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शुरू हुआ टूटी पटरी की मरम्मत का काम
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शुरू हुआ टूटी पटरी की मरम्मत का काम
हल्दौर। गांव शादीपुर मिलक के पास जंगल में मंगलवार को नहर की पटरी टूट गई थी। ग्रामीणों ने फसल का मुआवजा दिलाए जाने से पहले टूटी पटरी को ठीक नहीं होने दिया था। सिंचाई विभाग के जेई के किसानों को मुआवजा दिलाए जाने के आश्वासन पर किसान मान गए। बृहस्पतिवार को टूटी पटरी की मरम्मत का कार्य शुरू कराया गया।
गांव शादीपुर मिलक के निकट दो दिन पूर्व नहर की पटरी टूटने से राजू, धर्मेंद्र सिंह, दाताराम, भूपेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, ओमपाल सिंह आदि किसानों की गन्ना, चरी, बाजरा और मक्का आदि की फसलें जलमग्न हो गई थीं और गांव को जाने वाले मार्ग में भी जलभराव हो गया था। जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। किसानों ने मामले की सूचना फोन पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दी। जिसके बाद नहर का पानी बंद करा दिया गया था। आक्रोशित ग्रामीणों ने फसलों का मुआवजा दिलाए जाने से पहले पटरी की मरम्मत नहीं होने दी। बृहस्पतिवार को सिंचाई विभाग के जेई नरेंद्र कुमार किसानों को समझाकर उनकी बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। जिसके बाद किसान शांत हुए। जेई ने टंपर और श्रमिकों की मदद से नहर की टूटी हुई पटरी की मरम्मत का कार्य शुरू कराया।
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हल्दौर। गांव शादीपुर मिलक के पास जंगल में मंगलवार को नहर की पटरी टूट गई थी। ग्रामीणों ने फसल का मुआवजा दिलाए जाने से पहले टूटी पटरी को ठीक नहीं होने दिया था। सिंचाई विभाग के जेई के किसानों को मुआवजा दिलाए जाने के आश्वासन पर किसान मान गए। बृहस्पतिवार को टूटी पटरी की मरम्मत का कार्य शुरू कराया गया।
गांव शादीपुर मिलक के निकट दो दिन पूर्व नहर की पटरी टूटने से राजू, धर्मेंद्र सिंह, दाताराम, भूपेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, ओमपाल सिंह आदि किसानों की गन्ना, चरी, बाजरा और मक्का आदि की फसलें जलमग्न हो गई थीं और गांव को जाने वाले मार्ग में भी जलभराव हो गया था। जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। किसानों ने मामले की सूचना फोन पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दी। जिसके बाद नहर का पानी बंद करा दिया गया था। आक्रोशित ग्रामीणों ने फसलों का मुआवजा दिलाए जाने से पहले पटरी की मरम्मत नहीं होने दी। बृहस्पतिवार को सिंचाई विभाग के जेई नरेंद्र कुमार किसानों को समझाकर उनकी बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। जिसके बाद किसान शांत हुए। जेई ने टंपर और श्रमिकों की मदद से नहर की टूटी हुई पटरी की मरम्मत का कार्य शुरू कराया।
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