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Bijnor News: महिला सशक्तिकरण से ही समाज और देश को मिलेगी मजबूती

Sat, 08 Mar 2025 12:57 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Sat, 08 Mar 2025 12:57 AM IST
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Women empowerment will strengthen the society and the country
जनौर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में भाग लेती महिलाएं। संवाद
बिजनौर। अंतर राष्ट्रीय महिला दिवस पर अमर उजाला की ओर से महिला संवाद का आयोजन किया गया। जिसमें महिलाओं ने बेबाकी से अपनी बात रखी। हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी मौजूदगी का अहसास कराया है। हालांकि अभी सशक्तिकरण का पहलू तभी पूरा होगा जब दूर दराज के गांव की महिला भी अपने अधिकार के प्रति जागरूक होगी।
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माता पिता की सपोर्ट होनी चाहिए। लड़कियों को भी अपने माता पिता के विश्वास पर खरा उतरना चाहिए। अपना लक्ष्य तय कर लगन और मेहनत से पढ़ाई करें। तभी सशक्त बन सकेंगी। - जूही, अधिवक्ता
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सशक्त बनने के लिए सपने देखें और पूरी निष्ठा के साथ पूरा करने के लिए जुनून पैदा करें। परिवार के विश्वास के साथ आगे बढ़ने पर अभिभावकों का साथ हमेशा मिलता रहता है। - पूजा, अधिवक्ता
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अभिभावकों को बेटी और बेटे में कोई भेद नहीं करना चाहिए। दोनों को समान मानकर पारिवारिक संस्कार दें। महिलाओं को सशक्त बनने के लिए मानसिक और शारीरिक स्वस्थ होना जरुरी है। -डॉ. प्रीति चौहान, असिस्टेंट प्रोफेसर मेडिकल कॉलेज बिजनौर

महिला सशक्तिकरण के लिए अभी दूर दराज के गांव में जागरुकता की जरूरत है। वहां गोष्ठी आदि कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को मजबूत बनाने पर काम करना चाहिए। - सुमन चौधरी, समाजसेवी

बेटी और बेटे की परवरिश एक हो, उन्हें समाज में आने जाने और बात करने की आजादी हो।लड़कियों को भी करियर बनाने के लिए उच्च शिक्षा का मौका दिया जाए। ताकि लड़कों से बराबरी कर सकें। - संगीता वामल, अधिवक्ता

अभी भी लड़की और लड़के का भेद तथा दहेज को लेकर केस आ रहे हैं। इसलिए हमें समाज को जागरुक करना है कि वह बहू को बहू नहीं, बेटी समझें। बेटी की तरह व्यवहार करें। - संगीना जैन, सदस्य महिला आयोग

महिलाओं का सामाजिक स्तर बढ़ना चाहिए। महिला गृहणी हो या नौकरीपेशा, वह समाज में एक दूसरी महिलाओं से जुड़ी होनी चाहिए। ताकि मन की बात उनसे कह सकें। - अभरा पाठक

पुराने परिवेश और वर्तमान में अंतर हो गया है। महिलाओं को सम्मान मिल रहा है। महिलाएं हर क्षेत्र में बढ़चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। जोकि सफलता के शिखर को भी छू रही हैं। - सरिता सैनी, सदस्य दीपा शिखा संस्था

आने वाली पीढ़ी के बच्चों को संस्कार सिखाने में कमी छोड़ रहे हैं। संस्कार सबसे महत्वपूर्ण हैं। परिवार में तीसरे के हस्तक्षेप से खलल पड़ता है जोकि परिवार टूटने का कारण बन जाता है। - प्रीतिका राठी, शिक्षिका

लड़की और लड़कें फिल्मी लाइफ स्टाइल की नकल ना करें। हकीकत में दुनिया फिल्मी अंदाज में नहीं चलती। कल्पना और हकीकत में बड़ा अंतर होता है। - भारती सिंह, समाजसेवी

समाज में देखा जाता है कि बेटी और बहू के प्रति अलग अलग व्यवहार होता है। जोकि गलत है। मां बहू की भी होती है और बेटी की भी होती है, इसलिए मां समानता के साथ दोनों से व्यवहार करे। - शोभा शर्मा, सदस्य परिवार परामर्श केंद्र

परिवार के विश्वास की वजह से हमें घर से बाहर निकलने का मौका मिलता है। ऐसे में हम अच्छी पढ़ाई करके ही सशक्त बन सकते हैं। जीवन का लक्ष्य केंद्रित कर तैयारी करें। - सलोनी, छात्रा


संस्कार युवाओं को दिए जाएं कि वह अन्य लड़कियों को भी अपने परिवार का ही सदस्य समझें। जब हर लड़का सही संस्कारी होगा तो लड़कियां भी डर से दूर रहेंगी। - वर्णिका, छात्रा
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