क्विंटल प्रति बीघा रहती है। इस बार फसल अन्य वर्षों की अपेक्षा अच्छी थी। हर किसान को रिकार्ड उपज का अंदाजा था, लेकिन बेमौसम बरसात और तेज हवा ने फसल को खराब कर दिया। उन्होंने बताया कि स्वयं 90 बीघा बाजरा बोया था। उवर्रक आदि भरपूर मात्रा में लगाए लेकिन उपज मात्र सौ क्विंटल ही हुई।
हजरतपुर के ही राजेश, रामसिंह और विजय ने बताया कि उनके खेतों में तो 40-50 किलोग्राम ही प्रति क्विंटल बाजरा की पैदावार हुई। छोटे सिंह, रामौतार श्रीवास्तव, सुरेंद्र श्रीवास्तव, मैकू, नन्हें, रामनिवास और राजेश ने बताया कि उन्होंने फसल को खेतों में ही खड़ा छोड़ दिया है। क्योंकि फसल की कटाई और मढ़ाई की मजदूरी सात-आठ सौ रुपये प्रति बीघा बैठ रही है, जबकि बाजरा चार-पांच सौ का ही बैठेगा। पहले बाजरा की कटाई और मढ़ाई बटाई पर हो जाती थी लेकिन फसल खराब होने की वजह से मजदूरी पर सारे काम हो रहे हैं।
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इस वर्ष बाजरा का मूल्य भी एक हजार रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि गत वर्ष 14 सौ रुपये प्रति क्विंटल था। अपनी फसल को मजबूरी में खेत खाली करने की वजह से नष्ट करा रहे हैं। यहीं हाल कमोवेश कटरी क्षेत्र के हर गांव का है।
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आधुनिक शैली से खेती करने वाले गांव हजरतपुर के कृषक रामशंकर गुप्ता ने बताया कि सामान्यता बाजरा की उपज दो से तीन क्विंटल प्रति बीघा रहती है। इस बार फसल अन्य वर्षों की अपेक्षा अच्छी थी। हर किसान को रिकार्ड उपज का अंदाजा था, लेकिन बेमौसम बरसात और तेज हवा ने फसल को खराब कर दिया। उन्होंने बताया कि स्वयं 90 बीघा बाजरा बोया था। उवर्रक आदि भरपूर मात्रा में लगाए लेकिन उपज मात्र सौ क्विंटल ही हुई।
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हजरतपुर के ही राजेश, रामसिंह और विजय ने बताया कि उनके खेतों में तो 40-50 किलोग्राम ही प्रति क्विंटल बाजरा की पैदावार हुई। छोटे सिंह, रामौतार श्रीवास्तव, सुरेंद्र श्रीवास्तव, मैकू, नन्हें, रामनिवास और राजेश ने बताया कि उन्होंने फसल को खेतों में ही खड़ा छोड़ दिया है। क्योंकि फसल की कटाई और मढ़ाई की मजदूरी सात-आठ सौ रुपये प्रति बीघा बैठ रही है, जबकि बाजरा चार-पांच सौ का ही बैठेगा। पहले बाजरा की कटाई और मढ़ाई बटाई पर हो जाती थी लेकिन फसल खराब होने की वजह से मजदूरी पर सारे काम हो रहे हैं।
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इस वर्ष बाजरा का मूल्य भी एक हजार रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि गत वर्ष 14 सौ रुपये प्रति क्विंटल था। अपनी फसल को मजबूरी में खेत खाली करने की वजह से नष्ट करा रहे हैं। यहीं हाल कमोवेश कटरी क्षेत्र के हर गांव का है।