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ऑनलाइन कवि गोष्ठी
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बिजनौर। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं प्रसिद्ध समाजसेवी स्वर्गीय जगदीश प्रसाद जाखेटिया की पुण्यतिथि पर बिजनौरी काव्य मंच की ओर से आयोजित ऑनलाइन कवि सम्मेलन के माध्यम से उन्हें विनम्र श्रद्घांजलि दी गई।
रविवार को ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवियों ने काव्यात्मक शैली में अपने भाव रखे। प्रदीप डेजी जी ने कहा कि महफ़िल महफ़िल आना जाना रहता है, बस मिलने का एक बहाना रहता है। चलते चलते आज यहां तक पहुंचा हूं, मेरे भीतर एक जमाना रहता है। मनोज अबोध ने कुछ यूं कहा जीवन में हमने जिए, रिश्ते बड़े विचित्र। जड़ें कुतरते ही मिले, समझा जिनको मित्र। रचना शास्त्री बोलीं हमें आज मंदिर में ये भगवान से मिलना हो, अगर हम से तो तुम्हारी ही सूरत में मिले। प्रमोद शर्मा प्रेम ने माना कि किसी पेड़ ने कुछ फल नहीं दिए उम्र भर की छाया की कीमत ही कुछ नहीं। नीरज सिंघल ने कहा कि अगर कोई पता पूछे तो बस इतना कह देना तुम्हारे दिल में रहता हूं नहीं कोई पता मेरा, जलाकर दीप रख देना माटी का अंधेरों में वही माटी दिया है बस अंधेरो में पता मेरा।
कुमार शिवेंद्र बोले तुझ बिन त्यौहार अधूरे हैं, मन के श्रंगार अधूरे हैं। तुझको मैं कैसे बतलाऊं, मेरे मनुहार अधूरे हैं। हैदराबाद से शिखा बाहेती ने भावनात्मक काव्य शैली में उनकी जीवन शैली से अवगत करा कर कुछ समय के लिए कार्यक्रम को भाव विभोर कर दिया। उभरते हुए बाल कलाकार अक्षत सिंघल ने धार्मिक भजन से सभी उपस्थित श्रोताओं का मन जीत लिया। अमेरिका से गीता शर्मा, मुंबई से सेठ दिलीप काबरा, जयपुर से प्रसिद्ध समाजसेविका उमा अजमेरा, दिल्ली से वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक मदन मोहन माहेश्वरी, नरेंद्र निहार, ग्वालियर से प्रोफेसर अमिताभ माहेश्वरी, पूर्व सीनियर केमिस्ट विनोद वर्मा जी, अहमदाबाद से सीए प्रशांत माहेश्वरी, बिजनौर से रमेश% राजहंस आदि अनेकों सामाजिक राजनीतिक एवं पत्रकार जगत से जुड़ी हस्तियों ने अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
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रविवार को ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवियों ने काव्यात्मक शैली में अपने भाव रखे। प्रदीप डेजी जी ने कहा कि महफ़िल महफ़िल आना जाना रहता है, बस मिलने का एक बहाना रहता है। चलते चलते आज यहां तक पहुंचा हूं, मेरे भीतर एक जमाना रहता है। मनोज अबोध ने कुछ यूं कहा जीवन में हमने जिए, रिश्ते बड़े विचित्र। जड़ें कुतरते ही मिले, समझा जिनको मित्र। रचना शास्त्री बोलीं हमें आज मंदिर में ये भगवान से मिलना हो, अगर हम से तो तुम्हारी ही सूरत में मिले। प्रमोद शर्मा प्रेम ने माना कि किसी पेड़ ने कुछ फल नहीं दिए उम्र भर की छाया की कीमत ही कुछ नहीं। नीरज सिंघल ने कहा कि अगर कोई पता पूछे तो बस इतना कह देना तुम्हारे दिल में रहता हूं नहीं कोई पता मेरा, जलाकर दीप रख देना माटी का अंधेरों में वही माटी दिया है बस अंधेरो में पता मेरा।
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कुमार शिवेंद्र बोले तुझ बिन त्यौहार अधूरे हैं, मन के श्रंगार अधूरे हैं। तुझको मैं कैसे बतलाऊं, मेरे मनुहार अधूरे हैं। हैदराबाद से शिखा बाहेती ने भावनात्मक काव्य शैली में उनकी जीवन शैली से अवगत करा कर कुछ समय के लिए कार्यक्रम को भाव विभोर कर दिया। उभरते हुए बाल कलाकार अक्षत सिंघल ने धार्मिक भजन से सभी उपस्थित श्रोताओं का मन जीत लिया। अमेरिका से गीता शर्मा, मुंबई से सेठ दिलीप काबरा, जयपुर से प्रसिद्ध समाजसेविका उमा अजमेरा, दिल्ली से वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक मदन मोहन माहेश्वरी, नरेंद्र निहार, ग्वालियर से प्रोफेसर अमिताभ माहेश्वरी, पूर्व सीनियर केमिस्ट विनोद वर्मा जी, अहमदाबाद से सीए प्रशांत माहेश्वरी, बिजनौर से रमेश% राजहंस आदि अनेकों सामाजिक राजनीतिक एवं पत्रकार जगत से जुड़ी हस्तियों ने अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
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