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मौअज्जमपुर-गजरौला रेल ट्रैक पर 110 की स्पीड का होगा ट्रायल
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मौअज्जमपुर-गजरौला रेल ट्रैक पर 110 की स्पीड से दौडे़गी ट्रेन
बिजनौर। मौअज्जमपुर वाया बिजनौर गजरौला रेल ट्रैक को बदल दिया गया है। जिसकी 110 किलोमीटर की स्पीड का आज ट्रायल किया जाएगा। ट्रायल के बाद तय किया जाना है कि इस ट्रैक पर कितनी स्पीड से ट्रेन दौड़ाई जा सकेगी। फिलहाल पचास किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ही ट्रेन इस ट्रैक पर दौड़ पाती है।
पिछले दो सालों से मौअज्जमपुर से बिजनौर होते हुए गजरौला तक जाने वाली रेल लाइन को बदलने का काम किया जा रहा था। 90 प्रतिशत से अधिक काम हो चुका है। अब केवल झालू से बिजनौर के बीच स्लीपर और ट्रैक को बदलना बाकी रह गया है। फिर भी ट्रायल की तारीख तय कर दी गई है। आज 110 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार का ट्रायल किया जाएगा। ओएमएस मशीन से स्पीड का ट्रायल होना है। जिसमें यह देखा जाएगा कि किस किस जगह पर ट्रैक मजबूत है और कितनी स्पीड से ट्रेन दौड़ाई जा सकेगी।
सीनियर सेक्शन इंजीनियर रेल पथ आरबी शर्मा ने बताया कि स्पीड का ट्रालय किया जाएगा। इस दौरान ट्रायल की मशीन तेज गति से गुजरेगी। ऐसे में रेल लाइन के आस पास से गुजरने और रेल लाइन को पार करने की लोगों पर पाबंदी है। ट्रायल के बाद उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट दी जाएगी। जिसके बाद तीन से चार महीने में तेज स्पीड से ट्रेन चलाने की स्वीकृति मिल जाएगी। अभी तक अधिकतम पचास किमी प्रति घंटा से ही ट्रेन चलाई जा रही है।
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बिजनौर। मौअज्जमपुर वाया बिजनौर गजरौला रेल ट्रैक को बदल दिया गया है। जिसकी 110 किलोमीटर की स्पीड का आज ट्रायल किया जाएगा। ट्रायल के बाद तय किया जाना है कि इस ट्रैक पर कितनी स्पीड से ट्रेन दौड़ाई जा सकेगी। फिलहाल पचास किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ही ट्रेन इस ट्रैक पर दौड़ पाती है।
पिछले दो सालों से मौअज्जमपुर से बिजनौर होते हुए गजरौला तक जाने वाली रेल लाइन को बदलने का काम किया जा रहा था। 90 प्रतिशत से अधिक काम हो चुका है। अब केवल झालू से बिजनौर के बीच स्लीपर और ट्रैक को बदलना बाकी रह गया है। फिर भी ट्रायल की तारीख तय कर दी गई है। आज 110 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार का ट्रायल किया जाएगा। ओएमएस मशीन से स्पीड का ट्रायल होना है। जिसमें यह देखा जाएगा कि किस किस जगह पर ट्रैक मजबूत है और कितनी स्पीड से ट्रेन दौड़ाई जा सकेगी।
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सीनियर सेक्शन इंजीनियर रेल पथ आरबी शर्मा ने बताया कि स्पीड का ट्रालय किया जाएगा। इस दौरान ट्रायल की मशीन तेज गति से गुजरेगी। ऐसे में रेल लाइन के आस पास से गुजरने और रेल लाइन को पार करने की लोगों पर पाबंदी है। ट्रायल के बाद उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट दी जाएगी। जिसके बाद तीन से चार महीने में तेज स्पीड से ट्रेन चलाने की स्वीकृति मिल जाएगी। अभी तक अधिकतम पचास किमी प्रति घंटा से ही ट्रेन चलाई जा रही है।
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