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बुर्रा-अहीरवारा के शिवमंदिर में जलाभिषेक का खास महत्व
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उझानी (बदायूं)। भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक महाशिवरात्रि का पर्व पूरे ‘बारये’ में खास अहमियत रखता है। ‘बारये’ किसी एक गांव का नाम नहीं, इससे जुड़े 12 गांवों को सामूहिक रूप से एक साथ पुकारकर लिया जाता है। इसी के बुर्रा-अहीरवारा के हिस्से में प्राचीन शिवमंदिर है। महाशिवरात्रि पर पुण्य तो जलाभिषेक करने वाला ही कमाता है लेकिन यहां के लोग ‘अतिथि देवो भव’ की परंपरा निभाते हुए जलाभिषेक के बाद मेहमानों को घर बुलाकर लजीज पकवान खिलाए बगैर घर वापस नहीं भेजते।
बुर्रा-अहीरवारा के शिवमंदिर में जलाभिषेक के लिए हजारों की संख्या में जो श्रद्धालु पहुंचे, उनमें ‘बारये’ से जुड़े गांवों के नाते-रिश्तेदारों की संख्या भी कम नहीं होती। इलाके के लोगों की मानें तो यही एक ऐसा दिन होता है जिसके लिए रिश्तेदारों और नजदीकियों के आने का इंतजार किया जाता है। ‘बारये’ से जुड़े बुर्रा फरीदपुर, अहीरवारा, फतेहपुर, तेहरा, बेनीनगला आदि एक दर्जन गांवों में जलाभिषेक के साथ ही जश्न का माहौल बनने लगता है। जलाभिषेक के बाद घरों में पूड़ी-पकवान बनने शुरू हो जाते हैं। इलाके के रंधावा यादव और संतराम सिंह ने बताया कि पूरे ‘बारये’ के लोगों को दो बार पुण्य अर्जित होता है। एक तो जलाभिषेक करने, दूसरा अतिथि देवो भव की परंपरा निभाते हुए मेहमानों को सम्मान देने से। घरों में मंगलगीत भी गाए जाते हैं। यह भी महिलाओं का अपना एक अलग अंदाज है।
50 हजार से अधिक शिवभक्तों के पहुंचने का अनुमान
बुर्रा-अहीरवारा के शिवमंदिर में जलाभिषेक का दौर तड़के करीब पांच बजे से शुरू हो गया। पूर्वाह्न में शिवभक्तों की संख्या में इजाफा हुआ तो लाइन आधा किलोमीटर तक पहुंच गई। सीओ और कोतवाल के साथ मंदिर के सेवादारों ने भी शिवभक्तों को नियंत्रित रखने के लिए मशक्कत की। भीड़ के मद्देनजर महिला पुलिस कर्मियों को भी लगाया गया था। पुलिस के एक अनुमान के अनुसार, अपराह्न तक 50 हजार से अधिक शिवभक्तों ने जलाभिषेक किया।
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बुर्रा-अहीरवारा के शिवमंदिर में जलाभिषेक के लिए हजारों की संख्या में जो श्रद्धालु पहुंचे, उनमें ‘बारये’ से जुड़े गांवों के नाते-रिश्तेदारों की संख्या भी कम नहीं होती। इलाके के लोगों की मानें तो यही एक ऐसा दिन होता है जिसके लिए रिश्तेदारों और नजदीकियों के आने का इंतजार किया जाता है। ‘बारये’ से जुड़े बुर्रा फरीदपुर, अहीरवारा, फतेहपुर, तेहरा, बेनीनगला आदि एक दर्जन गांवों में जलाभिषेक के साथ ही जश्न का माहौल बनने लगता है। जलाभिषेक के बाद घरों में पूड़ी-पकवान बनने शुरू हो जाते हैं। इलाके के रंधावा यादव और संतराम सिंह ने बताया कि पूरे ‘बारये’ के लोगों को दो बार पुण्य अर्जित होता है। एक तो जलाभिषेक करने, दूसरा अतिथि देवो भव की परंपरा निभाते हुए मेहमानों को सम्मान देने से। घरों में मंगलगीत भी गाए जाते हैं। यह भी महिलाओं का अपना एक अलग अंदाज है।
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50 हजार से अधिक शिवभक्तों के पहुंचने का अनुमान
बुर्रा-अहीरवारा के शिवमंदिर में जलाभिषेक का दौर तड़के करीब पांच बजे से शुरू हो गया। पूर्वाह्न में शिवभक्तों की संख्या में इजाफा हुआ तो लाइन आधा किलोमीटर तक पहुंच गई। सीओ और कोतवाल के साथ मंदिर के सेवादारों ने भी शिवभक्तों को नियंत्रित रखने के लिए मशक्कत की। भीड़ के मद्देनजर महिला पुलिस कर्मियों को भी लगाया गया था। पुलिस के एक अनुमान के अनुसार, अपराह्न तक 50 हजार से अधिक शिवभक्तों ने जलाभिषेक किया।
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