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सरकारी छाया में स्योहारा का श्मशान हुआ वीरान

Thu, 05 Dec 2019 12:36 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 05 Dec 2019 12:36 AM IST
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Sayohara's crematorium deserted in government shadow
सरकारी छाया में स्योहारा का श्मशान हुआ वीरान
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स्योहारा। किसी भी विकास में सरकारी या निजी संस्था के दखल का बड़ा फर्क पड़ता है। हम बात कर रहे हैं स्योहारा के श्मशान घाट का। शासन द्वारा इस के सौंदर्यीकरण के लिए वर्ष 2016 में ढाई करोड़ रुपये दिए गए। इतने रुपये लगने के बाद भी श्मशान घाट का सौंदर्यीकरण वैसा नहीं हो सका जो वर्ष 2003 में नागरिकों द्वारा बनाई गई संस्था द्वारा मात्र आपसी चंदे द्वारा कर दिया गया था।
वर्ष 2006 से पूर्व नगर के श्मशान घाट का प्रबंधन समाज द्वारा बनाई गई कमेटी के हाथों में था। 25 जुलाई 1975 को नगर के शाहू सुमत प्रसाद जैन (अब स्वर्गीय) ने श्मशान के सुधार के लिए श्मशान घाट सुधार समिति बनाई। फिर शुरू हुआ सुधार। मुख्य द्वार, आने वालों के बैठने की सुविधा, फव्वारा आदि लगे। चारों ओर पेड़ पौधे आदि लगाए गए। प्रबंधन के लिए यहां रहने के लिए साधु के लिए कमरा आदि बन गया।
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लंबी दूरी के यात्री वाहन, शादी वाहन, तीर्थ यात्री वाहन यहां रुक कर विश्राम, दैनिक कार्य, भोजन आदि भी करने लगे। समिति के प्रयास से वो स्थिति हुई कि किसी शायर का वह शेर कि बता श्मशान तेरी वीरानी क्यों नहीं जाती, लोग मर मर के भी तुझे आबाद किए जाते हैं, को झुठला दिया था। वर्ष 1992 में रानी की धर्मशाला में नगर के संभ्रांत लोगों की बैठक में श्मशान घाट के सुधार के लिए एक और कमेटी बनी। कमेटी श्मशान घाट की हालत सुधारने में जुट गई। आय के लिए श्मशान घाट की खाली पड़ी भूमि पर आम का बाग और खेती तथा मुरादाबाद मार्ग पर 100 दुकानें बनवा कर किराए पर दे दी गईं। जब तक समाज सेवा थी सब ठीक चल रहा था। आय का साधन होते ही विवाद होने लगे। स्थिति ये हुई कि वर्ष 2007 में नगर का श्मशान घाट गांव खलीलपुर का ग्रामसमाज की भूमि बन गया। तबसे शमशान सुधार समिति भंग हो गई। शमशान घाट का प्रबंधन ग्रामप्रधान के अधिकार क्षेत्र में आ गया।
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फिर से समिति बनाकर हो सुधार
पूर्व सभासद रजत उर्फ शैंकी रस्तोगी का कहना है कि समाजवादी पार्टी के शासन में ढाई करोड़ रुपये देकर श्मशान घाट का सौंदर्यीकरण कराया। लेकिन प्रबंधन की कमी और रखरखाव न होने के कारण श्मशान घाट अब फिर श्मशान बनकर रह गया है। अवैध वाहनों का पार्किंग स्थल, वाहनों की धुलाई स्थल हो गया है। दुकानों का किराया, खेती और बाग की रकम कहां जाती है, किसी को नहीं मालूम। सर्वब्राह्मण महासभा के जिला अध्यक्ष डा.यज्ञदत्त गौड़, राजपूत सभा संरक्षक विनीत देवरा, रोटरी क्लब अध्यक्ष कांताप्रसाद पुष्पक, जिला सुनार सभा के अरुण वर्मा, व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष मुकेश रस्तोगी, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष नैपाल सिंह, प्रजापति समाज के नेता राजपाल सिंह प्रजापति आदि ने प्रशासन से मांग की है कि नगर के कदीमी शमशान घाट नगर के लोगों की ही श्मशान सुधार समिति बनवाकर उसे प्रबंधन का अधिकार दिया जाए।
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