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ताउते तूफान से रुकी यूरिया की खेप
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ताउते तूफान से रुकी यूरिया की खेप
बिजनौर। जिले में खरीफ सीजन में 1.5 लाख मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत होगी। यूरिया की आपूर्ति को ताउते तूफान ने प्रभावित किया है, लेकिन यह जल्दी ही पूरी होने वाली है। पिछले साल किसानों को होने वाली असुविधा से बचाने के लिए कृषि विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। किसानों के दूसरे राज्यों से यूरिया की खेप मंगवाई जा रही है।
खरीफ की फसलों का सीजन शुरू हो चुका है। इसमें गन्ना और धान सबसे प्रमुख फसल हैं। इन फसलों में किसान काफी यूरिया डालते हैं। पिछले साल किसानों ने गन्ने का रकबा साढ़े 11 प्रतिशत बढ़ा दिया था। जिले में यूरिया की किल्लत पैदा हो गई थी। धामपुर क्षेत्र में यूरिया लेने के लिए किसानों की लाइन दिन भर दुकानों पर लगी रहती थी। इस बार भी गन्ना रकबा पिछले साल से कम नहीं रहेगा, यानि जितना यूरिया खेतों में पिछले साल डाला गया था उससे कम इस बार भी नहीं लगेगा। कृषि विभाग ने इस बार खरीफ में फसलों में डालने के लिए एक लाख पांच हजार मीट्रिक टन यूरिया की खपत का अनुमान लगाया है। खरीफ का सीजन सितंबर तक चलेगा। इसमें से 20 हजार मीट्रिक टन यूरिया किसानों को दिया जा चुका है और करीब 19 हजार मीट्रिक टन यूरिया दुकानों में अभी मौजूद है। यूरिया की दुकानों पर फिर से किसानों की भीड़ लगने लगी है। किसान एक ही बार में पूरे सीजन का यूरिया लेने आ रहे हैं। किसानों के लिए गुजरात से दो रैक में छह हजार मीट्रिक टन यूरिया मंगवाया जा रहा था। ताउते तूफान की वजह से ये आपूर्ति प्रभावित हुई है लेकिन एक-दो दिन में ही ये खेप बिजनौर पहुंच जाएगी।
नहीं है यूरिया की कमी
जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्र के अनुसार जिले में यूरिया की कोई कमी नहीं है। लगातार यूरिया की खेप मंगवाई जा रही हैं। किसान पूरे सीजन के बजाए एक-एक महीने में प्रयोग होने वाला यूरिया खरीदें। इससे दुकानों पर ज्यादा भीड़ नहीं लगेगी।
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बिजनौर। जिले में खरीफ सीजन में 1.5 लाख मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत होगी। यूरिया की आपूर्ति को ताउते तूफान ने प्रभावित किया है, लेकिन यह जल्दी ही पूरी होने वाली है। पिछले साल किसानों को होने वाली असुविधा से बचाने के लिए कृषि विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। किसानों के दूसरे राज्यों से यूरिया की खेप मंगवाई जा रही है।
खरीफ की फसलों का सीजन शुरू हो चुका है। इसमें गन्ना और धान सबसे प्रमुख फसल हैं। इन फसलों में किसान काफी यूरिया डालते हैं। पिछले साल किसानों ने गन्ने का रकबा साढ़े 11 प्रतिशत बढ़ा दिया था। जिले में यूरिया की किल्लत पैदा हो गई थी। धामपुर क्षेत्र में यूरिया लेने के लिए किसानों की लाइन दिन भर दुकानों पर लगी रहती थी। इस बार भी गन्ना रकबा पिछले साल से कम नहीं रहेगा, यानि जितना यूरिया खेतों में पिछले साल डाला गया था उससे कम इस बार भी नहीं लगेगा। कृषि विभाग ने इस बार खरीफ में फसलों में डालने के लिए एक लाख पांच हजार मीट्रिक टन यूरिया की खपत का अनुमान लगाया है। खरीफ का सीजन सितंबर तक चलेगा। इसमें से 20 हजार मीट्रिक टन यूरिया किसानों को दिया जा चुका है और करीब 19 हजार मीट्रिक टन यूरिया दुकानों में अभी मौजूद है। यूरिया की दुकानों पर फिर से किसानों की भीड़ लगने लगी है। किसान एक ही बार में पूरे सीजन का यूरिया लेने आ रहे हैं। किसानों के लिए गुजरात से दो रैक में छह हजार मीट्रिक टन यूरिया मंगवाया जा रहा था। ताउते तूफान की वजह से ये आपूर्ति प्रभावित हुई है लेकिन एक-दो दिन में ही ये खेप बिजनौर पहुंच जाएगी।
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नहीं है यूरिया की कमी
जिला कृषि अधिकारी अवधेश मिश्र के अनुसार जिले में यूरिया की कोई कमी नहीं है। लगातार यूरिया की खेप मंगवाई जा रही हैं। किसान पूरे सीजन के बजाए एक-एक महीने में प्रयोग होने वाला यूरिया खरीदें। इससे दुकानों पर ज्यादा भीड़ नहीं लगेगी।
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