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हद हो गई! आगे पुलिस, पीछे डग्गामार
Updated Tue, 11 Dec 2018 06:43 PM IST
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हद हो गई! आगे पुलिस, पीछे डग्गामार
बदायूं। रोडवेज चौराहे पर चाहे कुछ हो जाए, डग्गामारी बंद नहीं हो सकती। ताज्जुब की बात है कि डग्गामार बसें हटाने को पुलिस, परिवहन निगम और रोडवेज विभाग लगे हैं। इसके बावजूद चौराहे से डग्गामार बसें नहीं हट रहीं। सीओ सिटी एक दिन अभियान चलाते हैं, दूसरे दिन डग्गामार बसें वहीं आकर लग जाती हैं। इनको किसका संरक्षण मिला है, यह एक यक्ष प्रश्न बनकर रह गया है।
मंगलवार सुबह रोडवेज चौराहे पर ऐसे हालात देखने को मिले, जिसके बारे में सोच नहीं सकते। पुलिस विभाग ने अपनी सक्रियता दिखाने के लिए चौराहे पर एक क्रेन खड़ी करा दी। ऐसा करके सीधे संचालकों को संदेश दिया कि अगर डग्गामार बसें खड़ी हुईं तो सीज कर दी जाएंगी। उन्हें क्रेन से खींचकर पुलिस लाइन ले जाया जाएगा। लेकिन बाद में सब दिखावा प्रतीत हुआ। यातायात प्रभारी ने जिस जगह क्रेन खड़ी कराई। ठीक उसके पीछे आकर डग्गामार बसें खड़ी हो गईं और बरेली के लिए सवारियां बैठाई गईं। बस में सवारियां बैठाना एक दो मिनट का काम नहीं था। आराम से सवारियां बैठाई गईं। पीछे आ रहीं सवारियों का इंतजार भी किया गया। यात्रियों से पूरी भरने के बाद ही बस चौराहे से रवाना हुई। ऐसा नहीं था कि सिर्फ क्रेन खड़ी करा दी गई थी। इस दौरान मौके पर पुलिस भी मौजूद थी। न तो बस को हटाया गया और न ही कोई कार्रवाई की गई। कुछ दिन पहले यह पोल खोली गई थी कि डग्गामार बस से प्रति चक्कर तीन सौ रुपये लिए जा रहे हैं। अब यह सच साबित हो रहा है। शायद यही वजह है कि चौकी पुलिस डग्गामार बसें नहीं रोक पा रही है।
---
वर्जन---
रोडवेज चौराहे पर मैने ही अभियान चलाया था। अगर डग्गामार बस संचालक नहीं मान रहे हैं तो फिर से अभियान चलाया जाएगा। अब चेतावनी नहीं दी जाएगी। अब सीधे कार्रवाई होगी, बसों को सीज किया जाएगा। इस अभियान को बुधवार से फिर शुरू किया जाएगा। दो-एक बस सीज होंगी, तभी मानेंगे।
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-राघवेंद्र सिंह राठौर, सीओ सिटी
वर्जन--
मैने एक सप्ताह का ड्यूटी चार्ट जारी किया है। प्रत्येक दिन एक-एक कर्मचारी सुबह से लेकर शाम तक चौराहे पर ड्यूटी करेगा। चौराहे पर जाम नहीं लगने देगा और डग्गामार वाहनों के संबंध में पुलिस को सूचना देगा।
-राजेश कुमार, एआरएम
वर्जन--
मेरे पास तीन सिपाही हैं। अब हर जगह चेकिंग नहीं कर सकता और न ही मैं खड़ा हो सकता हूं। जहां भी जाता हूं। वाहनों को चेक करता हूं। कागजात नहीं मिलने पर कार्रवाई करता हूं।
-सोहेल अहमद, एआरटीओ प्रवर्तन
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बदायूं। रोडवेज चौराहे पर चाहे कुछ हो जाए, डग्गामारी बंद नहीं हो सकती। ताज्जुब की बात है कि डग्गामार बसें हटाने को पुलिस, परिवहन निगम और रोडवेज विभाग लगे हैं। इसके बावजूद चौराहे से डग्गामार बसें नहीं हट रहीं। सीओ सिटी एक दिन अभियान चलाते हैं, दूसरे दिन डग्गामार बसें वहीं आकर लग जाती हैं। इनको किसका संरक्षण मिला है, यह एक यक्ष प्रश्न बनकर रह गया है।
मंगलवार सुबह रोडवेज चौराहे पर ऐसे हालात देखने को मिले, जिसके बारे में सोच नहीं सकते। पुलिस विभाग ने अपनी सक्रियता दिखाने के लिए चौराहे पर एक क्रेन खड़ी करा दी। ऐसा करके सीधे संचालकों को संदेश दिया कि अगर डग्गामार बसें खड़ी हुईं तो सीज कर दी जाएंगी। उन्हें क्रेन से खींचकर पुलिस लाइन ले जाया जाएगा। लेकिन बाद में सब दिखावा प्रतीत हुआ। यातायात प्रभारी ने जिस जगह क्रेन खड़ी कराई। ठीक उसके पीछे आकर डग्गामार बसें खड़ी हो गईं और बरेली के लिए सवारियां बैठाई गईं। बस में सवारियां बैठाना एक दो मिनट का काम नहीं था। आराम से सवारियां बैठाई गईं। पीछे आ रहीं सवारियों का इंतजार भी किया गया। यात्रियों से पूरी भरने के बाद ही बस चौराहे से रवाना हुई। ऐसा नहीं था कि सिर्फ क्रेन खड़ी करा दी गई थी। इस दौरान मौके पर पुलिस भी मौजूद थी। न तो बस को हटाया गया और न ही कोई कार्रवाई की गई। कुछ दिन पहले यह पोल खोली गई थी कि डग्गामार बस से प्रति चक्कर तीन सौ रुपये लिए जा रहे हैं। अब यह सच साबित हो रहा है। शायद यही वजह है कि चौकी पुलिस डग्गामार बसें नहीं रोक पा रही है।
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रोडवेज चौराहे पर मैने ही अभियान चलाया था। अगर डग्गामार बस संचालक नहीं मान रहे हैं तो फिर से अभियान चलाया जाएगा। अब चेतावनी नहीं दी जाएगी। अब सीधे कार्रवाई होगी, बसों को सीज किया जाएगा। इस अभियान को बुधवार से फिर शुरू किया जाएगा। दो-एक बस सीज होंगी, तभी मानेंगे।
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-राघवेंद्र सिंह राठौर, सीओ सिटी
वर्जन--
मैने एक सप्ताह का ड्यूटी चार्ट जारी किया है। प्रत्येक दिन एक-एक कर्मचारी सुबह से लेकर शाम तक चौराहे पर ड्यूटी करेगा। चौराहे पर जाम नहीं लगने देगा और डग्गामार वाहनों के संबंध में पुलिस को सूचना देगा।
-राजेश कुमार, एआरएम
वर्जन--
मेरे पास तीन सिपाही हैं। अब हर जगह चेकिंग नहीं कर सकता और न ही मैं खड़ा हो सकता हूं। जहां भी जाता हूं। वाहनों को चेक करता हूं। कागजात नहीं मिलने पर कार्रवाई करता हूं।
-सोहेल अहमद, एआरटीओ प्रवर्तन