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आखिर कहां गायब हैं 62 बैकलॉग कर्मचारी
Updated Sun, 08 Jul 2018 10:42 PM IST
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आखिर कहां गायब हैं
62 बैकलॉग कर्मचारी
- पांच वर्ष पूर्व पालिका में हुई थी इनकी नियुक्ति
- विभाग के पास नही मौजूद है डाटा, वेतन हर माह हो रहा जारी
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। बदायूं नगर पालिका परिषद में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है पांच साल पहले जिन 62 बैकलॉग सफाई कर्मचारियों को नियुक्ति दी गई। उनमें किसी भी कर्मचारी का नियुक्ति से जुड़ा डाटा पालिका प्रशासन के पास नहीं है चौंकाने वाली बात तो यह है कि इन सभी कर्मचारियों का प्रतिमाह वेतन भी निकल रहा है। सवाल उठना लाजमी है आखिर पालिका प्रशासन के अधिकारियों ने इस मामले क्यों गंभीरता नहीं दिखाई या फिर उनके अधीनस्थों ने उन्हें भी इस बात से गुमराह रखा। जब इस मामले को चेयरमैन दीपमाला गोयल सामने रखा गया तो वह भी इस बात को स्वीकार कर रहीं हैं कि यह बात सही है। फिर भी उन्होंने दावा किया कि जब उनके संज्ञान में यह मामला आया तो उन्होने गोपनीय स्तर से कई कर्मचारियों का डाटा कलेक्ट कर लिया है।
शहर का क्षेत्रफल लगातार बढ़ रहा है। कई नई कॉलोनियां शहर से जुड़ गई हैं। जाहिर है कि आबादी भी बीते पांच साल में काफी बढ़ चुकी है। नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पालिका प्रशासन की होती है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा सफाई व्यवस्था का रहता है। प्रदेश के शहरों में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शासन की ओर से बैकलॉग के तहत सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की गई। नियुक्ति के लिए वही सारी औपचारिकताएं निभाई गईं, आमतौर पर जो राजकीय सेवा में आने वाले कर्मचारियों के लिए होती हैं। बैकलॉग भर्ती प्रक्रिया के तहत बदायूं पालिका के लिए 62 सफाई कर्मचारी मिले। इनमें ज्यादातर अधिक शिक्षित हैं। काबिले गौर हो जब किसी कर्मचारी की नियुक्ति होती है तो उसका नियुक्ति से जुड़ा डाटा संबंधित संस्था के पास होता है और कर्मचारी को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किया जाता है। मेडिकल ऑफीसर का फिटनेस प्रमाण पत्र इनसे लिया जाता है। इसका पूरा रिकॉर्ड संबंधित अनुभाग के मुखिया के पास रहता है। उसी रिकॉर्ड के आधार पर कर्मचारी के वेतन में हर वर्ष इंक्रीमेंट मिलता है। साथ ही वर्ष में शासन की ओर से दिए जाने वाला डीए भी शामिल रहता है। कर्मचारी का बैंक खाता नंबर भी विभाग के पास रहता है उसी के जरिए कर्मचारी का वेतन या डीए का पैसा भेजा जाता है। मजेदार बात यह है कि पांच साल पहले पालिका में लगे 62 बैकलॉग कर्मचारियों का पालिका के पास उनकी नियुक्ति से जुड़ा किसी भी प्रकार कोई रिकॉर्ड नहीं है। इन बैकलॉग कर्मचारियों का कहना है कि पालिका के पास उनका रिकॉर्ड क्यों नही हैं इसका पता उन्हें नहीं है, वह तो सिर्फ यह जानते हैं कि नियुक्ति के समय उन्होंने अपने सभी अभिलेख जमा किए थे।
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शासन को भेजी है शिकायत
अखिल भारतीय सफाई मजदूर मोर्चा के जिलाध्यक्ष अनिल वाल्मीकि ने बताया कि पांच साल पूर्व इनकी नियुक्ति की गई थी, जो कि मोर्चा से जुड़े हुए थे। इन सभी की नियुक्ति से जुड़ा हमारे डाटा पास मौजूद है पालिका प्रशासन गुमराह कर रहा है। इन कर्मचारियों को शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी मिलनी चाहिए थी लेकिन विभागीय खेल के चलते इन्हें जन प्रतिनिधियों व जिला प्रशासन के आला अधिकारियों की चाकरी में लगा दिया जाता है।
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वर्जन ---
पांच साल पूर्व बैकलॉग कर्मचारी नियुक्ति किए गए थे, मामला संज्ञान में आने के बाद से ही गोपनीयता से इसकी जांच की गई थी। इन 62 कर्मचारी में से 41 कर्मचारियों को शहर की सफाई और कार्यालय से अटैच्ड कर लिया गया है। इस मामले में लिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-दीपमाला गोयल, नगर पालिका चेयरमैन
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मामला मेरे संज्ञान में नहीं है अगर ऐसा हुआ है तो यह गंभीर विषय है मामले की जांच कराकर संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-संजय कुुमार सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट/ ईओ
