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सपना देखा कि बेटा जिंदा है, कब्र खोद कर निकाला
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बदायूं। बेटे की मौत होने के बाद इसे मां की दिमागी हालत कहें या फिर अंधविश्वास, जिसके लिए कब्र में दबी लाश को भी खोदकर निकाल लिया गया। एक मां को सपना आया कि तीन दिन पहले हादसे में मरा बेटा जिंदा है। यह बात उसने परिवार वालों को बताई। परिजनों से रहा नहीं गया और उन्होंने कब्र खोद डाली और फिर लाश को अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टर ने चेकअप करके उनसे कह दिया कि उसकी तीन पहले ही मौत हो चुकी है।
13 फरवरी को बिल्सी थाना क्षेत्र के ग्राम पुसगवां निवासी धर्मेंद्र के 11 वर्षीय बेटे आदित्य की एक हादसे में मौत हो गई थी। उस दिन दोपहर के समय आदित्य अपने सहपाठियों के साथ स्कूल से लौट रहा था। रास्ते में सत्यपाल अपनी ट्रैक्टर ट्रॉली गांव की ओर ले जा रहा था। आदित्य अपने सहपाठियों के साथ ट्रॉली के पीछे लटक गया। गांव के नजदीक पहुंचते ही ट्रॉली तालाब के समीप पलट गई, जिसमें दबकर आदित्य की मौत हो गई, जबकि अन्य बच्चे बाल-बाल बच गए। परिजनों ने बगैर पोस्टमार्टम कराए आदित्य के शव को दफन कर दिया था। इस हादसे के बाद से परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल था। धर्मेंद्र के मुताबिक शुक्रवार रात उसकी पत्नी को सपना आया कि उसका बेटा आदित्य जिंदा है। वह कह रहा था कि उसे कब्र से निकाल लो, वह कब्र से बाहर आना चाहता है। उसकी पत्नी ने सुबह परिवार वालों को इसकी सूचना दी। फिर क्या, परिवार वाले फावड़ा लेकर मौके पर पहुंच गए और उन्होंने कब्र खोद डाली। आदित्य के शव को निकालकर एक कपड़े में लपेटकर जिला अस्पताल ले गए। परिवार वालों के कहने पर डॉ. मोहित यादव ने आदित्य की नब्ज चेक की और ईसीजी कराया। बाद में उन्होंने बोल दिया कि बालक की तीन दिन पहले ही मौत हो चुकी है। इस पर परिजन शव को अपने घर ले गए और शव को फिर उसी स्थान पर दफन कर दिया।
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13 फरवरी को बिल्सी थाना क्षेत्र के ग्राम पुसगवां निवासी धर्मेंद्र के 11 वर्षीय बेटे आदित्य की एक हादसे में मौत हो गई थी। उस दिन दोपहर के समय आदित्य अपने सहपाठियों के साथ स्कूल से लौट रहा था। रास्ते में सत्यपाल अपनी ट्रैक्टर ट्रॉली गांव की ओर ले जा रहा था। आदित्य अपने सहपाठियों के साथ ट्रॉली के पीछे लटक गया। गांव के नजदीक पहुंचते ही ट्रॉली तालाब के समीप पलट गई, जिसमें दबकर आदित्य की मौत हो गई, जबकि अन्य बच्चे बाल-बाल बच गए। परिजनों ने बगैर पोस्टमार्टम कराए आदित्य के शव को दफन कर दिया था। इस हादसे के बाद से परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल था। धर्मेंद्र के मुताबिक शुक्रवार रात उसकी पत्नी को सपना आया कि उसका बेटा आदित्य जिंदा है। वह कह रहा था कि उसे कब्र से निकाल लो, वह कब्र से बाहर आना चाहता है। उसकी पत्नी ने सुबह परिवार वालों को इसकी सूचना दी। फिर क्या, परिवार वाले फावड़ा लेकर मौके पर पहुंच गए और उन्होंने कब्र खोद डाली। आदित्य के शव को निकालकर एक कपड़े में लपेटकर जिला अस्पताल ले गए। परिवार वालों के कहने पर डॉ. मोहित यादव ने आदित्य की नब्ज चेक की और ईसीजी कराया। बाद में उन्होंने बोल दिया कि बालक की तीन दिन पहले ही मौत हो चुकी है। इस पर परिजन शव को अपने घर ले गए और शव को फिर उसी स्थान पर दफन कर दिया।
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