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हत्या-डकैती के जुर्म में चार बदमाशों को उम्रकैद
Updated Tue, 14 Aug 2018 12:05 AM IST
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हत्या और डकैती के जुर्म में
चार बदमाशों को उम्रकैद
15-15 हजार का जुर्माना भी लगाया
सत्रह साल पहले बिल्सी के गांव रिसौली में हुई थी वारदात
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। डकैती और हत्या के जुर्म में अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय-डकैती कोर्ट राजकुमार सिंह ने चार बदमाशों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही सभी पर 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदा होने पर जुर्माने की आधी धनराशि मृतक के आश्रितों को देने का भी आदेश सुनाया है।
यह सनसनीखेज वारदात 17 साल पहले बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव रिसौली में हुई थी। गांव निवासी वीरपाल पुत्र टीकाराम ने 11-12 सितंबर 2001 को रिपोर्ट लिखाई थी कि वह अपने भाई यज्ञपाल, पिता टीकाराम, मां जयदेवी और बच्चों के साथ घर पर सो रहा था। रात करीब एक बजे आठ-दस बदमाश घर में घुस आए। तलाशी लेने के नाम पर सभी को बंधक बना लिया। जब विरोध किया तो बदमाशों ने सरिया और बंदूक की नालों से पिता टीकाराम और मां जयदेवी को बुरी तरह से पीटा। पिता दरवाजे की ओर भागे तब बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। बदमाशों ने ताले तोड़कर घर में रखे सोने-चांदी के आभूषण और नकदी लूट ली। उसी रात गांव के ही सुरेश पुत्र गोकिल के घर में भी डाका डाला। बिजली की रोशनी में वीरपाल और सुरेश ने बदमाशों को पहचान लिया था वो सभी गांव के ही थे। तब वीरपाल और सुेरश ने इस घटना की रिपोर्ट गांव निवासी दिनेश पुत्र नत्थू सिंह, वीरपाल पुत्र लटूरी, पप्पू पुत्र सिराज और मन्नू और बबलू पुत्रगण बालिस्टर, मुनेंद्र पुत्र ब्रजेंद्र सिंह के खिलाफ दर्ज कराई। इलाज के दौरान करीब 19 दिन बाद टीकाराम पुत्र प्रानसुख की मौत हो गई।
पुलिस ने सभी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। पप्पू और बबलू के गैरहाजिर होने पर उनकी पत्रावली अलग कर दी गई।
अपर सत्र न्यायाधीश राजकुमार सिंह ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी ज्ञानस्वरूप गुप्ता और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलील को सुनने के बाद मुजरिम दिनेश, वीरपाल, मन्नू सिंह और मुनेंद्र को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इन सभी पर 15-15 हजार का अर्थदंड भी लगाया है।
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चार बदमाशों को उम्रकैद
15-15 हजार का जुर्माना भी लगाया
सत्रह साल पहले बिल्सी के गांव रिसौली में हुई थी वारदात
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। डकैती और हत्या के जुर्म में अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय-डकैती कोर्ट राजकुमार सिंह ने चार बदमाशों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही सभी पर 15-15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदा होने पर जुर्माने की आधी धनराशि मृतक के आश्रितों को देने का भी आदेश सुनाया है।
यह सनसनीखेज वारदात 17 साल पहले बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव रिसौली में हुई थी। गांव निवासी वीरपाल पुत्र टीकाराम ने 11-12 सितंबर 2001 को रिपोर्ट लिखाई थी कि वह अपने भाई यज्ञपाल, पिता टीकाराम, मां जयदेवी और बच्चों के साथ घर पर सो रहा था। रात करीब एक बजे आठ-दस बदमाश घर में घुस आए। तलाशी लेने के नाम पर सभी को बंधक बना लिया। जब विरोध किया तो बदमाशों ने सरिया और बंदूक की नालों से पिता टीकाराम और मां जयदेवी को बुरी तरह से पीटा। पिता दरवाजे की ओर भागे तब बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। बदमाशों ने ताले तोड़कर घर में रखे सोने-चांदी के आभूषण और नकदी लूट ली। उसी रात गांव के ही सुरेश पुत्र गोकिल के घर में भी डाका डाला। बिजली की रोशनी में वीरपाल और सुरेश ने बदमाशों को पहचान लिया था वो सभी गांव के ही थे। तब वीरपाल और सुेरश ने इस घटना की रिपोर्ट गांव निवासी दिनेश पुत्र नत्थू सिंह, वीरपाल पुत्र लटूरी, पप्पू पुत्र सिराज और मन्नू और बबलू पुत्रगण बालिस्टर, मुनेंद्र पुत्र ब्रजेंद्र सिंह के खिलाफ दर्ज कराई। इलाज के दौरान करीब 19 दिन बाद टीकाराम पुत्र प्रानसुख की मौत हो गई।
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पुलिस ने सभी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। पप्पू और बबलू के गैरहाजिर होने पर उनकी पत्रावली अलग कर दी गई।
अपर सत्र न्यायाधीश राजकुमार सिंह ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी ज्ञानस्वरूप गुप्ता और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलील को सुनने के बाद मुजरिम दिनेश, वीरपाल, मन्नू सिंह और मुनेंद्र को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इन सभी पर 15-15 हजार का अर्थदंड भी लगाया है।
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