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62 बैकलॉग कर्मचारी
- पांच वर्ष पूर्व पालिका में हुई थी इनकी नियुक्ति
- विभाग के पास नही मौजूद है डाटा, वेतन हर माह हो रहा जारी
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। बदायूं नगर पालिका परिषद में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है पांच साल पहले जिन 62 बैकलॉग सफाई कर्मचारियों को नियुक्ति दी गई। उनमें किसी भी कर्मचारी का नियुक्ति से जुड़ा डाटा पालिका प्रशासन के पास नहीं है चौंकाने वाली बात तो यह है कि इन सभी कर्मचारियों का प्रतिमाह वेतन भी निकल रहा है। सवाल उठना लाजमी है आखिर पालिका प्रशासन के अधिकारियों ने इस मामले क्यों गंभीरता नहीं दिखाई या फिर उनके अधीनस्थों ने उन्हें भी इस बात से गुमराह रखा। जब इस मामले को चेयरमैन दीपमाला गोयल सामने रखा गया तो वह भी इस बात को स्वीकार कर रहीं हैं कि यह बात सही है। फिर भी उन्होंने दावा किया कि जब उनके संज्ञान में यह मामला आया तो उन्होने गोपनीय स्तर से कई कर्मचारियों का डाटा कलेक्ट कर लिया है।
शहर का क्षेत्रफल लगातार बढ़ रहा है। कई नई कॉलोनियां शहर से जुड़ गई हैं। जाहिर है कि आबादी भी बीते पांच साल में काफी बढ़ चुकी है। नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पालिका प्रशासन की होती है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा सफाई व्यवस्था का रहता है। प्रदेश के शहरों में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शासन की ओर से बैकलॉग के तहत सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की गई। नियुक्ति के लिए वही सारी औपचारिकताएं निभाई गईं, आमतौर पर जो राजकीय सेवा में आने वाले कर्मचारियों के लिए होती हैं। बैकलॉग भर्ती प्रक्रिया के तहत बदायूं पालिका के लिए 62 सफाई कर्मचारी मिले। इनमें ज्यादातर अधिक शिक्षित हैं। काबिले गौर हो जब किसी कर्मचारी की नियुक्ति होती है तो उसका नियुक्ति से जुड़ा डाटा संबंधित संस्था के पास होता है और कर्मचारी को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किया जाता है। मेडिकल ऑफीसर का फिटनेस प्रमाण पत्र इनसे लिया जाता है। इसका पूरा रिकॉर्ड संबंधित अनुभाग के मुखिया के पास रहता है। उसी रिकॉर्ड के आधार पर कर्मचारी के वेतन में हर वर्ष इंक्रीमेंट मिलता है। साथ ही वर्ष में शासन की ओर से दिए जाने वाला डीए भी शामिल रहता है। कर्मचारी का बैंक खाता नंबर भी विभाग के पास रहता है उसी के जरिए कर्मचारी का वेतन या डीए का पैसा भेजा जाता है। मजेदार बात यह है कि पांच साल पहले पालिका में लगे 62 बैकलॉग कर्मचारियों का पालिका के पास उनकी नियुक्ति से जुड़ा किसी भी प्रकार कोई रिकॉर्ड नहीं है। इन बैकलॉग कर्मचारियों का कहना है कि पालिका के पास उनका रिकॉर्ड क्यों नही हैं इसका पता उन्हें नहीं है, वह तो सिर्फ यह जानते हैं कि नियुक्ति के समय उन्होंने अपने सभी अभिलेख जमा किए थे।
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शासन को भेजी है शिकायत
अखिल भारतीय सफाई मजदूर मोर्चा के जिलाध्यक्ष अनिल वाल्मीकि ने बताया कि पांच साल पूर्व इनकी नियुक्ति की गई थी, जो कि मोर्चा से जुड़े हुए थे। इन सभी की नियुक्ति से जुड़ा हमारे डाटा पास मौजूद है पालिका प्रशासन गुमराह कर रहा है। इन कर्मचारियों को शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी मिलनी चाहिए थी लेकिन विभागीय खेल के चलते इन्हें जन प्रतिनिधियों व जिला प्रशासन के आला अधिकारियों की चाकरी में लगा दिया जाता है।
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पांच साल पूर्व बैकलॉग कर्मचारी नियुक्ति किए गए थे, मामला संज्ञान में आने के बाद से ही गोपनीयता से इसकी जांच की गई थी। इन 62 कर्मचारी में से 41 कर्मचारियों को शहर की सफाई और कार्यालय से अटैच्ड कर लिया गया है। इस मामले में लिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-दीपमाला गोयल, नगर पालिका चेयरमैन
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मामला मेरे संज्ञान में नहीं है अगर ऐसा हुआ है तो यह गंभीर विषय है मामले की जांच कराकर संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-संजय कुुमार सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट/ ईओ